Indore गोम्मटगिरी पर भगवान बाहुबली का आयोजित होगा भव्य महामस्तकाभिषेक; श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का पूर्ण प्रबंध
Indore । दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र गोम्मटगिरी पर प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धा, भक्ति और अध्यात्म की अद्भुत परंपरा के रूप में प्रतिष्ठित भगवान बाहुबली की ऊँचितम प्रतिमा का भव्य और मंगलमय महामस्तकाभिषेक आयोजन किया जा रहा है। यह दिव्य एवं शुभ अवसर रविवार, 22 मार्च 2026 को आयोजित होगा, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु, साधु‑संन्यासी, धर्मप्रेमी एवं समाजजन सम्मिलित होने की संभावना है।
इस वर्ष के महामस्तकाभिषेक समारोह का आयोजन श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन प्रेरणा से किया जा रहा है। कार्यक्रम में श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी, मुनि श्री अप्रमित सागर जी और मुनि श्री सहज सागर जी तथा क्षुल्लक श्री श्रेयस सागर जी की गरिमामयी सानिध्य की उपस्थिति रहेगी। इनके साथ‑साथ प्रतिष्ठा चार्य पीयूष भैया आयोजन की रूपरेखा, व्यवस्थापना और संचालन का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस वर्ष का महामस्तकाभिषेक उन तमाम विधियों, परंपराओं और धार्मिक अनुशासनों का समुचित पालन करते हुए অত্যंत शिस्तबद्ध, सुरक्षित तथा सुंदर ढंग से संपन्न कराया जाएगा। दिगंबर जैन परंपरा के अनुसार महामस्तकाभिषेक केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, तत्त्वज्ञान और सनातन धर्म की गूढ़ता का प्रतिक भी है।
समारोह का कार्यक्रम समय, स्थान और प्रवचन
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस आयोजन का शुभारंभ संध्या 4:00 बजे मुनि श्री के मंगल प्रवचन से होगा। यह प्रवचन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, जिसमें मुनि श्री जीवन, धर्म, संयम, ध्यान और सार्वभौमिक मानव‑मूल्यों पर अपने विचारों और उपदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर प्रेरित करेंगे। मुनि श्री का प्रवचन लाखों श्रद्धालुओं के लिये आदर्श, मार्गदर्शक और जीवन की गूढ़ सत्यताओं को सरल एवं स्पष्ट रूप से समझाने वाला होगा।
प्रवचन के पश्चात संध्या 5:00 बजे भगवान बाहुबली का महामस्तकाभिषेक सम्पन्न होगा। महामस्तकाभिषेक एक अत्यंत पावन अनुष्ठान है, जिसमें भगवान बाहुबली की अद्वितीय प्रतिमा का सिरोवर्षा, आरती, फूलों तथा कलशों से अभिषेक करवाया जाएगा। इसके साथ‑साथ मंत्रोच्चारण, स्वरलहरी तथा धार्मिक संगीत की ध्वनियाँ पूरे स्थल को एक दिव्य, आध्यात्मिक एवं दिव्य अनुभूति से भर देंगी।
धार्मिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व
Indore गोम्मटगिरी की प्रतिमा अपने आप में अद्वितीय है। भगवान बाहुबली की यह प्रतिमा केवल धार्मिक श्रद्धा का केन्द्र ही नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, तपस्या, आत्मसंयम और त्याग का प्रतीक भी मानी जाती है। इहां आयोजित महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम में भाग लेने के लिये देश‑विदेश से हजारों श्रद्धालु, जैन समुदाय के अनुयायी तथा धर्मप्रेमी आते हैं। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता, शांति, सद्भाव और मानवता के मूल्यों की पुनः पुष्टि का अवसर भी प्रदान करता है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी में संयम, अध्यात्म, नैतिकता तथा सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और जागरूकता लाने का भी प्रयास किया जाता है। भगवान बाहुबली के जीवन एवं उनके कठिन तप का स्मरण करवाते हुए श्रद्धालुओं को जीवन के लक्ष्य की ओर प्रेरित किया जाता है।
व्यवस्था और सुरक्षा — श्रद्धालुओं के लिये सुव्यवस्था
Indore कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये विशेष प्रबंध किये गये हैं। आयोजन समिति द्वारा पर्याप्त संख्या में जल, बैठने की व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा, शारीरिक दूरी का पालन, मार्गदर्शक संकेत और भीड़ नियंत्रण की संपूर्ण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गयी हैं। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं को कार्यक्रम स्थल तक सुगम पहुंच के लिये मार्गदर्शन, सहायता तथा आवश्यक दिशा‑निर्देश प्रदान किये जायेंगे।
प्रमुख आयोजन समिति के सदस्यों में भगवान बाहुबली दिगंबर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री भरत मोदी एवं ट्रस्टी श्री सौरभ पाटौदी, श्री संदीप मोरया, श्री नकुल पाटोदी और श्री पिंकेश टोंग्या आदि शामिल हैं। इन सभी ने श्रद्धालुओं से विशेष अनुरोध किया है कि वे अपनी सुविधा अनुसार पर्याप्त समय निकाल कर आयोजन स्थल पर पहुँचें, अनुशासित रहें और शांतिपूर्वक कार्यक्रम में भाग लें।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पावन अवसर पर अधिक‑से‑अधिक संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम में भाग लें, ताकि भगवान बाहुबली के इस महान पर्व की महिमा, विशालता और सामूहिक ऊर्जा का अनुभव सभी में हो। उन्होंने आग्रह किया कि हर व्यक्ति अपने साथ परिवार, मित्र और समाजजनों को भी इस दिव्य अवसर के लिये प्रेरित करे, ताकि न केवल धार्मिक अनुभव मज़बूत हो बल्कि सामाजिक भाईचारे की भावना भी सुदृढ़ बनी रहे।
श्रद्धालुओं की अपेक्षाएँ और भाव‑व्यंजना
श्रद्धालु पहले से ही उत्साह, भक्ति भाव और श्रद्धा के साथ इस महामहोत्सव के आयोजन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु तो अपने पवित्र कपड़ों, फूलों, दीपों और दान सामग्री के साथ समयपूर्वक कार्यक्रम में शामिल होने के लिये अग्रिम रूप से योजना बना रहे हैं। कार्यक्रम से पूर्व तथा पश्चात् भोजन, भंडारा, भजन‑कीर्तन, दान‑धर्म एवं सेवा‑कार्य जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की जा सकती हैं, जिससे सर्वसाधारण एवं श्रद्धालु दोनों को अध्यात्म और सेवा का अनुभव समांतर रूप से प्राप्त हो।
भगवान बाहुबली की प्रतिमा पर होने वाला महामस्तकाभिषेक न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह मानव जीवन को संयम, त्याग, सत्य, निःस्वार्थता तथा उत्कृष्ट मानव‑मूल्यों की ओर अग्रसर करने का एक प्रेरणादायक अवसर भी है।
