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मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती पर बड़ा संदेश, भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए संतों से शक्तिशाली अपील

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Published On: 7 April 2026
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मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती पर दिया गया महत्वपूर्ण संदेश, जानिए कैसे संत समाज और जनभावना भारत को विश्वगुरु बना सकती है।

मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती: भारत को विश्वगुरु बनाने का आह्वान

मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख ने एक बड़ा संदेश दिया, जिसने सामाजिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में नई चर्चा को जन्म दिया है। मथुरा के वृंदावन स्थित मलूक पीठ में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में उन्होंने संत समाज से भारत को “विश्वगुरु” बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

संत मलूक दास जयंती का महत्व

संत मलूक दास की 452वीं जयंती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संत परंपरा की जीवंतता का प्रतीक है। वृंदावन के मलूक पीठ में हर वर्ष यह आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है, जिसमें देशभर से संत, भक्त और समाजसेवी शामिल होते हैं।

कार्यक्रम का पूरा विवरण

मथुरा के वृंदावन स्थित मलूक पीठ में इस वर्ष का आयोजन विशेष रहा। मंच पर संत रसिक माधव दास ने RSS प्रमुख मोहन भागवत का शाल ओढ़ाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में संतों और समाज के कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

मोहन भागवत का बयान: मुख्य बातें

मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती के दौरान उन्होंने कहा:

  • समाज को गो-भक्त बनाना जरूरी है
  • जनभावना मजबूत होगी तो व्यवस्था बदलेगी
  • सरकार भी कई बार चाहकर भी कदम नहीं उठा पाती
  • संत समाज को आगे आकर नेतृत्व करना चाहिए

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवर्तन केवल कानून से नहीं, बल्कि समाज की सोच से आता है।

 गो-भक्ति और सामाजिक चेतना

गो-भक्ति को लेकर भागवत ने कहा कि यदि समाज में जागरूकता बढ़ेगी, तो गो-हत्या स्वतः ही बंद हो जाएगी। उन्होंने इसे केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का विषय बताया।

भारत को विश्वगुरु बनाने का दृष्टिकोण

भारत को “विश्वगुरु” बनाने का विचार नया नहीं है, लेकिन इसे साकार करने के लिए समाज के हर वर्ग का सहयोग जरूरी है। भागवत के अनुसार:

  • संत समाज नैतिक दिशा दे सकता है
  • आम जनता जनभावना तैयार कर सकती है
  • शासन व्यवस्था उसे लागू कर सकती है

संत मलूक दास का जीवन परिचय

संत मलूक दास का जन्म उत्तर प्रदेश के कौशांबी में एक खत्री परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी साधना स्थली वृंदावन को बनाया और यमुना किनारे वंशीवट पर अपनी कुटिया स्थापित की।उनकी शिक्षाएं सरल, व्यावहारिक और आध्यात्मिक थीं, जो आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं।

प्रसिद्ध दोहा और उसका अर्थ

“अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम,
दास मलूका कह गए, सबके दाता राम।”
इस दोहे का अर्थ है कि जैसे अजगर और पक्षी बिना नौकरी या काम के भी जीवित रहते हैं, वैसे ही यदि मनुष्य भगवान पर विश्वास रखे, तो उसकी आवश्यकताएं पूरी होती हैं।

वर्तमान संदर्भ में संतों की भूमिका

आज के समय में जब समाज कई चुनौतियों से जूझ रहा है, संतों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वे समाज को नैतिकता, संयम और सदाचार का मार्ग दिखा सकते हैं।

निष्कर्ष

मोहन भागवत बयान संत मलूक दास जयंती केवल एक भाषण नहीं, बल्कि एक विचार है जो समाज को जागरूक और संगठित करने की दिशा में प्रेरित करता है। भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए केवल सरकार नहीं, बल्कि संत समाज और आम जनता की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।

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