ईरान संघर्ष में यूके के शामिल न होने की पुष्टि हुई है। पीएम कीर स्टार्मर ने साफ किया कि यह उनका युद्ध नहीं है और देश को आर्थिक प्रभावों से निपटने की चेतावनी दी है।
ईरान संघर्ष में यूके ने ट्रंप को दिया झटका! स्टार्मर ने साफ कहा- ‘ये हमारी लड़ाई नहीं’, जानें वजह
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान संघर्ष में यूके की भूमिका को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि उनका देश इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान संघर्ष के बीच ब्रिटेन ने एक अहम कूटनीतिक रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने बुधवार को साफ तौर पर कहा कि ईरान संघर्ष में यूके की कोई सैन्य भूमिका नहीं होगी। उन्होंने इसे ‘हमारी लड़ाई नहीं’ बताते हुए, अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी भी संभावित सैन्य अभियान से किनारा कर लिया।
‘ये हमारी लड़ाई नहीं’: स्टार्मर का ट्रंप को झटका
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अपने संबोधन में कहा कि हालांकि ईरान संघर्ष का असर ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था और भविष्य पर पड़ेगा, लेकिन यह उनका युद्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूके इस संघर्ष में शामिल नहीं होगा क्योंकि यह उनके राष्ट्रीय हित में नहीं है।
“यह तूफान भले ही कितना जबरदस्त क्यों न हो, हम इसका सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। लेकिन हमें यह स्पष्ट करना होगा कि यह हमारी लड़ाई नहीं है और हम इसमें शामिल नहीं होंगे।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सहयोगी देशों से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। ब्रिटेन का यह रुख अमेरिकी रणनीति के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
अर्थव्यवस्था पर चोट और होर्मुज स्ट्रेट का संकट
स्टार्मर ने ब्रिटेन में बढ़ती जीवन-यापन की लागत का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान संघर्ष से सबसे बड़ा खतरा आर्थिक स्थिरता को है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्य पूर्व में तनाव कम करना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना ब्रिटेन के हित में सबसे जरूरी कदम है।
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होर्मुज स्ट्रेट का महत्व: यह जलडमरूमध्य दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति का मार्ग है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण इस मार्ग पर व्यापार प्रभावित हो रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा की कीमतों में उछाल आया है।
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आर्थिक तैयारी: ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ईंधन और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के कारण आने वाले आर्थिक नतीजों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कूटनीतिक पहल में जुटा यूके
सैन्य हस्तक्षेप से इनकार करते हुए ब्रिटेन ने कूटनीतिक रास्ते तलाशने पर जोर दिया है। स्टार्मर ने बताया कि उनके मंत्री पहले से ही जी7 और खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ सक्रिय रूप से संवाद कर रहे हैं।
“विदेश सचिव और चांसलर जी7 में अपने समकक्षों से मिल चुके हैं। रक्षा सचिव मध्य पूर्व में हमारे साझेदारों से बातचीत कर रहे हैं। यूके ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए 35 देशों को एक साथ ला खड़ा किया है।”
इस पहल का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में नेविगेशन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है।
ऑस्ट्रेलिया ने भी जताई चिंता
ईरान संघर्ष को लेकर सिर्फ ब्रिटेन ही नहीं, बल्कि अन्य सहयोगी देश भी सतर्क हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भी राष्ट्र के नाम संबोधन में आने वाले समय को ‘आसान नहीं’ बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार इस युद्ध के आर्थिक दबावों को पूरी तरह खत्म होने का वादा नहीं कर सकती, लेकिन ऑस्ट्रेलिया अपने नागरिकों को सबसे बुरे प्रभाव से बचाने की पूरी कोशिश करेगा।
क्या है ईरान संघर्ष की वर्तमान स्थिति?
मध्य पूर्व में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ईरान संघर्ष में यूके जैसे बड़े सहयोगी का सैन्य हस्तक्षेप से इनकार करना, अमेरिका की रणनीति को कमजोर कर सकता है।
आगे क्या होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटेन का यह रुख अन्य यूरोपीय देशों के लिए भी एक मिसाल पेश कर सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अमेरिका इस स्थिति में अपनी अगली कूटनीतिक चाल क्या चलता है। फिलहाल, ब्रिटेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ईरान संघर्ष में सैन्य भागीदारी से दूर रहेगा और पूरी तरह से कूटनीति के जरिए समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगा।
