Ujjain बोरवेल हादसा: 22 घंटे की जंग के बाद भी नहीं बच सका मासूम भागीरथ, गांव में पसरा मातम
मध्यप्रदेश के Ujjain जिले के बड़नगर क्षेत्र से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। झालरिया गांव में खुले बोरवेल में गिरे 3 साल के मासूम भागीरथ देवासी को करीब 22 घंटे लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर फैल गई है।
9 अप्रैल की शाम हुआ हादसा
यह हादसा 9 अप्रैल की शाम करीब साढ़े सात बजे हुआ, जब मासूम भागीरथ खेलते-खेलते अचानक खुले पड़े बोरवेल में गिर गया। घटना के समय उसकी मां पास ही मौजूद थी, लेकिन सब कुछ इतना अचानक हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया।
बताया जा रहा है कि बच्चा लगभग 70 से 75 फीट गहरे बोरवेल में फंस गया था। परिजन और ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और प्रशासन को सूचना दी गई।
22 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। इस ऑपरेशन में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम भोपाल से मौके पर पहुंची। इसके अलावा हरदा, इंदौर और उज्जैन की राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें भी जुटीं।
रेस्क्यू टीमों ने बोरवेल के अंदर कैमरा डालकर बच्चे की स्थिति पर नजर रखी। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट देने की भी कोशिश की गई ताकि उसकी सांसें चलती रहें। साथ ही, बच्चे तक पहुंचने के लिए समानांतर गड्ढा (टनल) खोदने का काम भी शुरू किया गया।
मौके पर दो एंबुलेंस और मेडिकल टीम भी तैनात थी, ताकि बच्चे को बाहर निकालते ही तुरंत उपचार दिया जा सके।
बचाव के हर संभव प्रयास, लेकिन नहीं बच सकी जान
रेस्क्यू टीमों ने दिन-रात एक कर दिया, लेकिन 22 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद जब बच्चे को बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस खबर के सामने आते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे गांव में मातम पसर गया और हर कोई इस घटना से स्तब्ध नजर आया।
राजस्थान से आया था परिवार
जानकारी के अनुसार, भागीरथ का परिवार पाली जिला का रहने वाला है। वे लोग भेड़ चराने के लिए मध्यप्रदेश के इस इलाके में आए हुए थे और खेत में ही अस्थायी रूप से ठहरे हुए थे।
घटना के समय बच्चे के पिता मौके पर मौजूद नहीं थे। उन्हें इस हादसे की सूचना दी गई और वे राजस्थान से उज्जैन के लिए रवाना हुए।
घर में था शादी का माहौल
इस दुखद घटना ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। बताया जा रहा है कि परिवार में एक-दो दिन बाद शादी का कार्यक्रम था और उसकी तैयारियां चल रही थीं। मासूम भागीरथ के लिए नए कपड़े भी खरीदे गए थे, जिन्हें पहनकर वह खेल रहा था।
लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
ग्रामीणों और प्रशासन की बड़ी कोशिश
Ujjain घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने भी रेस्क्यू टीम का पूरा सहयोग किया। भारी मशीनों की मदद से खुदाई की गई और हर संभव प्रयास किया गया कि बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
हालांकि, इतनी गहराई और समय के चलते स्थिति बेहद जटिल हो गई थी, जिससे बचाव कार्य में काफी चुनौतियां सामने आईं।
सवालों के घेरे में खुले बोरवेल
इस घटना के बाद एक बार फिर खुले बोरवेल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बोरवेल को सही तरीके से बंद किया गया होता, तो यह हादसा टल सकता था।
ऐसे मामलों में लापरवाही अक्सर जानलेवा साबित होती है और प्रशासन को इस दिशा में सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
Ujjain के बड़नगर का यह हादसा बेहद दर्दनाक है। 3 साल का मासूम भागीरथ 22 घंटे तक जिंदगी की जंग लड़ता रहा, लेकिन आखिरकार वह हार गया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।
अब जरूरत है कि ऐसे हादसों से सबक लिया जाए और खुले बोरवेल को लेकर सख्त नियम लागू किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान न जाए।
