—Advertisement—

Shyopur: बाढ़ राहत राशि में अनियमितता, 22 पटवारियों के खिलाफ मामला

Author Picture
Published On: 30 March 2026
Shyopur

—Advertisement—

Shyopur बाढ़ राहत घोटाला: तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को जिला कोर्ट से नहीं मिली राहत

मध्यप्रदेश के Shyopur जिले में हुए बाढ़ राहत घोटाले में तत्कालीन बडौदा तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को जेल भेजा गया था, लेकिन जिला कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इंकार कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार, 31 मार्च को होगी। इस केस में लगभग 22 पटवारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

जांच में यह खुलासा हुआ कि श्योपुर पहुंची बाढ़ पीड़ितों के लिए दी जाने वाली राहत राशि में गड़बड़ी की गई थी। पटवारियों ने भी अपने परिजनों के खातों में राशि ट्रांसफर कर दी थी। फिलहाल अमिता सिंह तोमर शिवपुरी महिला जेल में बंद हैं।

कोर्ट ने तलब की केस डायरी

अगली सुनवाई से पहले जिला कोर्ट ने केस डायरी तलब की है। पुलिस ने केस तैयार करते समय तहसीलदार और सह आरोपी पटवारियों के बयान के साथ-साथ राहत राशि वितरण में अनियमितताओं के सबूत भी शामिल किए हैं।

केस डायरी में सभी ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और राहत राशि के आवंटन में हुई गड़बड़ियों का विवरण शामिल होगा। इससे कोर्ट को सभी तथ्य और प्रमाणों के आधार पर सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

87 लोगों के 127 खातों में ट्रांसफर

जांच में पता चला कि राहत राशि 87 लोगों के 127 खातों में ट्रांसफर की गई थी, जिनमें से कई लोग लिस्ट में शामिल ही नहीं थे

कुछ खातों का संबंध तहसील क्षेत्र के बाहर से था। कई खातों में एक से अधिक बार राशि डाली गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह गड़बड़ी सुनियोजित थी। उदाहरण के लिए, एक खाते में 22 बार ट्रांजेक्शन दर्ज किया गया, जबकि एक परिवार के चार सदस्यों के अलग-अलग खातों में भी राशि भेजी गई।

ये तथ्य दिखाते हैं कि राहत राशि के ग़ैरकानूनी उपयोग में एक व्यापक नेटवर्क शामिल था।

तहसीलदार का अधिकार और भूमिका

यह स्पष्ट किया गया है कि तहसीलदार अमिता सिंह तोमर, डीडीओ (ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) के रूप में, राहत राशि के अंतिम भुगतान का अधिकारी थी। पुलिस की जांच से पता चला कि उन्होंने कई गैर पात्र खातों में राशि ट्रांसफर करने की मंजूरी दी, जिससे यह घोटाला संभव हुआ।

यह मामला प्रशासनिक नियंत्रण और वित्तीय निगरानी के महत्व को उजागर करता है। प्राकृतिक आपदा के समय, जब पीड़ितों को तत्काल राहत की आवश्यकता होती है, ऐसे मामले जनता के विश्वास को कमजोर करते हैं।

पुलिस का बयान

कराहल एसडीओपी अवनीत शर्मा ने बताया:
“जांच में यह सामने आया है कि तहसीलदार ने कई गैर-पात्र खातों में राशि भेजी। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ मिला, जो लगभग 80 लाख रुपए के आसपास है। अभी मामले की जांच जारी है, इसलिए और अधिक विवरण नहीं दे सकते।”

इस बयान से स्पष्ट है कि यह घोटाला तहसीलदार और कुछ पटवारियों के बीच सहयोग से किया गया था। पुलिस इस बात की पुष्टि कर रही है कि कितने लोग और किन तरीकों से इस गड़बड़ी में शामिल थे।

घोटाले के प्रभाव

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाले ने सरकारी राहत कार्यक्रमों में सार्वजनिक विश्वास को कमजोर कर दिया है। जिन लोगों को प्राकृतिक आपदा के दौरान मदद की सबसे अधिक आवश्यकता थी, उन्हें राहत नहीं मिली।

घोटाले के परिणामस्वरूप आरोपी को कानूनी और वित्तीय दंड का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें जेल और अवैध धन की वसूली शामिल है। यह मामला राज्य सरकार और प्रशासन के लिए सख्त निगरानी और पारदर्शिता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

पटवारियों की भूमि का

अमिता सिंह तोमर के साथ-साथ 22 पटवारियों को आरोपी बनाया गया है। उनके खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने राहत राशि अपने परिवार के खातों में ट्रांसफर की और कई गैर पात्र खातों में पैसे डाले।

पटवारी गांव स्तर पर सरकारी योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस केस से पता चलता है कि यदि यह अधिकार गलत हाथों में जाए, तो राहत राशि का दुरुपयोग हो सकता है।

अगली सुनवाई

जिला कोर्ट में अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी। इस दौरान तहसीलदार की जमानत याचिका और अन्य प्रक्रिया संबंधी मामलों पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केस डायरी और सबूतों की समीक्षा के बाद ही किसी प्रकार का राहत निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल अमिता सिंह तोमर शिवपुरी जेल में बंद हैं।

राहत राशि वितरण में व्यापक गड़बड़ी

यह मामला सरकारी राहत कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के व्यापक दृष्टिकोण को उजागर करता है। जांच से यह भी पता चला है कि, जब कई मध्यस्थ शामिल होते हैं, तब राहत राशि के भ्रष्टाचार और दुरुपयोग के अवसर बढ़ जाते हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल ट्रैकिंग, नियमित ऑडिट और सख्त नियंत्रण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि राहत राशि सही लोगों तक पहुंचे।

जनता की प्रतिक्रिया

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाले की खबर ने जनता में आक्रोश और चिंता पैदा कर दी है। पीड़ित लोग, जिन्हें पहले ही प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ा था, अब सरकारी घोटाले के कारण और अधिक नुकसान उठाने को मजबूर हैं।

स्थानीय एक्टिविस्ट और एनजीओ ने सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है और भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए उपाय करने की अपील की है।

निष्कर्ष

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला प्रशासनिक और वित्तीय प्रणाली में कमजोरियों का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उच्च पदस्थ अधिकारी की संलिप्तता से यह मामला और गंभीर हो गया है।

जैसे ही मामला कोर्ट में आगे बढ़ेगा, यह देखने की बात होगी कि न्यायपालिका कैसे भ्रष्टाचार के आरोपों को निपटाती है, जनता का विश्वास कैसे बहाल होता है और राहत राशि सही लाभार्थियों तक कैसे पहुंचती है।

31 मार्च की सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। इसका परिणाम मध्यप्रदेश में राहत वितरण की नीतियों और प्रक्रिया पर प्रभाव डाल सकता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp