इंदौर विधायक अधिकारियों से नाराज हैं। विधायक निधि के काम अटके, MOS टैक्स विवाद और अधिकारियों के अड़ियल रवैये से तंग आकर सभी विधायक 29 मार्च को CM मोहन यादव से सीधी बात करेंगे |
अब बर्दाश्त नहीं! इंदौर विधायक अधिकारियों से नाराज, CM से करेंगे सीधी शिकायत
मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सत्ताधारी भाजपा के विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच गतिरोध गहराता जा रहा है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज विधायकों ने अब सीधे मुख्यमंत्री का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
इंदौर। मध्य प्रदेश की साफ-सुथरी और स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान रखने वाली इंदौर शहर इन दिनों राजनीतिक और प्रशासनिक अंदरूनी कलह की सुर्खियां बटोर रहा है। इंदौर विधायक अधिकारियों से नाराज हैं और इस नाराजगी ने अब खुले विद्रोह का रूप ले लिया है। शहर के सभी भाजपा विधायकों, सांसद और महापौर ने एकजुट होकर जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए हैं। मामला इतना गंभीर हो गया है कि अब ये सभी जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे मिलकर अपनी बात रखेंगे।
कोर कमेटी की बैठक में फूटा गुस्सा
गुरुवार शाम (26 मार्च) को इंदौर भाजपा कार्यालय में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। बैठक में सांसद शंकर लालवानी, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा समेत विधायक महेंद्र हार्डिया, मधु वर्मा और गोलू शुक्ला मौजूद थे।बैठक में सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी कर रहे हैं। विकास कार्यों में आ रही बाधाओं और अधिकारियों के अड़ियल रवैये पर गहरी नाराजगी जताई गई। यह पहला मौका नहीं है जब इंदौर के विधायकों ने प्रशासन पर निशाना साधा है, लेकिन इस बार सभी का एक साथ मोर्चा खोलना चर्चा का विषय है।
विधायकों के गंभीर आरोप: ‘निधि के काम तक अटके’
बैठक के दौरान विधायकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कई गंभीर उदाहरण दिए। उनका कहना है कि अधिकारियों के रवैये से जनता के बीच सरकार की छवि खराब हो रही है।
- महेंद्र हार्डिया: उन्होंने दो टूक कहा, “अधिकारी बिल्कुल नहीं सुन रहे हैं। यहाँ तक कि विधायक निधि से स्वीकृत जनहित के काम भी फाइलों में दबे हुए हैं। यह बहुत गंभीर मामला है।”
- मधु वर्मा: उन्होंने विकास कार्यों के प्रभावित होने पर चिंता जताई। वर्मा ने कहा, “नगर निगम के अधिकारी चालानी कार्रवाई जैसे छोटे मामलों में भी जनप्रतिनिधियों के सुझावों को अनसुना कर रहे हैं। जनता हमसे सवाल कर रही है कि आखिर हमारी बात क्यों नहीं सुनी जा रही?”
- गोलू शुक्ला: विधायक शुक्ला ने भी कहा कि प्रशासन में उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
- सुमित मिश्रा (नगराध्यक्ष): उन्होंने मुख्यमंत्री के आगामी कार्यक्रम के नियोजन पर सवाल उठाए। मिश्रा का आरोप है कि अधिकारियों ने 29 मार्च के कार्यक्रम का स्थान (दशहरा मैदान) और रूपरेखा खुद तय कर ली, जिसमें संगठन या जनप्रतिनिधियों से कोई चर्चा नहीं की गई।
MOS टैक्स पर भी तकरार, महापौर ने भी किया समर्थन
बैठक में ‘मार्जिनल ओपन स्पेस’ (MOS) पर लगने वाले टैक्स का मुद्दा भी गरमाया। सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से कहा कि इस टैक्स से जनता में भारी नाराजगी है। यह टैक्स उन जगहों पर लगाया जाता है जो खुली जगह (हवा और रोशनी के लिए) होती हैं, और विधायकों का कहना है कि इससे आम नागरिक परेशान हैं।महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी विधायकों का समर्थन करते हुए कहा, “यह नियम 2020 का है, लेकिन मैं स्वयं इसके पक्ष में नहीं हूं क्योंकि यह स्थान हवा और रोशनी के लिए होता है।” उन्होंने इस मामले में शासन स्तर पर पुनर्विचार का आग्रह करने की बात कही।
29 मार्च को सीएम के सामने खुलेगा ‘कच्चा चिट्ठा’
इंदौर विधायक अधिकारियों से नाराज हैं और अब इस नाराजगी को वे सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 मार्च को इंदौर प्रवास पर आ रहे हैं। इस दौरान वे नगर निगम के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।
विधायकों ने तय किया है कि वे इसी दौरान मुख्यमंत्री को अधिकारियों के व्यवहार और शहर की जमीनी हकीकत से अवगत कराएंगे। यह एक तरह से प्रशासन के खिलाफ मोर्चा है, जहां जनप्रतिनिधि अपनी बात सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने की रणनीति बना रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस दौरान अधिकारियों पर कितनी फटकार पड़ती है।
प्रशासनिक सर्जरी के संकेत?
गौरतलब है कि हाल ही में सीधी कलेक्टर को जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद हटाया गया था। मध्यप्रदेश में जल्द ही आईएएस अधिकारियों की बड़ी तबादला सूची संभावित है। ऐसे में इंदौर के विधायकों की यह एकजुटता शहर के प्रशासनिक गलियारों में बड़े बदलाव के संकेत दे रही है।मुख्यमंत्री पहले भी कई मंचों से कह चुके हैं कि अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। ऐसे में अब सबकी नजरें 29 मार्च की इस मुलाकात पर टिकी हैं। क्या इंदौर में भी प्रशासनिक फेरबदल होगा? या फिर मुख्यमंत्री विधायकों को समझा-बुझाकर शांत कर देंगे? फिलहाल, शहर के विकास कार्यों की गति और प्रशासन-जनप्रतिनिधि के रिश्तों पर यह बैठक अहम साबित होने वाली है।


