भीनमाल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल के दूसरे दिन अभयदास महाराज के प्रेरक प्रवचन से श्रद्धालु भाव-विभोर, भक्ति और सत्संग का संदेश।
श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल: भक्ति और सत्संग का संदेश, दूसरे दिन उमड़ा श्रद्धा का सागर
श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल के अंतर्गत आयोजित ज्ञान महायज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भीनमाल के स्थानीय नीम गोरिया क्षेत्रपाल (खेतलाजी) मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस पावन कथा में कथा वाचक युवाचार्य अभयदास महाराज ने भक्ति, सत्संग और मानव जीवन के उद्देश्य पर गहन विचार प्रस्तुत किए।
कथा स्थल पर वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया था, जहां श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते नजर आए।
अभयदास महाराज का प्रेरणादायक संदेश
श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल के दौरान युवाचार्य अभयदास महाराज ने कहा कि मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसे व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि:
- जीवन का उद्देश्य भक्ति, सेवा और सत्कर्म है
- ईश्वर की शरण में जाने से ही सच्ची शांति मिलती है
- जीवन को सार्थक बनाने के लिए आध्यात्मिक मार्ग अपनाना आवश्यक है
मानव जीवन एक पवित्र चादर: गहन व्याख्या
महाराज ने अत्यंत सुंदर उदाहरण देते हुए कहा—“मानव शरीर एक चादर के समान है, जिसे भगवान ने निर्मल रूप में दिया, लेकिन कर्मों से हम उसे मैला कर देते हैं।”श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल के इस संदेश ने श्रद्धालुओं को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।उन्होंने आगे कहा कि:
- अहंकार, लोभ और क्रोध मनुष्य के सबसे बड़े शत्रु हैं
- इन विकारों का त्याग करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है
- ईश्वर की भक्ति से मन और आत्मा शुद्ध होती है
सत्संग की महत्ता पर विशेष जोर
महाराज ने कहा:
- अच्छी संगति जीवन को ऊंचाइयों तक ले जाती है
- बुरी संगति पतन का कारण बनती है
- सत्संग से ज्ञान, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में:
- सेवा
- दया
- परोपकार
को अपनाएं और समाज में प्रेम व भाईचारे का वातावरण बनाएं।
श्रीमद्भागवत की महिमा
महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल के महत्व को बताते हुए कहा कि:
- इसका श्रवण करने मात्र से पापों का नाश होता है
- जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं
- मनुष्य को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन डॉ. घनश्याम व्यास ने किया।इस अवसर पर कालन्द्री से दण्डी स्वामी देवानंद सरस्वती महाराज कथा में पहुंचे। उन्होंने कहा कि:
- शिक्षा और संस्कार ही राष्ट्र निर्माण के आधार हैं
- सनातन संस्कृति को जीवित रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है
- “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भावना अपनानी चाहिए
उपस्थित प्रमुख गणमान्य नागरिक
श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख हैं:प्रेमाराम बंजारा, नायब तहसीलदार मीठालाल जोशी, गेमाराम परमार, चम्पालाल शर्मा, पहाड़सिंह राव, दिनेश दवे, श्याम लाल दवे, नेनाराम चौहान, श्यामलाल खेतावत, कपूराराम जीनगर, निरंजन व्यास, वेलाराम घाची, सुरम सिंह, कालुराम परमार, जगदीश जाट, सालूराम देवासी, बगदाराम, मनोज गुप्ता, पारश घाची,भामाशाह जयरूप राम माली, दिनेश सोनी चाटवाड़ा, भारताराम सुंदेशा, जोरावर सिंह सियाणा, अरविंद बंजारा, पारस बंजारा, गायत्री शक्ति पीठ के हरिकिशन शर्मा, अर्जुन सिंह राव, एडवोकेट रमेश आंजणा, जबराराम भाटी, पूर्णा सोनी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
सामाजिक और आध्यात्मिक प्रभाव
श्रीमद्भागवत कथा भीनमाल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक अभियान बन चुका है।इस कथा के माध्यम से:
- लोगों में नैतिकता और संस्कारों का जागरण हो रहा है
- समाज में सकारात्मकता और सद्भाव बढ़ रहा है


