Indore में शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: फर्जी डिग्री वाले 74 शिक्षकों पर लोकायुक्त की सख्ती, 24 का रोका वेतन
Indore जिले के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर नियुक्त कई संविदा शिक्षकों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लोकायुक्त द्वारा तलब किए गए 74 संदिग्ध शिक्षकों का पूरा रिकॉर्ड अब जांच के दायरे में है। इस कार्रवाई के तहत 24 शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है, जबकि 26 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
संदिग्ध शिक्षक और फर्जी दस्तावेज़
जांच में यह सामने आया कि अधिकांश शिक्षकों ने संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा 2006-07 में फर्जी डीएड और बीएड की अंकसूचियां लगाकर नौकरी हासिल की थी। यह नियुक्तियां सांवेर जनपद पंचायत के माध्यम से की गई थीं। इनमें अधिकांश शिक्षक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में पदस्थ हैं, जबकि कुछ शिक्षक अकादमिक कार्यों से जुड़े हुए हैं।
लोकायुक्त ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से इन 74 शिक्षकों को संदिग्ध माना और उनकी पहली नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज़ मांगे। इनमें नियुक्ति आदेश, डीएड और बीएड की अंकसूचियां, सेवा पुस्तिका, नियुक्ति संबंधी प्रविष्टियां, संविलियन आदेश और वर्तमान पदस्थापना संस्था की जानकारी शामिल थी।
कारण बताओ नोटिस और वेतन रोक
शिक्षा विभाग ने प्रथम चरण में 26 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस 27 फरवरी 2026 को जारी किया। इनमें से अब तक केवल दो शिक्षकों ने अपना स्पष्टीकरण दिया। शेष 24 शिक्षकों ने जवाब नहीं दिया, इसलिए उनका वेतन रोक दिया गया है। विभाग ने साफ कहा कि जिन शिक्षकों ने जवाब दिया है, उनके स्पष्टीकरण से भी संतुष्टि नहीं हुई है। आगे की कार्रवाई उनकी जवाबी प्रतिक्रिया और जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी।
पूर्व में शिकायत और जांच प्रक्रिया
इस मामले की शुरूआत वर्ष 2021 में हुई, जब सांवेर विकासखंड के सरकारी स्कूलों में फर्जी डिग्री के आधार पर संविदा शिक्षक बनने वाले शिक्षकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान शिक्षकों की अंकसूचियों का सत्यापन माध्यमिक शिक्षा मंडल से करवाने की अनुशंसा की गई। जून 2022 से अप्रैल 2023 के बीच, माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 45 शिक्षकों की अंकसूचियों का मिलान किया और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को जानकारी भेजी। इस जांच में कई शिक्षकों की अंकसूचियां फर्जी पाई गईं, जिससे मामले की गंभीरता उजागर हुई।
जांच समिति की रिपोर्ट
इस मामले में चार प्राचार्यों की एक समिति गठित की गई, जिसने मई 2024 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि संविदा शिक्षक परीक्षा में प्रस्तुत अंकसूचियां माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा जारी नहीं की गई थीं। कई मामलों में एक ही रोल नंबर पर अन्य परीक्षार्थियों की अंकसूचियां मिलीं, जिससे दस्तावेज़ पूरी तरह फर्जी और संदेहास्पद साबित हुए।
एफआईआर के निर्देश और लंबित कार्रवाई
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सितंबर 2024 में जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित संकुलों के प्राचार्यों को निर्देश दिए कि वे संदिग्ध शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। इसमें उत्कृष्ट उमावि सांवेर, कन्या उमावि सांवेर, उमावि चन्द्रावतीगंज, उमावि डकाच्या, उमावि मांगल्या, उमावि धरमपुरी और उमावि अजनोद संकुल शामिल थे।
हालांकि, एक वर्ष बीत जाने के बावजूद किसी भी संकुल ने एफआईआर दर्ज नहीं कराई। इस देरी के चलते लोकायुक्त ने शिक्षकों के वेतन रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसे कड़े कदम उठाए।
शिक्षा विभाग की सख्ती का उद्देश्य
Indore शिक्षा विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है: फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर संविदा शिक्षक बनने वालों को नौकरी से हटाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकना। विभाग ने कहा कि सभी दस्तावेजों का मिलान और सत्यापन अनिवार्य होगा और किसी भी फर्जी शिक्षक को संविदा शिक्षक पद पर नहीं रहने दिया जाएगा।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि वेतन रोकने के बाद शिक्षकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम शिक्षा विभाग की नीतियों और लोकायुक्त के आदेशों के अनुरूप उठाया गया है।
भविष्य की कार्रवाई और निगरानी
लोकायुक्त और शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि इस मामले में सभी 74 संदिग्ध शिक्षकों की पूरी जांच की जाएगी। जिन शिक्षकों ने जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की संभावना है। इसके अलावा विभाग ने यह आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी संविदा शिक्षक नियुक्तियों में शैक्षणिक दस्तावेज़ों की कड़ी जांच की जाएगी।
इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि सरकारी स्कूलों में फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर नियुक्तियों की कोई गुंजाइश नहीं है। शिक्षा विभाग और लोकायुक्त मिलकर सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षकों की नियुक्तियों में पारदर्शिता और सटीकता बनी रहे।
निष्कर्ष
Indore जिले में शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई यह स्पष्ट करती है कि फर्जी डिग्री के आधार पर संविदा शिक्षक बनने वालों के लिए अब कोई छूट नहीं है। लोकायुक्त और शिक्षा विभाग के सहयोग से अब ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। यह कदम न केवल वर्तमान शिक्षकों के लिए चेतावनी है, बल्कि भविष्य में सरकारी स्कूलों में नियुक्तियों में ईमानदारी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी अहम माना जा रहा है।
