धार भोजशाला मंदिर या मस्जिद? हाईकोर्ट में राजा भोज की किताब और इब्न बतूता के हवाले से पेश हुए बड़े सबूत। 15 अप्रैल को अगली सुनवाई।
धार भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में मंदिर होने के ऐतिहासिक सबूत पेश, 15 अप्रैल को फिर होगी सुनवाई
इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में चल रहे धार भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में बुधवार को लगातार पांचवें दिन भी जोरदार बहस हुई। हिंदू पक्ष की ओर से ऐतिहासिक दस्तावेजों, विदेशी यात्रियों के विवरण और राजा भोज की स्वयं लिखी पुस्तकों का हवाला देते हुए यह साबित करने की कोशिश की गई कि यह परिसर मूल रूप से धार भोजशाला मंदिर ही था, न कि मस्जिद ।
पांच दिन की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने अब अगली तारीख 15 अप्रैल 2026 निर्धारित की है। आइए जानते हैं कि कोर्ट में क्या-क्या दलीलें रखी गईं और अब आगे क्या होगा।
नवीनतम स्थिति:
मामले की सुनवाई अब 15 अप्रैल 2026 से दोबारा शुरू होगी। इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से आठ प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिसमें पूजा के अधिकार की मांग सबसे प्रमुख है ।
विवाद का इतिहास: भोजशाला का गौरवशाली अतीत
धार स्थित यह ऐतिहासिक धरोहर परमार वंश के महान राजा भोज (प्रथम) से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि राजा भोज ने 11वीं शताब्दी (लगभग 1034 ई.) में यहां एक विद्या केंद्र (संस्कृत पाठशाला) और सरस्वती मंदिर का निर्माण कराया था । यह स्थान केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि संगीत, खगोल विज्ञान और दर्शन की शिक्षा का केंद्र भी था।हालांकि, साल 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के बाद यहां के ढांचे को क्षति पहुंचाई गई और बाद में इसे मस्जिद में तब्दील कर दिया गया। वर्तमान में यह एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) का संरक्षित स्मारक है, जहां मंगलवार को हिंदू पूजा कर सकते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय नमाज अदा करता है ।
कोर्ट में पेश हुए 5 बड़े सबूत
हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने अपनी दलीलों में कई ऐतिहासिक प्रमाण रखे। ये वही सबूत हैं जो इस विवाद की पहेली को सुलझा सकते हैं:
1. राजा भोज की अपनी किताब ‘समरांगण सूत्रधार’
गुप्ता ने तर्क दिया कि राजा भोज द्वारा रचित वास्तुकला ग्रंथ ‘समरांगण सूत्रधार’ में जिस प्रकार के मंदिर निर्माण का वर्णन है, भोजशाला की वास्तुकला उससे मेल खाती है ।
2. सरस्वती कंठाभरण का उल्लेख
अभिभाषक ने ‘सरस्वती कंठाभरण’ का हवाला देते हुए बताया कि राजा भोज ने अपनी इस कृति में लिखा है कि भोजशाला में 500 विद्वान रहते थे, जो राजा के ‘मद’ पर अंकुश लगाते थे। यह इसे एक शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्था साबित करता है ।
3. इब्न बतूता की किताब ‘रिहला’
मुस्लिम विद्वान इब्न बतूता के यात्रा वृत्तांत का भी कोर्ट में जिक्र किया गया। गुप्ता ने बताया कि इब्न बतूता ने लिखा है कि खिलजी के मालवा जीतने के बाद मंदिर को तोड़कर उसी के पत्थरों से कमाल मौला की मस्जिद बनाई गई थी ।
4. जैन दार्शनिक की किताब
वर्ष 1303 के आसपास धार आए एक जैन दार्शनिक ने अपनी पुस्तक में भोजशाला का वर्णन करते हुए वहां दी जाने वाली शिक्षा का उल्लेख किया है ।
5. एएसआई सर्वे और विदेशी संग्रहालय में रखी मूर्ति
याचिकाकर्ताओं ने एएसआई की 2003 और 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यहां मंदिर के चिह्न (त्रिशूल, गणेश, ब्रह्मा की आकृतियां) मिली हैं। साथ ही, उन्होंने मांग की कि लंदन संग्रहालय में रखी वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति को वापस लाकर यहां पुनः स्थापित किया जाए ।
मुस्लिम पक्ष की क्या है राय?
जहां हिंदू पक्ष इसे मंदिर बता रहा है, वहीं मुस्लिम पक्ष (मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी) इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में आपत्ति जताई है कि एएसआई सर्वे में उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया । वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के आधार पर भी आपत्तियां दर्ज की जानी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि हाईकोर्ड इन आपत्तियों को देखते हुए फैसला करेगा ।
अब आगे क्या?
लगातार पांच दिन चली बहस के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 15 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की है । इससे पहले हाईकोर्ट के जज इस परिसर का निरीक्षण भी कर सकते हैं ।
