मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात दी है। अब एमपी के टोल प्लाजा पर हार्वेस्टर का शुल्क नहीं लगेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव के इस फैसले से कटाई लागत घटेगी और किसानों की आय बढ़ेगी। पढ़ें पूरी खबर।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का ऐतिहासिक फैसला
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार पहले दिन से ही किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। किसान कल्याण वर्ष 2026 को “समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश” के विचार को सार्थक करते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के संचालक मंडल की बैठक में दिए।समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) में आयोजित इस बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस निर्णय के साथ ही प्रदेश सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाना उसकी प्राथमिकता है।
क्यों जरूरी था हार्वेस्टर को टोल मुक्त करना?
कंबाइन हार्वेस्टर एक आवश्यक कृषि उपकरण है, जिसका उपयोग विशेष रूप से गेहूं, धान और अन्य फसलों की कटाई के लिए किया जाता है। अक्सर किसान एक ही हार्वेस्टर का उपयोग कई खेतों और कई जिलों में करते हैं। इसके लिए उन्हें टोल प्लाजा पर बार-बार शुल्क देना पड़ता था, जिससे कटाई का खर्च बढ़ जाता था।
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लागत में वृद्धि: पहले हार्वेस्टर को वाणिज्यिक वाहन की श्रेणी में रखकर टोल वसूला जाता था, जिससे किसानों की परिवहन लागत में 20-25% तक का इजाफा होता था।
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समय की बर्बादी: टोल प्लाजा पर रुककर शुल्क जमा करने और वाहन की श्रेणी को लेकर होने वाले विवादों में समय की भी बर्बादी होती थी, जो कटाई के सीजन में बहुत मूल्यवान होता है।
परिवहन लागत में कमी से किसानों को होगा सीधा फायदा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एमपी के टोल प्लाजा पर हार्वेस्टर का शुल्क समाप्त किए जाने से हार्वेस्टर की परिवहन लागत में भारी कमी आएगी। इसका सकारात्मक प्रभाव सीधे कृषि उपज के मूल्य पर होगा। जब कटाई का खर्च घटेगा, तो किसान को अपनी उपज का अधिक मूल्य मिल सकेगा।यह निर्णय न सिर्फ बड़े किसानों के लिए, बल्कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी अत्यधिक हितकर सिद्ध होगा, जो अक्सर सामूहिक रूप से हार्वेस्टर किराए पर लेते हैं। इससे खेती की लागत (Cost of Cultivation) में कमी आएगी और किसानों की शुद्ध आय (Net Income) में वृद्धि होगी।
सड़क विकास निगम की बैठक में लिए गए अन्य अहम निर्णय
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई संचालक मंडल की बैठक में केवल टोल छूट का ही निर्णय नहीं लिया गया, बल्कि प्रदेश की सड़क संरचना को मजबूत करने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए।
ग्रीन फील्ड मार्ग परियोजनाओं को मिली मंजूरी
बैठक में इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन-जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को नॉन-एक्सेस कंट्रोल परियोजना के रूप में अनुमोदन प्रदान किया गया। इन सड़कों के बनने से मालवा क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा और कृषि उपज को मंडियों तक पहुंचने में समय कम लगेगा।
पश्चिम भोपाल बाईपास का परिवर्तित एलाइनमेंट हुआ स्वीकृत
राजधानी भोपाल में यातायात के दबाव को कम करने के लिए पश्चिम भोपाल बाईपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को अनुमोदन प्रदान कर निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई। यह बाईपास न केवल आम नागरिकों के लिए बल्कि कृषि उपकरणों और उपज के परिवहन के लिए भी वरदान साबित होगा।
बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे, श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव लोक निर्माण श्री सुखबीर सिंह, प्रमुख सचिव वन श्री संदीप यादव तथा प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम श्री भरत यादव उपस्थित थे।
किसानों और कृषि विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं
इस फैसले का प्रदेश भर के किसानों और कृषि विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। भोपाल के किसान नेता रामसिंह परमार ने कहा, *”यह एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला है। पहले हार्वेस्टर को एक जिले से दूसरे जिले ले जाने में 5-6 टोल प्लाजा आते थे, जिनमें हजारों रुपये का खर्चा होता था। अब यह पैसा बचेगा, जो सीधे हमारी जेब में जाएगा।”*कृषि अर्थशास्त्री डॉ. एस.के. राव ने बताया कि यह निर्णय आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करता है। “जब कटाई के उपकरणों की आवाजाही मुक्त होगी, तो किसान समय पर फसल काट पाएंगे, जिससे फसल खराब होने की संभावना कम हो जाती है।
निष्कर्ष: ‘समृद्ध किसान’ की ओर बढ़ता प्रदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है। एमपी के टोल प्लाजा पर हार्वेस्टर का शुल्क मुक्त करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कड़ी है।इसके साथ ही, सड़क विकास निगम द्वारा नई ग्रीन फील्ड परियोजनाओं और बाईपास को मंजूरी दिए जाने से प्रदेश का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। यह फैसला किसानों की आय को दोगुना करने के सरकारी लक्ष्य को प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
