लार पंचकल्याणक महोत्सव जन्म कल्याणक के तीसरे दिन भव्य शोभायात्रा, अभिषेक, पालना झुलाने और धार्मिक प्रवचनों के साथ श्रद्धालुओं में दिखा अपार उत्साह।
लार पंचकल्याणक महोत्सव जन्म कल्याणक : तीसरे दिन धूमधाम से मनाया जन्म कल्याणक
लार पंचकल्याणक महोत्सव जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर बड़ागांव धसान के निकट स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर लार में तीसरे दिन का आयोजन अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। यह दिन तीर्थंकर भगवान के जन्म की दिव्यता और उत्सव का प्रतीक होता है, जिसे जैन समाज अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाता है।
जन्म कल्याणक का धार्मिक महत्व
जैन धर्म में पंचकल्याणक के पांच प्रमुख चरणों में से जन्म कल्याणक अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वह क्षण होता है जब तीर्थंकर का जन्म होता है और संपूर्ण जगत में शुभता का संचार होता है।
जन्म कल्याणक हमें यह संदेश देता है कि महान आत्माओं का जन्म केवल एक घटना नहीं बल्कि मानवता के उत्थान का प्रारंभ होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत और अभिषेक
सुबह की शुरुआत अत्यंत पवित्र वातावरण में हुई। प्रातः बेला में भगवान का अभिषेक पूजन किया गया। इसके साथ ही विश्व शांति और जगत कल्याण के लिए विशाल शांतिधारा आयोजित की गई।इस दौरान पूरा पांडाल भक्तिमय वातावरण से भर गया और श्रद्धालु भक्ति में लीन दिखाई दिए।
जन्म घोषणा और उत्सव का वातावरण
सुबह लगभग 7:30 बजे बालक आदिकुमार के जन्म की घोषणा होते ही पूरा पंडाल “जयकारों” से गूंज उठा। भगवान आदिनाथ के जन्मोत्सव ने पूरे वातावरण को उल्लास और ऊर्जा से भर दिया।वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि, भक्तों की आस्था और जयघोष ने इस क्षण को और भी दिव्य बना दिया।
भव्य शोभायात्रा का वर्णन
इस शोभायात्रा की प्रमुख विशेषताएं थीं:
- हाथी और घोड़ों की भव्य उपस्थिति
- बैंड बाजों की गूंज
- बजरंग अखाड़ा हटा की प्रस्तुति
- बुंदेली राबला पार्टी की लोकधुन
- डोल-नगाड़ों की ध्वनि
- पार्श्व म्यूजिकल ग्रुप का संगीतमय कार्यक्रम
इन सभी ने मिलकर वातावरण को आध्यात्मिक और उत्सवमय बना दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और मंचन
कार्यक्रम में भगवान की बाल लीलाओं का मंचन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। पालना झुलाने की परंपरा ने सभी को भगवान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर दिया।सौधर्म इंद्र द्वारा भगवान को ऐरावत हाथी पर बैठाकर सुमेरु पर्वत ले जाने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
धार्मिक प्रवचन का सार
धर्मसभा में संत-मुनिराजों ने अपने प्रवचन में बताया कि:
- महापुरुषों का गुण-स्मरण जीवन में शांति और आनंद लाता है
- पुण्य की वृद्धि होती है और पाप कर्म नष्ट होते हैं
- मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं
- आत्मा को शांति प्राप्त होती है
उन्होंने यह भी कहा कि हमें भगवान ऋषभदेव से लेकर भगवान महावीर तक सभी तीर्थंकरों के गुणों का स्मरण करना चाहिए।
पुण्य और पाप पर विचार
प्रवचन में यह स्पष्ट किया गया कि:
- शुभ कर्म करने वाले जीव स्वर्ग और मोक्ष प्राप्त करते हैं
- अशुभ कर्म करने वाले जीव दुखद योनियों में जन्म लेते हैं
- पुण्य क्षीण होने पर व्यक्ति अच्छे कार्य भी नहीं कर पाता
यह संदेश समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहा।
समाज की भागीदारी
इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों ने भाग लिया। सभी ने भक्ति, श्रद्धा और सेवा भावना के साथ कार्यक्रम को सफल बनाया।यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बन गया।
आगामी कार्यक्रम की जानकारी
महोत्सव समिति के मीडिया प्रभारी एडवोकेट प्रभात अजनोर ने जानकारी दी कि:
31 मार्च को भगवान का तप कल्याणक मनाया जाएगा
साथ ही पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण दिवस भी धूमधाम से आयोजित होगा
निष्कर्ष
लार पंचकल्याणक महोत्सव जन्म कल्याणक केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। इस महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज एकजुट होकर धर्म और आस्था के मार्ग पर चलता है, तो वह न केवल आध्यात्मिक उन्नति करता है बल्कि सामाजिक समरसता को भी मजबूत बनाता है।






