भीनमाल भागवत कथा कृष्ण रुक्मणी विवाह के छठे दिन दिव्य आयोजन हुआ, संत अभयदास महाराज ने सनातन धर्म और भारत की पुरातनता पर प्रेरक विचार रखे।
भीनमाल भागवत कथा कृष्ण रुक्मणी विवाह का दिव्य आयोजन
भीनमाल भागवत कथा कृष्ण रुक्मणी विवाह के अवसर पर स्थानीय निमगोरिया क्षेत्रपाल मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन एक दिव्य और भव्य आयोजन का साक्षी पूरा क्षेत्र बना। इस अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
संत अभयदास महाराज का प्रेरणादायक संदेश
व्यास पीठ से संत अभयदास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत की भूमि अद्वितीय है और इसकी पुरातनता का कोई सानी नहीं है। उन्होंने सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि सनातन का अर्थ ही है जिसका कोई आदि और अंत नहीं होता।उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के अन्य धर्मों की प्राचीनता को मापा जा सकता है, लेकिन भारत की सनातन परंपरा अनंत और शाश्वत है।
भारत की सनातन परंपरा और महत्व
संत अभयदास महाराज ने कहा कि भारत का साहित्य और दर्शन अजर-अमर है। उन्होंने उल्लेख किया कि गुलामी के दौर में Thomas Babington Macaulay की शिक्षा पद्धति ने भारतीय संस्कृति और धर्म को कमजोर करने का प्रयास किया।फिर भी सनातन संस्कृति आज भी अपनी जड़ों में मजबूत है और समाज को दिशा प्रदान कर रही है।
भीनमाल की साहित्यिक विरासत
भीनमाल को संस्कृत के महान विद्वान महाकवि माघ की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है।संत अभयदास महाराज ने सुझाव दिया कि इस गौरव को बनाए रखने के लिए भीनमाल में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से इस दिशा में पहल करने का आह्वान किया।
गुरु और मंत्र का गूढ़ ज्ञान
उन्होंने अपने प्रवचन में गुरु के महत्व को समझाते हुए कहा कि गुरु व्यक्ति नहीं बल्कि उसका दिया हुआ मंत्र होना चाहिए।यदि व्यक्ति को गुरु माना जाता है तो उसकी शाश्वतता समाप्त हो सकती है, क्योंकि व्यक्ति बदल सकता है। लेकिन गुरु द्वारा दिया गया मंत्र शाश्वत होता है और जीवन को परम लक्ष्य तक पहुंचाने में सहायक होता है।
कृष्ण-रुक्मणी विवाह का भव्य आयोजन
भीनमाल भागवत कथा कृष्ण रुक्मणी विवाह के अंतर्गत भगवान श्री कृष्ण और रुक्मणी जी के विवाह प्रसंग का सजीव चित्रण किया गया।
इस आयोजन में भीनमाल के श्रद्धालु बाराती बनकर शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ निकली बारात ने पूरे पंडाल को उत्सवमय बना दिया।महिलाओं द्वारा गाए गए मंगल गीतों ने विवाह की रस्मों को और भी जीवंत बना दिया। पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया।
उपस्थित गणमान्य नागरिक
इस अवसर पर प्रेमाराम बंजारा, गेमाराम परमार, चम्पालाल शर्मा, पहाड़सिंह राव, दिनेश दवे, श्याम लाल दवे, विजय सिंह राव, नेनाराम चौहान, श्यामलाल खेतावत, कपूराराम जीनगर, निरंजन व्यास, वेलाराम घाची, सुरम सिंह, कालुराम परमार, जगदीश जाट, सालूराम देवासी, बगदाराम, मनोज गुप्ता, पारस घांची, सुभाष त्रिवेदी, कन्हैयालाल खण्डेलवाल, विधुशेखर दवे (जोधपुर), दिनेश सोनी चाटवाड़ा, संजय जोशी, भारताराम सुंदेशा, अरविंद बंजारा, पारस बंजारा, कैसाराम देवासी, भावेश बंजारा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
भीनमाल भागवत कथा कृष्ण रुक्मणी विवाह न केवल एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि यह भारत की सनातन संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण भी बना।संत अभयदास महाराज के विचारों ने लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की प्रेरणा दी।


