Ujjain में महाकाल के दरबार का दिव्य नजारा: भांग के श्रृंगार और भस्म आरती में डूबे भक्त
मध्य प्रदेश के पवित्र शहर Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार, 9 अप्रैल 2026 को वैशाख कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के अवसर पर अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला। तड़के सुबह आयोजित होने वाली भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो उठे। मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के गगनभेदी जयघोष से गूंजता रहा।
सुबह 4 बजे खुले पट, हुआ दिव्य श्रृंगार
गुरुवार सुबह ठीक 4 बजे भगवान महाकाल के पट खोले गए। इसके साथ ही बाबा का भव्य और अलौकिक श्रृंगार किया गया। विशेष रूप से भांग से श्रृंगार और भस्म अर्पण इस दिन की प्रमुख विशेषता रही। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर गया। लोग देर रात से ही कतारों में लगकर इस पावन क्षण का इंतजार कर रहे थे।
विधि-विधान से हुआ पूजन और अभिषेक
Ujjain मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, भस्म आरती से पहले सभी धार्मिक परंपराओं का विधिपूर्वक पालन किया गया। सबसे पहले वीरभद्र भगवान से अनुमति ली गई, जिसके बाद गर्भगृह के पट खोले गए। पंडे-पुजारियों ने सभी देव प्रतिमाओं का पूजन-अर्चन किया।
इसके बाद भगवान महाकाल का अभिषेक जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” का उच्चारण किया गया और जल अर्पित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा भस्म अर्पण
पूजन के बाद महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल के शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। यह दृश्य अत्यंत अलौकिक और दुर्लभ होता है। ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और शंखनाद के साथ जब भस्म आरती शुरू हुई, तो पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में डूब गया।
मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसीलिए भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है और इसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
आरती का बदला हुआ समय (शेड्यूल)
Ujjain मंदिर प्रशासन द्वारा आरतियों के समय में बदलाव किया गया है, जो शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा। वर्तमान समयानुसार आरती का क्रम इस प्रकार है:
- भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे
- दद्योदक आरती: सुबह 7:00 से 7:45 बजे
- भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे
- संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे
- संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे
- शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे
इन आरतियों में भाग लेने के लिए श्रद्धालुओं को पहले से पंजीकरण और समय का ध्यान रखना होता है।
प्रसिद्ध हस्तियों ने भी किए दर्शन
इस विशेष अवसर पर कई प्रसिद्ध हस्तियों ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। मशहूर गायिका किंजल दवे और अभिनेत्री मोनल गज्जर ने भस्म आरती में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में दोनों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भस्म आरती और बाबा महाकाल के दर्शन शब्दों में व्यक्त नहीं किए जा सकते—यह केवल अनुभव करने की चीज है। उन्होंने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद सब कुछ बहुत व्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।
भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम
Ujjain मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि बाबा महाकाल के प्रति लोगों की आस्था कितनी गहरी है। भक्तों ने पूरे मन से भगवान का स्मरण किया और देश में शांति, प्रेम और सौहार्द की कामना की।
किंजल दवे और मोनल गज्जर ने भी भगवान महाकाल से यही प्रार्थना की कि देश में सुख-शांति बनी रहे और सभी के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। उन्होंने अंत में “जय श्री महाकाल” का जयघोष करते हुए अपनी भक्ति व्यक्त की।
निष्कर्ष
9 अप्रैल 2026 का यह पावन दिन Ujjain के महाकालेश्वर मंदिर में भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम लेकर आया। भांग के विशेष श्रृंगार, भस्म आरती की दिव्यता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। जो भी इस दिव्य दृश्य का साक्षी बना, वह इस अनुभव को जीवन भर नहीं भूल पाएगा।
