घर में वास्तु शास्त्र के अनुसार तस्वीरें लगाने की सही दिशा का पालन करें। पूर्वजों, भगवान और परिवार की फोटो लगाने के नियम जानें और नकारात्मक ऊर्जा से बचें।
Vastu Tips: दीवारों पर गलत दिशा में लगी तस्वीरें बन सकती हैं बर्बादी का कारण, आज ही सुधारें ये 5 गलतियां
एक खूबसूरत तस्वीर किसी भी सुनसान कमरे की रौनक बढ़ा सकती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपके घर की दीवारों पर लगी ये तस्वीरें आपकी किस्मत भी बदल सकती हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार, तस्वीरें सिर्फ सजावट का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि एक शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत हैं। अगर इन्हें गलत दिशा में लगाया जाए, तो ये घर की शांति, सुख-समृद्धि और आपसी रिश्तों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
वास्तु शास्त्र एक सदियों पुराना विज्ञान है, जो हमें बताता है कि हमारे आस-पास की दिशाएं और चीजें हमारे जीवन पर कैसा असर डालती हैं। इस लेख में हम आपको वास्तु शास्त्र के अनुसार तस्वीरें लगाने की सही दिशा और उन 5 सामान्य गलतियों के बारे में बताएंगे, जिन्हें आज ही सुधारना जरूरी है।
1. पूर्वजों की तस्वीरें: सही दिशा क्या है?
हम अपने बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद के लिए उनकी तस्वीरें घर में लगाते हैं, जो कि एक बहुत अच्छी परंपरा है। लेकिन, अक्सर लोग अनजाने में इन तस्वीरों को मंदिर (पूजा घर) में देवी-देवताओं के साथ रख देते हैं, जो वास्तु शास्त्र के अनुसार सबसे बड़ी गलती है। पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए इन तस्वीरों का स्थान अलग होना चाहिए।
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सही दिशा: पूर्वजों की फोटो हमेशा ‘दक्षिण‘ दिशा की दीवार पर ही लगानी चाहिए। दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु के देवता) की दिशा माना गया है, इसलिए यह पूर्वजों के लिए सबसे उपयुक्त है।
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नियम: इन तस्वीरों को पश्चिम या उत्तर दिशा में लगाने से बचें। साथ ही, सुनिश्चित करें कि ये तस्वीरें कभी भी भगवान की मूर्ति या तस्वीर के साथ एक ही स्थान पर न हों।
2. भगवान की तस्वीरें: ईशान कोण का महत्व
घर में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) लाने के लिए देवी-देवताओं की तस्वीरें लगाना अत्यंत शुभ होता है। यह स्थान घर का सबसे पवित्र हिस्सा होता है, जहां से सकारात्मकता का संचार पूरे घर में होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार तस्वीरें लगाने की सही दिशा में भगवान की फोटो का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है।
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सही दिशा: देवी-देवताओं की तस्वीरों के लिए ‘उत्तर-पूर्व‘ (ईशान कोण) दिशा सबसे शुभ मानी जाती है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार भी उपयुक्त है।
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नियम: भगवान की तस्वीरें हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके लगानी चाहिए। ध्यान रखें कि ये तस्वीरें शयनकक्ष में न हों, खासकर बिस्तर के सामने।
3. पानी और झरने की फोटो: उत्तर या पूर्व?
अक्सर लोग अपने ड्रॉइंग रूम या ऑफिस में झरने, समुद्र या नदी की खूबसूरत पेंटिंग लगाते हैं। पानी का तत्व वास्तु में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह धन, करियर और अवसरों का प्रतीक है। लेकिन अगर इनका स्थान गलत हो, तो यह धन की हानि का कारण भी बन सकता है।
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सही दिशा: पानी से जुड़ी तस्वीरें हमेशा ‘उत्तर‘ या ‘पूर्व‘ दिशा में ही होनी चाहिए। ये दिशाएं क्रमशः कुबेर (धन के देवता) और सूर्य (जीवन शक्ति) से जुड़ी हैं।
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जरूरी नियम: तस्वीर में पानी का बहाव घर के अंदर की तरफ होना चाहिए, बाहर की तरफ नहीं। अगर झरने की फोटो दक्षिण दिशा में लगा दी गई, तो इससे अनावश्यक खर्चे बढ़ते हैं और करियर में रुकावट आती है।
4. पारिवारिक तस्वीरें: रिश्तों की मजबूती का राज
परिवार के सदस्यों के बीच प्यार, सौहार्द्र और एकता बनाए रखने के लिए फैमिली ग्रुप फोटो (Family Group Photo) का सही स्थान बहुत आवश्यक है। एक हंसती-मुस्कुराती पारिवारिक तस्वीर घर में सकारात्मकता और एकता का संचार करती है।
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सही दिशा: फैमिली फोटो को ‘दक्षिण-पश्चिम‘ (नैऋत्य कोण) दिशा में लगाना सबसे बेहतरीन है। यह दिशा स्थिरता और मजबूती का प्रतीक है, जो रिश्तों को मजबूत बनाती है।
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नियम: इसे भूलकर भी उत्तर या पूर्व दिशा में न लगाएं। ऐसा करने से घर वालों के बीच दूरियां, मनमुटाव और छोटी-छोटी बातों पर झगड़े बढ़ सकते हैं।
5. वर्जित तस्वीरें: इन्हें भूलकर भी न लगाएं
वास्तु शास्त्र में कुछ ऐसी तस्वीरों और चित्रों को घर में लगाने से सख्त मना किया गया है, क्योंकि ये नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का सृजन करती हैं। ये चित्र अवचेतन मन पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं और घर में अशांति, भय और निराशा का माहौल पैदा करते हैं।
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खूंखार जानवर: शेर, चीता, भेड़िया या सांप जैसे हिंसक जानवरों की तस्वीरें न लगाएं। ये आक्रामकता और तनाव बढ़ाते हैं।
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हिंसा और युद्ध: महाभारत या किसी युद्ध के दृश्य वाली पेंटिंग घर में कलह और मानसिक अशांति का कारण बनती हैं।
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नकारात्मक भावनाएं: रोते हुए बच्चे, डूबती हुई नाव, अकेला पेड़ या उदास दृश्य वाली तस्वीरें घर में निराशा और अवसाद को बढ़ावा देती हैं।
ये सभी नियम प्राचीन हिंदू ग्रंथों जैसे ‘विश्वकर्मा प्रकाश‘ और ‘समरांगण सूत्रधार‘ में विस्तार से वर्णित हैं। वास्तु शास्त्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा, दिशाओं और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का एक वैज्ञानिक तरीका है। इन सरल नियमों को अपनाकर आप अपने घर में सकारात्मकता और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।
