Purnima महोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, भक्तों ने बढ़-चढ़ कर लिया हिस्सा
पेटलावद (निप्र) के मेवा नगर में चैत्र सुदी Purnima महोत्सव श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान की असीम कृपा एवं श्री नाकोड़ा भैरव के परम् उपासक श्री सुमित पीपाड़ा के सानिध्य में हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। महोत्सव की शुरुआत से ही भक्तों की भीड़ ने आयोजन स्थल को भक्तिमय वातावरण से भर दिया। सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में भक्तों ने अपने दादा के दर्शन किए और अपनी अपनी अर्जी लगाई। महोत्सव में केसर पूजन, दीप आरती और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।
प्रातः आरती और चढ़ावे की प्रक्रिया
महोत्सव की शुरुआत प्रातः कालीन आरती से हुई। ट्रस्टी मनीष कुमट (झकनावदा) के नेतृत्व में सबसे पहले श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान, मंगल दिवा और श्री नाकोड़ा भैरव देव को दो-दो चढ़ावे अर्पित किए गए। आरती के दौरान भक्तों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया और चढ़ावे बड़े उत्साह के साथ अर्पित किए। आरती समाप्त होने के बाद भक्तों ने खुद को दादा के समक्ष उपस्थित कर अपनी मन्नतों और मनोकामनाओं को पूरा करने की कामना की।

मन्नत धारियों की भक्ति और समर्पण
आरती के पश्चात मन्नत धारियों ने अपनी-अपनी मन्नत पूरी की। मोहित मुन्नत परिवार ने पूरे परिवार की उपस्थिति में श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान को चांदी की आंगी अर्पित की। अन्य श्रद्धालुओं ने छत्र, पुष्पमाला, तेल, घी के डिब्बे और मिष्ठान अर्पित करके अपनी मानते पूरी की। अहमदाबाद से आए अंकित शाह परिवार ने नाकोड़ा भैरव के इक्यावन स्वरूपों के समक्ष भेंट अर्पित की। वहीं दूर-दराज़ के श्रद्धालुओं ने भी दादा के आदेश अनुसार अपने अपने श्रद्धा भेंट भेंटकर श्रद्धा प्रकट की।
कुछ भक्तों ने दरबार के सेवकों के लिए टी-शर्ट और तस्वीर भेंट की। यह दर्शाता है कि महोत्सव में श्रद्धालुओं ने केवल धार्मिक कृत्यों तक ही सीमित न रहते हुए सामाजिक योगदान भी दिया। इस प्रकार महोत्सव न केवल आध्यात्मिक अनुभव बल्कि सामुदायिक सहयोग और परंपरा की रक्षा का भी प्रतीक बन गया।

भूमि पूजन और विशेष चढ़ावे
महत्वपूर्ण गतिविधियों में भूमि पूजन एक विशेष स्थान रखता है। ट्रस्टी राजेश काठेड़ नलखेड़ा ने ट्रस्टी अध्यक्ष सुनील मालवीय की उपस्थिति में भूमि पूजन के चढ़ावे बोलें। इसमें सबसे पहले श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान के प्रथम भूमि पूजन का लाभ दिलीप कुमार जी जैन, मुंबई ने लिया। इसके बाद श्री नाकोड़ा भैरव के भूमि पूजन का लाभ अशोक कुमार रतनलाल खुनिया, श्री काला भैरव के भूमि पूजन का लाभ सोभागमलजी लुक्कड़ थादला परिवार, श्री गौरा भैरूजी के भूमि पूजन का लाभ अशोक कुमार शोभागमल लुक्कड़ थांदला परिवार ने लिया। अंतिम भूमि पूजन, श्री क्षेत्र पाल राजा के, मुदित कुमार कमल कुमार कालिया झकनावदा परिवार ने संपन्न किया।
भूमि पूजन के पश्चात सभी लाभार्थियों को ट्रस्टी सुनील झालोका, ट्रस्टी राजेश काठेड़ नलखेड़ा, ट्रस्टी संजय खटोड़, ट्रस्टी सौरभ खेमेसरा और ट्रस्टी मनीष कुमट द्वारा पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने महोत्सव में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं में गर्व और भक्ति की भावना को और प्रगाढ़ किया।

भक्तों का उत्साह और सहयोग
दिनभर की गतिविधियों में अन्नपूर्णा वितरण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस दौरान दिलीप कुमार और राहुल कुमार बाफना ने अन्नपूर्णा वितरण में सहयोग किया। महोत्सव का आयोजन श्री नाकोड़ा पार्श्वभैरव ट्रस्ट, मेवानगर पेटलावद की देखरेख में हुआ। महिला मंडल और कार्यकारिणी ने भी पूरी तत्परता और सहयोग के साथ आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महोत्सव में शामिल भक्तों ने यह अनुभव किया कि धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी माध्यम बनता है। विभिन्न आयु वर्ग के लोग, चाहे वे छोटे बच्चे हों या बुजुर्ग, सभी ने अपने तरीके से उत्सव का आनंद लिया और अपने परिवार और समाज के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया।
समापन और सामाजिक संदेश
महोत्सव का समापन शाम के समय हुआ, जब सभी भक्तों ने मिलकर दीप प्रज्वलित किए और आरती संपन्न की। इस महोत्सव ने न केवल धार्मिक कर्तव्यों की पूर्ति का अनुभव कराया बल्कि श्रद्धालुओं को परंपरा, भक्ति और सामाजिक सहयोग के मूल्यों से भी जोड़ दिया। सभी उपस्थित लोगों ने महोत्सव की सफलता के लिए ट्रस्ट और आयोजकों की सराहना की।
इस प्रकार, पेटलावद के मेवा नगर में आयोजित चैत्र सुदी पूर्णिमा महोत्सव ने भक्तों को आध्यात्मिक तृप्ति प्रदान करने के साथ-साथ समुदाय में भाईचारे और एकजुटता की भावना को भी मजबूत किया। आयोजन के दौरान सभी गतिविधियों में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और महोत्सव को यादगार बनाया।
