मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी: किसानों की नाराजगी
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीदी को लेकर किसानों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है। सरकार बीते कुछ समय से इस प्रक्रिया में विलंब कर रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खरीदी की तारीखों में बार-बार बदलाव
बीते एक महीने में सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख दो से तीन बार बदल दी। वर्तमान में तय किया गया है कि समर्थन मूल्य पर खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होगी। इसके पहले किसानों को आश्वासन दिया गया था कि खरीदी जल्द शुरू होगी, लेकिन लगातार तारीख बढ़ाने से किसान निराश और आक्रोशित हैं।
किसानों का कहना है कि यदि तारीख स्थिर रहती तो वे अपनी फसल बेहतर मूल्य पर बेच सकते थे। अब उन्हें मजबूरन ओने-पौने भाव में अपने गेहूं को मंडी में बेचना पड़ रहा है।
आर्थिक नुकसान का आंकलन
उज्जैन मंडी में इस सीजन में लगभग तीन लाख क्विंटल गेहूं पहले ही बिक चुका है। इनमें से 75 प्रतिशत गेहूं 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिका। जबकि समर्थन मूल्य पर गेहूं 2625 रुपये प्रति क्विंटल बिकता। इसका मतलब किसानों को प्रति क्विंटल 125–400 रुपये का नुकसान हुआ।
भारतीय किसान संघ के नेता भारत सिंह बैस का कहना है कि सरकार खरीदी प्रक्रिया में टालमटोल कर रही है, जिससे किसानों की आमदनी प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 10 अप्रैल तक MSP खरीदी नहीं शुरू हुई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
उज्जैन मंडी में नीलामी
उज्जैन कृषि उपज मंडी में हाल ही में नीलामी आयोजित की गई। गुड फ्रायडे के दिन भी व्यापारियों की सहमति से मंडी संचालन जारी रहा। इस दौरान मंडी में 18,000 बोरी गेहूं की आवक दर्ज की गई।
विशेष रूप से 55 बोरी शरबती गेहूं नीलामी के लिए आया, जो 4171 रुपये प्रति क्विंटल में बिका। अधिकांश व्यापारियों ने बैंक अवकाश के बावजूद किसानों को भुगतान ऑनलाइन उनके खातों में किया।
मालवा क्षेत्र में इस बार शरबती गेहूं की आपूर्ति कम होने से इसकी कीमत में तेजी आई। चमक वाले लोकवन गेहूं की कीमत 3020 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। पोषक और मीडियम श्रेणी के गेहूं के भाव अपेक्षाकृत कमजोर बने रहे।
किसानों का रोष और आंदोलन की तैयारी
किसानों का कहना है कि कटाई के समय उनके पास भंडारण की क्षमता सीमित होती है। यदि सरकारी खरीदी समय पर शुरू नहीं होती तो उन्हें मजबूरन ओने-पौने भाव में फसल बेचनी पड़ती है।
किसान संघ ने कहा कि यदि सरकार ने 10 अप्रैल तक समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं की तो वे सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। प्रदेशभर के किसान अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं। उनका मुख्य मुद्दा यह है कि सरकार MSP पर खरीदी सुनिश्चित करे ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले।
खरीदी में देरी का प्रभाव
किसानों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उन्होंने फसल तैयार करने में काफी मेहनत और निवेश किया है। समय पर खरीदी न होने से उनकी आय प्रभावित हो रही है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खरीदी में विलंब हुआ तो इसका असर किसानों की आर्थिक स्थिति के साथ-साथ राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। समय पर खरीदी न होने से किसानों का भरोसा सरकार पर कमजोर होगा।
मंडी व्यवस्थाओं की स्थिति
उज्जैन मंडी में नीलामी के दौरान व्यापारी संघ ने सहयोग किया और सुनिश्चित किया कि व्यापार सुचारू रूप से चले। अधिकांश व्यापारियों ने किसानों के भुगतान ऑनलाइन किया।
फिर भी, MSP पर खरीदी में विलंब के कारण किसानों का भरोसा सरकार पर कमजोर हुआ है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर MSP खरीदी किसानों की आय और बाजार की स्थिरता दोनों के लिए जरूरी है।
गेहूं की गुणवत्ता और भाव
नीलामी के दौरान देखा गया कि किसानों की फसल की गुणवत्ता के अनुसार कीमतें भिन्न थीं। शरबती गेहूं की कीमत अन्य प्रकार के गेहूं से काफी अधिक रही। चमक वाले लोकवन गेहूं की कीमत 3020 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।
मालवा क्षेत्र में शरबती गेहूं की आपूर्ति कम होने से इसकी कीमत बढ़ी है। पोषक और मीडियम श्रेणी के गेहूं के भाव अपेक्षाकृत कमजोर बने रहे।
सरकार और प्रशासन का रुख
सरकारी अधिकारियों ने कहा है कि 10 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे धैर्य रखें और अपनी फसल को सुरक्षित रखने की कोशिश करें।
मंडी में उचित व्यवस्था बनाई जा रही है ताकि खरीदी प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि खरीदी सुचारू रूप से होगी और किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा।
किसानों की मुख्य मांगें
किसानों का कहना है कि MSP पर खरीदी न केवल उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। यदि खरीदी समय पर नहीं होती, तो किसान मजबूरी में बाजार में अपना गेहूं कम कीमत पर बेच देते हैं, जिससे उनकी आय घटती है।
किसानों की मुख्य मांगें हैं:
- समर्थन मूल्य पर खरीदी की समय पर शुरुआत
- फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना
- मंडियों में सुव्यवस्थित व्यवस्था
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में इस समय MSP पर गेहूं खरीदी का मुद्दा किसानों के लिए सबसे संवेदनशील विषय बन गया है। समय पर खरीदी न होने से किसानों की आय प्रभावित हो रही है और उनका भरोसा सरकार पर कमजोर हो रहा है।
सरकार के लिए यह आवश्यक है कि वे किसानों के हितों को प्राथमिकता दें और समर्थन मूल्य पर खरीदी को लेकर ठोस कदम उठाएं। यदि खरीदी समय पर शुरू होती है, तो किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बाजार में गेहूं की आपूर्ति सुचारू रहेगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी।
समर्थन मूल्य पर खरीदी केवल किसानों की आय का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य की खाद्य सुरक्षा, कृषि बाजार की स्थिरता और किसानों के विश्वास से जुड़ा हुआ है।
