Middle East युद्ध का भारत पर असर: गैस संकट से फैक्टरियाँ ठप, लाखों मजदूर लौटे अपने गांव
Middle East में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इससे कई राज्यों में उद्योग प्रभावित हो गए हैं। गैस और पेट्रोकेमिकल संकट के कारण फैक्टरियाँ या तो पूरी तरह बंद हो गई हैं या उनकी शिफ्टें घटा दी गई हैं। इस वजह से लाखों प्रवासी मजदूर रोजगार खोने के चलते उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और अन्य राज्यों की ओर लौट रहे हैं।
फैक्टरियों और छोटे व्यवसायों पर संकट
सूरत के टेक्सटाइल हब से लेकर दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, तेलंगाना और मध्य प्रदेश तक कई उद्योग गैस की कमी के कारण प्रभावित हो रहे हैं। गुजरात के सूरत में छह लाख से अधिक पावरलूम, एयरजेट और वाटरजेट मशीनें गैस पर निर्भर हैं। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण कई फैक्टरियाँ केवल एक शिफ्ट में काम कर रही हैं, जबकि डाइंग यूनिट्स सप्ताह में तीन दिन बंद रह रही हैं।
सचिन इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी के सचिव मयूर गोलवाला के अनुसार, गैस संकट के कारण लगभग 5 लाख मजदूर अपने गांव लौट चुके हैं। इसका असर होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भी पड़ा है, क्योंकि खाना पकाने और उत्पादन कार्य प्रभावित हुए हैं।
दहेज और अंकलेश्वर में गैस और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की अनियमित आपूर्ति के कारण कई यूनिटें क्षमता से कम पर चल रही हैं। वलसाड जिले के वापी, सरीगाम, दमण और दादरा-नगर हवेली में प्लास्टिक, केमिकल, पेपर और पैकेजिंग उद्योग प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों से लाखों मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और ओडिशा की ओर लौट रहे हैं। वहीं छोटे शहरों जैसे जयपुर, जोधपुर और इंदौर में स्थानीय मजदूर भी अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।
राजस्थान: मजदूर पलायन
राजस्थान के कोटपूतली के केशवाना इंडस्ट्रियल एरिया में गैस संकट के कारण कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो गई हैं। करीब 100–150 मजदूर यहां से अपने गांव लौट चुके हैं। मोरबी में टाइल फैक्टरियों के बंद होने से शाहपुरा (जयपुर) में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय प्रभावित हुआ। जयपुर और जोधपुर में छोटे व्यवसाय गैस की कमी के कारण प्रभावित हुए हैं। रोज़गार की कमी और गैस संकट के चलते रेस्टोरेंट और होटल व्यवसाय ठप हो गया, जिससे दिहाड़ी मजदूर और अस्थायी कर्मचारी प्रभावित हुए।
अजीविका ब्यूरो के सर्वे के अनुसार, जयपुर के 10–20 प्रतिशत मजदूर पहले ही अपने गांव लौट चुके हैं, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।
मध्य प्रदेश: इंदौर और पिथमपुर में उद्योग प्रभावित
मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर इंदौर और पिथमपुर में फैक्टरियों पर दोहरी मार पड़ी है। पहले, गैस, केमिकल और कच्चे माल की कमी ने उत्पादन को प्रभावित किया। दूसरे, निर्यात आदेश कम होने और रोजगार संकट के कारण शिफ्टें घटा दी गई हैं। इंदौर के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में PVC, पाइप और बोतल बनाने वाले कारखानों में गैस की आपूर्ति 50 प्रतिशत तक कम हो गई है, जिससे एक ही शिफ्ट चल रही है। सीधे तौर पर 20 हजार लोगों की नौकरी प्रभावित हुई है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 10 हजार लोगों का काम खत्म हुआ।
गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, गुरुग्राम और राजस्थान से मजदूरों का पलायन जारी है। अहमदाबाद और मोरबी के फैक्टरियों में उत्पादन बाधित होने के कारण मध्य प्रदेश के भिंड़ जिले के दो हजार मजदूरों का रोजगार प्रभावित हुआ।
छोटे व्यवसाय और रोज़गार पर असर
गैस और पेट्रोकेमिकल संकट केवल बड़ी फैक्टरियों तक सीमित नहीं है। छोटे व्यवसाय, ढाबे, रेस्टोरेंट, रेहड़ी-पटरी वाले, फेरीवाले और अस्थायी व्यवसाय करने वाले लोग भी प्रभावित हैं। गैस सिलेंडर की कमी के कारण कई छोटे व्यवसाय बंद हैं। रोज़गार प्रभावित होने से दिहाड़ी मजदूरों और अस्थायी कर्मचारियों को घर लौटने को मजबूर होना पड़ा।
मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और दिल्ली में औद्योगिक गतिविधियों में कमी आई है। उत्पादन बाधित होने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, चाहे वह टेक्सटाइल, प्लास्टिक, पैकेजिंग या केमिकल उद्योग हो।
संकट के कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट युद्ध प्रमुख कारण है। तेल और गैस की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में बाधा ने भारत की गैस आधारित औद्योगिक इकाइयों को प्रभावित किया है।
आगे का परिदृश्य
यदि Middle East युद्ध और गैस संकट जारी रहा, तो भारत के उद्योगों को लंबी अवधि तक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मजदूरों का गांव लौटना शहरी क्षेत्रों में श्रमिक संकट को कम करेगा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकता है। नीति निर्माता और उद्योग जगत इस स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और आपातकालीन उपायों पर विचार कर रहे हैं ताकि महत्वपूर्ण सेक्टरों में उत्पादन जारी रह सके।
फिलहाल, यह गैस संकट भारत के उद्योग, रोज़गार और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहा है। फैक्टरियाँ बंद हैं, शिफ्टें कम हो गई हैं, और लाखों मजदूर अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। यह संकट यह भी दर्शाता है कि वैश्विक घटनाओं के दूरदराज़ के असर सीधे स्थानीय अर्थव्यवस्था और जीवन पर पड़ सकते हैं।
