भारत जैन महामंडल दिव्यांग संघ यात्रा का भव्य आयोजन, दहाणु मोहनखेड़ा गुरु राजेंद्र धाम सहित पंचतीर्थ दर्शन, सेवा, भक्ति और सामाजिक समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल।
भारत जैन महामंडल दिव्यांग संघ यात्रा का भव्य और प्रेरणादायक आयोजन सम्पन्न
यात्रा का शुभारंभ
भारत जैन महामंडल दिव्यांग संघ यात्रा के अंतर्गत मुंबई के सातवी खेतवाड़ी से अध्यक्ष दिपेश जैन के नेतृत्व में यात्रा का शुभारंभ हुआ।
इस यात्रा में दिव्यांग जैन भाई-बहनों के साथ शाखा के पदाधिकारी एवं सदस्य भी शामिल हुए।इस शुभ अवसर पर सचिव कंचन ललवाणी, पूर्व अध्यक्ष राकेश सोलंकी, उत्तम जैन, मुकेश जैन और दिपिका शाह ने जिनशासन ध्वज दिखाकर मंगल यात्रा की शुरुआत की।
तीर्थ दर्शन और धार्मिक कार्यक्रम
भक्ति, गरबा और सांस्कृतिक आयोजन
दूसरे दिन के धार्मिक अनुष्ठान
दूसरे दिन भक्तामर पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें भावना शाह द्वारा प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई।विजेताओं को सम्मानित किया गया।इसके बाद कोसबाड स्थित मल्लीनाथ भगवान के तीर्थ में स्नात्र पूजा, अष्ट प्रकार की पूजा और शांति कलश का आयोजन हुआ।
यह स्थल सभी यात्रियों के लिए अत्यंत आकर्षक और आध्यात्मिक अनुभव देने वाला रहा।
बहुमान और सम्मान समारोह
इस अवसर पर विशेष आमंत्रित सदस्य मंगलचंद सेठ के संचालन में बहुमान कार्यक्रम आयोजित किया गया।मंच पर कोषाध्यक्ष जिनेन शाह, पूर्व अध्यक्षा दिपिका शाह, निवर्तमान अध्यक्ष रमेश जैन, वर्तमान अध्यक्ष दिपेश जैन और ट्रस्टी भरत सोलंकी उपस्थित रहे।गीत प्रस्तुतियों में गीता गाला और बीना गांधी ने अपनी प्रतिभा दिखाई।अध्यक्ष दिपेश जैन ने अपने कार्यकाल का विस्तृत विवरण देते हुए सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।सम्मानित किए गए प्रमुख नाम:
- मंगलचंद सेठ
- महेश संघवी
- जिनेन शाह
- रिकी राणावत
- राज देसाई
- भावना शाह
- माधवी मेहता
भामाशाह लाभार्थी परिवारों में स्वर्गीय रमणीक मगनीराम सिंघी एवं मोहिनी बेन किशोर जैन (पालड़ी) का भी सम्मान किया गया।
दिव्यांग भाई-बहनों की भावनाएं
इस भारत जैन महामंडल दिव्यांग संघ यात्रा ने दिव्यांग भाई-बहनों के चेहरे पर खुशी और संतोष ला दिया।कई यात्रियों ने कहा कि उन्होंने ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं किया था।
उनके लिए यह यात्रा एक सपने के साकार होने जैसी रही।
निष्कर्ष
यह भारत जैन महामंडल दिव्यांग संघ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरी।सभी यात्रियों ने गुरुदेव और भगवान के जयकारों के साथ इस यात्रा का समापन किया और मधुर स्मृतियों के साथ मुंबई के लिए प्रस्थान किया।


