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बड़ी राहत! इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में अब नहीं बनाई जाएगी सर्विस रोड, किसानों की मानी सरकार

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Published On: 2 April 2026
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इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर बड़ा फैसला। सर्विस रोड हटाई गई, सड़क अब जमीन के बराबर बनेगी। जानिए किसानों को कितना मिलेगा मुआवजा और कौन से गांव होंगे शामिल।

बड़ी खबर: इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में अब नहीं बनाई जाएगी सर्विस रोड, किसानों की मांग स्वीकार

इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे व्यस्त और महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक, इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। लंबे समय से प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के विरोध के चलते सरकार ने अपना रुख बदलते हुए इस कॉरिडोर के डिजाइन में बड़ा बदलाव किया है। अब इस सड़क पर सर्विस रोड नहीं बनाई जाएगी।

यह निर्णय उन हजारों किसानों के लिए राहत भरी खबर है, जिनकी जमीन इस परियोजना की चपेट में आ रही थी। आइए, इस बड़े बदलाव को विस्तार से समझते हैं।

क्यों हुआ डिजाइन में बदलाव?

पहले इस इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर को ‘एक्सेस कंट्रोल्ड’ (बंद पहुंच) के रूप में बनाने की योजना थी। इसका मतलब था कि सड़क के दोनों तरफ 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस रोड बनाई जाती, और मुख्य सड़क पुलिया या फ्लाईओवर पर उठी हुई (Elevated) होती। इससे गांव वाले सीधे मेन रोड तक नहीं पहुंच पाते।किसानों ने इसका जोरदार विरोध किया। उनकी दो मुख्य मांगें थीं:

  • जमीन के बराबर सड़क: ऊंची सड़क बनने से किसानों की जमीन में पानी भराव (Waterlogging) की समस्या हो जाती, जिससे फसलें बर्बाद हो जातीं।
  • सही मुआवजा: किसानों को बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

सरकार ने दोनों मांगों को स्वीकार करते हुए पहले मुआवजे के मोर्चे पर बिक्री छांट के आधार पर भुगतान करना शुरू किया, और अब इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में सर्विस रोड हटाने का फैसला लिया है।

क्या है ‘नान एक्सेस कंट्रोल्ड’ रोड?

सरकार ने अब इस प्रोजेक्ट को ‘नान एक्सेस कंट्रोल्ड’ (खुली पहुंच) के तौर पर बनाने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। इसका मतलब है:

  • कोई सर्विस रोड नहीं: अब 77 किलोमीटर लंबे इस रूट पर दोनों तरफ सात-सात मीटर की सर्विस रोड नहीं बनेगी।
  • जमीन के बराबर सड़क: सड़क अब जमीन के समान स्तर (At-Grade) पर बनेगी, जिससे ग्रामीण कहीं से भी सड़क तक पहुंच सकेंगे।
  • पानी भराव की समस्या खत्म: सड़क जमीन के बराबर होने से किसानों के खेतों में बारिश का पानी नहीं रुकेगा, जो पहले सबसे बड़ा डर था।

यह बदलाव किसानों की सोच और सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के लिए नया प्लान

नए प्लान के अनुसार, यह सड़क अब 4-लेन की होगी, लेकिन बिना सर्विस रोड के। इससे न सिर्फ निर्माण लागत कम होगी, बल्कि जमीन अधिग्रहण का विवाद भी खत्म हो जाएगा।पहले जहां यह पूरी तरह से बंद (Access Controlled) सड़क थी, वहीं अब यह खुली सड़क होगी, जिससे आसपास के गांवों का विकास भी तेजी से होगा। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर अब एक ऐसा राजमार्ग होगा जो विकास के साथ-साथ स्थानीय लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखेगा।

किसानों को कितना मिलेगा मुआवजा?

सरकार ने सिर्फ डिजाइन ही नहीं बदला, बल्कि मुआवजे के मामले में भी उदारता दिखाई है। पहले तय मुआवजे से 583.93 करोड़ रुपये अधिक देने का फैसला किया गया है।

  • इंदौर जिले का आंकड़ा: इंदौर जिले की सांवेर और हातोद तहसील के 662 किसानों को 626 करोड़, 49 लाख, 76 हजार 436 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

  • सांवेर तहसील: लगभग 376 करोड़
  • हातोद तहसील: लगभग 250 करोड़
  • आधार: मुआवजा ‘बिक्री छांट’ (Sale Deed based valuation) के आधार पर दिया जा रहा है, जो कि बाजार भाव के काफी करीब होता है।भू-अर्जन के लिए कुल 313.839 हैक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है। इसमें 292.513 हैक्टेयर निजी जमीन शामिल है। अवार्ड पारित हो चुके हैं और मुआवजा वितरण शुरू हो गया है।

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किन-किन गांवों को होगा फायदा? (List of Villages)

यह इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर कुल 28 गांवों से होकर गुजरेगा, जिसमें इंदौर के 20 और उज्जैन के 8 गांव शामिल हैं। आइए देखते हैं इंदौर वाले गांव कौन से हैं:इंदौर जिले के प्रभावित गांव:

क्रमांक गांव का नाम क्रमांक गांव का नाम
1 बुढ़ानिया 11 हरियाखेड़ी
2 हातोद 12 खतेडिया
3 सगवाल 13 रंगकराडिया
4 कांकरिया बोडिया 14 कछालिया
5 जंबूड़ी सरवर 15 बलघारा
6 जिन्दाखेड़ा 16 पोटलोद
7 रतनखेड़ी 17 टुमनी
8 बीबी खेड़ी 18 मगरखेड़ी
9 पिपलिया कायस्थ 19 चित्तौड़ा
10 बालरिया 20 रालामंडल

उल्लेखनीय है कि उज्जैन के 8 गांवों को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

प्रोजेक्ट की लागत और ठेकेदार (Project Cost & Contractor)

यह परियोजना कागजों से निकलकर अब जमीन पर उतर चुकी है। सरकार ने इसके लिए ठोस कदम उठा लिए हैं।

  • कुल प्रशासनिक स्वीकृति: 2935 करोड़ रुपये (30 सितंबर 2025 को)
  • अनुबंध मूल्य: 1089 करोड़ रुपये
  • ठेकेदार (Contractor): मेसर्स सीगल इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. (फरवरी में अनुबंध पूरा)
  • मॉडल: हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM)

आगे की राह और निर्माण समयसीमा (Road Ahead)

सर्विस रोड हटने और मुआवजा वितरण शुरू होने के साथ ही, इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर के निर्माण में आ रही सभी बाधाएं समाप्त हो गई हैं। अब उम्मीद जताई जा रही है कि निर्माण कार्य तेज गति से शुरू होगा।यह सड़क बनने से इंदौर से उज्जैन का सफर घंटों नहीं, बल्कि मिनटों में पूरा होगा। इससे सिम्हास्ता, महाकाल मंदिर जैसे धार्मिक स्थलों के साथ-साथ पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को भी सीधा फायदा होगा।

निष्कर्ष

सरकार का यह फैसला ‘विकास भी, विरासत भी’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ की मंशा को साबित करता है। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर में सर्विस रोड न बनाने का निर्णय एक मिसाल कायम करेगा, जहां प्रशासन ने किसानों की जमीन और उनकी आजीविका को प्राथमिकता दी।
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