Dr. B.R. Ambedkar विकास योजना के तहत किसानों को 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई पर ऋण और सब्सिडी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में किसानों को पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार ऐसे उपाय कर रही है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ प्रदेश को दूध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाने में सहायक होंगे। उनका कहना है कि वर्ष 2028 तक मध्यप्रदेश देश की मिल्क कैपिटल बनने का लक्ष्य प्राप्त कर लेगा। इसके लिए सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और गोवंश संरक्षण को प्राथमिकता दी है।
स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में “स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025” लागू की गई है। इसके अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में 5,000 से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। ये गौशालाएं न केवल गोवंश के आश्रय का कार्य करेंगी, बल्कि उनके पोषण और स्वास्थ्य की बेहतर व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगी।
प्रदेश के आगर मालवा, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जिलों में आदर्श गौशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं, जबकि भोपाल, जबलपुर और सागर में निर्माण कार्य प्रगतिशील है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जो गोवंश संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है।
दुग्ध उत्पादन में वृद्धि और सांची ब्रांड
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश देश के कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत योगदान देता है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाना है। इसके लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ साझेदारी की गई है, जिससे प्रदेश का सांची ब्रांड अधिक लोकप्रिय और व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगा।
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और उन्हें आधुनिक डेयरी इकाइयों की स्थापना के लिए ऋण एवं अनुदान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण आजीविका सशक्त होगी।
गोवंश संरक्षण और संवर्धन
प्रदेश सरकार ने गोवंश संरक्षण को उच्च प्राथमिकता दी है। इसके लिए गौसंवर्धन बोर्ड के माध्यम से गौशालाओं को चारा और भूसा के लिए 505 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। गोवंश के बेहतर पोषण के लिए प्रतिदिन प्रति पशु दी जाने वाली सहायता राशि बढ़ाकर 20 रुपये से 40 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
इसके अलावा, घायल या असहाय गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की व्यवस्था की जा रही है, जिससे उनकी देखभाल और परिवहन में सुविधा हो। गोवंश संरक्षण की यह पहल प्रदेश को देश में अग्रणी बनाती है।
Dr. B.R. Ambedkar विकास योजना
पशुपालन और डेयरी विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना का नाम बदलकर Dr. B.R. Ambedkar विकास योजना कर दिया गया है।
इस योजना के तहत, किसानों को 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए लगभग 42 लाख रुपये तक ऋण सहायता दी जाएगी। इसमें 25 से 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी शामिल है। योजना का उद्देश्य न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है बल्कि ग्रामीण आर्थिक स्वरोजगार को भी मजबूत करना है।
दुग्ध संकलन क्षमता का विस्तार
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और संग्रहण क्षमता बढ़ाने के लिए व्यापक योजना बनाई गई है। वर्तमान में दुग्ध संकलन कवरेज वाले गांवों की संख्या लगभग 9 हजार है। अगले पांच वर्षों में इसे 26 हजार गांवों तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
साथ ही, प्रदेश के कम से कम 50 प्रतिशत गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों की स्थापना करने की योजना है। इस तरह ग्रामीण स्तर पर दुग्ध उत्पादन और संग्रहण में सुधार होगा और किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा।
सहकारी समितियां और ग्रामीण आजीविका
अब तक मध्यप्रदेश में 1,181 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है और 617 निष्क्रिय समितियों को पुनः सक्रिय किया गया है। इनमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियां भी शामिल हैं।
इसके साथ ही, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए हर ब्लॉक में वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है। इन ग्रामों में किसानों को पशुपालन और डेयरी व्यवसाय से जुड़े प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
अति पिछड़ी जनजातियों के लिए विशेष योजनाएं
प्रदेश की अति पिछड़ी जनजातियों बैगा, सहरिया और भारिया के पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के तहत 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय दी जाती है।
यह पहल उन किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके पास पशुपालन के लिए आवश्यक संसाधन नहीं हैं।
डेयरी प्लस कार्यक्रम और नस्ल सुधार
मुख्यमंत्री डेयरी प्लस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीहोर, विदिशा और रायसेन जिलों में लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के तहत किसानों को उच्च उत्पादकता वाली गायों और भैंसों के लिए प्रशिक्षण, चारा और अन्य संसाधन प्रदान किए जाते हैं।
प्रदेश में पशु नस्ल सुधार को गति देने के लिए कृत्रिम गर्भाधान (AI) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इससे पशुओं की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादन में सुधार आएगा।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन और मैत्री केंद्र
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत प्रदेश में 1500 “मैत्री केंद्र” स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्नीशियन (AI Technicians) किसानों को प्रशिक्षण देंगे और कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार करेंगे।
इन केंद्रों की स्थापना से पशुपालन क्षेत्र में तकनीकी सुधार होगा और किसानों को आधुनिक पशुपालन पद्धतियों का लाभ मिलेगा।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश सरकार की ये सभी पहलें न केवल किसानों की आय बढ़ाने, बल्कि प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल बनाने में सहायक होंगी। पशुपालन योजनाओं और डेयरी विकास कार्यक्रमों के माध्यम से किसान आत्मनिर्भर होंगे, गोवंश का संरक्षण होगा, ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी और प्रदेश का कृषि व पशुपालन क्षेत्र स्थायी विकास की ओर अग्रसर होगा।
इस तरह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की योजनाएं मध्यप्रदेश को पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण समृद्धि के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक ले जाने का संकल्प साबित कर रही हैं।
