MP : भाजपा में एल्डरमैन नियुक्तियों को लेकर संशय, जिलाध्यक्षों से नामों का पैनल मांगा गया
MP में भाजपा में एल्डरमैन नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी हाईकमान ने प्रदेश के सभी 62 जिलाध्यक्षों से दोबारा 3-3 दावेदारों के नामों का पैनल मांगा है। हालांकि नियुक्तियों में देरी के कारण संभावित एल्डरमैन अब केवल 8 महीने का ही कार्यकाल पाएंगे। इस वजह से दावेदारों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और कई उम्मीदवार यह सोच रहे हैं कि क्या उन्हें यह पद लेना चाहिए या नहीं।
एल्डरमैन बनने पर दावेदारों की चिंता
भाजपा में संभावित एल्डरमैन को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि वे यह पद ग्रहण करते हैं, तो आगामी नगरीय निकाय चुनाव में पार्षद का टिकट मिलने में बाधा आ सकती है। यही कारण है कि कई दावेदार इस फैसले को लेकर पसोपेश में हैं। पार्टी हाईकमान ने इस बार नामों की स्क्रूटनी अगले सप्ताह करने का निर्णय लिया है, ताकि अंतिम पैनल का चयन उचित तरीके से किया जा सके।
बड़े शहरों में एल्डरमैन की संख्या
MP के प्रमुख नगर निगमों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में आबादी के आधार पर 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा अन्य एक दर्जन नगर निगमों में 8-8 एल्डरमैन बनाए जाने का प्रावधान है। नगर पालिकाओं में 6 और नगर परिषदों में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे।
इस तरह की व्यवस्था से पार्टी का उद्देश्य न केवल संगठन में संतुलन बनाए रखना है बल्कि असंतोष को भी कम करना है। वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों को जिलों का प्रभार देकर आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रभारी मंत्रियों की मौजूदगी में कोर ग्रुप बैठकों के जरिए लंबित मामलों को सुलझाया जा रहा है।
संगठन में संतुलन और असंतोष को कम करने की कोशिश
BJP पार्टी नेतृत्व इस प्रक्रिया के माध्यम से संगठन में संतुलन बनाए रखना चाहता है। इसके लिए वरिष्ठ नेताओं और पूर्व विधायकों को जिलों का प्रभार दिया गया है ताकि वे स्थानीय स्तर पर आम सहमति और समझौते के जरिए नामों का चयन कर सकें। कोर ग्रुप की बैठकों में लंबित मामलों और विवादों को सुलझाया जा रहा है।
जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे जल्द ही अपने जिलों के तीन-तीन नामों का पैनल भेज दें, ताकि हाईकमान अंतिम निर्णय ले सके। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 29 मार्च को कोर ग्रुप की बैठक में एल्डरमैन की नियुक्तियों की घोषणा की संभावना है।
कार्यक्षाल चुनाव तक सीमित
BJP सूत्रों का कहना है कि जून-जुलाई 2027 में नगरीय निकाय चुनाव संभावित हैं। ऐसे में एल्डरमैन का कार्यकाल चुनाव तक ही सीमित रहेगा। यह स्थिति दावेदारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि वे एल्डरमैन बनते ही केवल कुछ महीनों तक ही पद की जिम्मेदारी निभा पाएंगे।
हालांकि, पार्टी का तर्क है कि यह कार्यकाल संगठन में संतुलन बनाए रखने और नए नेतृत्व को अनुभव देने के लिहाज से पर्याप्त होगा। इससे पार्टी के भीतर असंतोष भी कम होगा और सभी वरिष्ठ और युवा नेताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।
जिलाध्यक्षों और हाईकमान की भूमिका
जिलाध्यक्षों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने जिलों में संभावित दावेदारों की पहचान करें और तीन-तीन नामों का पैनल भेजें। इसके बाद पार्टी हाईकमान इन नामों की स्क्रूटनी करेगा और अंतिम निर्णय लेगा।
कोर ग्रुप की बैठकों में यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी दावेदार या जिले में असंतोष न पैदा हो। वरिष्ठ नेता और प्रभारी मंत्री बैठक में मौजूद रहते हैं, ताकि किसी भी विवाद को समय रहते हल किया जा सके।
BJP की रणनीति और उद्देश्य
BJP का उद्देश्य है कि संगठन में संतुलन बना रहे और किसी भी स्तर पर असंतोष न हो। इसके लिए नियुक्तियों में पारदर्शिता और आम सहमति पर जोर दिया जा रहा है।
एल्डरमैन नियुक्तियों की यह प्रक्रिया पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। इससे न केवल स्थानीय नेतृत्व को अनुभव मिलेगा बल्कि आगामी नगरीय निकाय चुनाव में भी पार्टी को मजबूत स्थिति बनाने में मदद मिलेगी।
सम्भावित चुनौतियां
हालांकि, इस बार नियुक्तियों में देरी के कारण संभावित एल्डरमैन का कार्यकाल सीमित है। इस वजह से कई उम्मीदवार यह सोच रहे हैं कि क्या वे यह पद ग्रहण करें या नहीं। इसके अलावा, चुनावी टिकट की संभावना पर भी एल्डरमैन बनने से असर पड़ सकता है, जो दावेदारों के लिए चिंता का विषय है।
BJP हाईकमान का मानना है कि यह कार्यकाल उम्मीदवारों के लिए अनुभव का अवसर है और पार्टी संगठन में संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
निष्कर्ष
MP भाजपा में एल्डरमैन नियुक्तियों को लेकर हलचल और असमंजस बढ़ा हुआ है। जिलाध्यक्षों से तीन-तीन नामों का पैनल मांगा गया है और हाईकमान अगले सप्ताह इन नामों की स्क्रूटनी करेगा। बड़े शहरों में 12-12 और छोटे नगर निगमों व नगर पालिकाओं में 4-8 एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य संगठन में संतुलन बनाए रखना और असंतोष को कम करना है। चुनाव से पहले एल्डरमैन का सीमित कार्यकाल दावेदारों के लिए चिंता का विषय है। 29 मार्च को होने वाली कोर ग्रुप बैठक के बाद नियुक्तियों की घोषणा संभव है।
BJP का यह कदम संगठन में पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
