उज्जैन में शाश्वत ओली का भव्य आयोजन। आचार्य भगवंत विश्वरत्न सागर सुरिश्र्वरजी महाराजा साहेब की शुभ निश्रा और लाभार्थी परिवार के बहुमान की पूरी कवरेज पढ़ें।
शाश्वत ओली उज्जैन: आचार्य भगवंत की शुभ निश्रा से सजा ऐतिहासिक आयोजन, देखें तस्वीरें
उज्जैन। पवित्र नगरी उज्जैन में जैन धर्म का एक अद्भुत और ऐतिहासिक आयोजन चल रहा है। शाश्वत ओली उज्जैन के इस विशाल समागम में आचार्य भगवंत विश्वरत्न सागर सुरिश्र्वरजी महाराजा साहेब की शुभ निश्रा (धर्म-चर्चा एवं विश्राम) का संयोग मिल रहा है। यह आयोजन चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर, खारा कुआ, उज्जैन में धूमधाम से संपन्न हो रहा है।
लाभार्थी परिवार का भव्य सम्मान
इस भव्य शाश्वत ओली के आयोजन में लाभार्थी परिवार के रूप में श्रीमान शा. बाबुलालजी धनराजजी डोडिया गांधी मेहता परिवार (धुंबडीया, अहमदाबाद) की विशेष भूमिका रही। कार्यक्रम के दौरान इस परिवार का विशेष बहुमान (सम्मान) किया गया। यह सम्मान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) साउथ मुंबई सेल मीडिया सहसंयोजक के विक्रम सुराणा, प्रमोद कुमार और उनकी पूरी टीम द्वारा किया गया।के विक्रम सुराणा ने इस अवसर पर कहा, “आचार्य भगवंत विश्वरत्न सागर सुरिश्र्वरजी महाराजा साहेब की शुभ निश्रा और इस लाभार्थी परिवार के संयोग से उज्जैन में यह अद्भुत आयोजन संभव हो पाया है। उज्जैन जैसी पवित्र नगरी में शाश्वत ओली करवाना परमात्मा के बड़े आशीर्वाद से कम नहीं है।” प्रमोद कुमार ने भी परिवार की निस्वार्थ सेवा भावना की सराहना की।
राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े आराधक
शाश्वत ओली उज्जैन के इस आयोजन में देशभर से आराधक जुड़ रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, वर्तमान में 1900 से अधिक श्रद्धालु इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। दूर-दराज से आए भक्तों की उपस्थिति इस आयोजन की भव्यता को दर्शाती है। मंदिर परिसर पूरी तरह से आस्था के रंग में रंगा हुआ है, जहां सुबह से शाम तक जप, तप और प्रवचनों का दौर जारी है।
भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम
किसी भी धार्मिक आयोजन की शोभा बढ़ाने में कला और संगीत की अहम भूमिका होती है। इस शाश्वत ओली में सुप्रसिद्ध युवा संगीतकार तिलोक जी मोदी अपनी मधुर वाणी से भक्तों को झूमने पर मजबूर कर रहे हैं। उनके भजनों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया है। वहीं, प्रसिद्ध मंच संचालक तेजसिंह ने अपने सहज और प्रभावशाली वाणी से कार्यक्रम की रूपरेखा को चार चांद लगा दिए हैं। तिलोक जी मोदी के संगीत और तेजसिंह के संचालन की जोड़ी इस आयोजन को अविस्मरणीय बना रही है।
जानें क्या है नवपद ओली का महत्व
शाश्वत ओली यानी नवपद ओली का विशेष महत्व है। यह नौ दिनों का पर्व है, जिसमें नवपद (नौ पदों) की आराधना की जाती है। के विक्रम सुराणा ने इस अवसर पर जैन धर्म की इस अनूठी आराधना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह आराधना केवल एक धार्मिक क्रिया मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मा की शुद्धि और कर्मों के नाश का अद्भुत माध्यम है।
नवपद क्या हैं? ये वे नौ पद हैं, जिनकी आराधना ओली के दौरान की जाती है:
- अरिहंत पद (वीतरागी प्रभु)
- सिद्ध पद (मुक्त आत्माएं)
- आचार्य पद (धर्म संघ के प्रमुख)
- उपाध्याय पद (ज्ञान के प्रणेता)
- साधु पद (संयमी मुनि)
- दर्शन पद (सम्यक दर्शन)
- ज्ञान पद (सम्यक ज्ञान)
- चारित्र पद (सम्यक चारित्र)
- तप पद (सम्यक तप)
इन नौ पदों की साधना से मनुष्य के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
प्रेरणादायक कथा: राजा श्रीपाल और मैना सुंदरी
सुराणा ने ओली की आराधना के पीछे की अत्यंत प्रेरणादायक कथा सुनाकर सभी भक्तों को भावविभोर कर दिया। यह कहानी राजा श्रीपाल और मैना सुंदरी की है, जो जैन धर्म में कर्म सिद्धांत की गहरी समझ दिखाती है।
मैना सुंदरी का अटूट विश्वास
चंपापुरी के राजा सिंघारथ की दो पुत्रियाँ थीं—सुर सुंदरी और मैना सुंदरी। एक बार राजा ने उनसे पूछा कि वे किसके पुण्य से सुख भोग रही हैं। सुर सुंदरी ने राजा के पुण्य का गुणगान किया, लेकिन धर्मनिष्ठ मैना सुंदरी ने कहा कि वह अपने स्वयं के कर्मों के उदय से सुख भोग रही है।राजा को यह उत्तर बुरा लगा। क्रोधित होकर उन्होंने मैना सुंदरी का विवाह एक कुष्ठ रोगी (कोढ़ी) से कर दिया, ताकि वह देख सके कि उसके कर्म उसे कैसा सुख देते हैं। वह रोगी कोई और नहीं, बल्कि छिपे हुए राजा श्रीपाल थे, जो अपने 700 साथियों के साथ इस रोग से पीड़ित थे।
नवपद ओली की आराधना और चमत्कार
मैना सुंदरी तनिक भी विचलित नहीं हुई। उसने अपने पति की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। एक दिन वे आचार्य मुनिचंद्र सूरी के पास पहुंचे। मुनिराज ने उन्हें सिद्ध चक्र और नवपद की महिमा बताई। मैना सुंदरी ने अपने पति के साथ विधि-विधान से 9 दिनों तक नवपद ओली का तप किया।आराधना के प्रभाव से चमत्कार हुआ। सिद्ध चक्र के जल (गंदोदक) के छिड़काव से राजा श्रीपाल और उनके 700 साथी पूरी तरह रोगमुक्त हो गए। उनका शरीर सोने जैसा चमकदार हो गया। राजा श्रीपाल को अपना खोया हुआ राज्य वापस मिला और वे एक महान शासक बने।
शिक्षा
यह कथा सिखाती है कि सच्ची श्रद्धा और तप से असाध्य रोगों और कठिन परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त की जा सकती है। इसी प्रेरणा के साथ शाश्वत ओली उज्जैन का यह आयोजन अंतिम दिनों में प्रवेश कर चुका है। सभी आराधकों से अपील है कि वे इस पुण्य अवसर का लाभ उठाएं।



