MP में ई-बाइक और ई-कार महंगी होंगी, 27 मार्च को खत्म हो रही है टैक्स और रजिस्ट्रेशन छूट
भोपाल। MP में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की खरीद पर मिलने वाली वित्तीय राहत और प्रोत्साहन अब जल्द ही समाप्त होने वाला है। राज्य में पांच साल के लिए लागू की गई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2025 (EV Policy 2025) के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट एक वर्ष के लिए प्रदान की गई थी। यह छूट 27 मार्च 2026 को समाप्त हो रही है। इस फैसले के बाद ई-बाइक और ई-कारों की खरीद महंगी हो जाएगी और आम उपभोक्ताओं को अपने बजट में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा।
ईवी नीति-2025 का उद्देश्य और फायदे
MP सरकार ने वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए पांच साल की ईवी नीति लागू की थी। इस नीति का मुख्य उद्देश्य था प्रदूषण घटाना, पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करना और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना। नीति के तहत वाहन खरीदारों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय राहत और छूट दी गई थी।
- निजी वाहनों पर लागू 100 प्रतिशत टैक्स और पंजीयन शुल्क छूट।
- रेट्रोफिटिंग, यानी पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदलने पर प्रोत्साहन राशि।
- कमर्शियल वाहनों के लिए विशेष प्रावधान और राहत।
इस नीति के तहत निजी और कमर्शियल दोनों प्रकार के वाहनों को शुरू में आकर्षक प्रोत्साहन दिए गए थे, ताकि लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख करें और ईंधन आधारित वाहनों पर निर्भरता कम हो।
27 मार्च के बाद निजी वाहनों पर छूट समाप्त
राज्य सरकार ने 27 मार्च, 2026 तक निजी इलेक्ट्रिक वाहनों पर मिलने वाली टैक्स और पंजीयन शुल्क की छूट का समय तय किया था। इसका मतलब यह है कि ई-बाइक, ई-कार और तीन पहिया वाहनों की कीमत में अब वृद्धि होगी, क्योंकि खरीदारों को टैक्स और पंजीयन शुल्क खुद भरना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि कुछ उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौटने के लिए मजबूर कर सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि इलेक्ट्रिक वाहन अब महंगे होने के कारण बजट पर असर डालेंगे।
रेट्रोफिटिंग योजना पर असर
ईवी नीति के तहत पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलवाने के लिए रेट्रोफिटिंग योजना भी लागू की गई थी। इस योजना के तहत:
- दो पहिया वाहन: 5,000 रुपये प्रोत्साहन।
- तीन पहिया वाहन: 10,000 रुपये प्रोत्साहन।
- कार: 25,000 रुपये प्रोत्साहन।
लेकिन रेट्रोफिटिंग की शुरुआत अपेक्षित गति से नहीं हो सकी क्योंकि कई स्थानों पर किट उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके अलावा, इस योजना पर दी गई एक साल की छूट भी 27 मार्च को समाप्त हो रही है। इसका मतलब यह है कि निजी लोग अब रेट्रोफिटिंग के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
कमर्शियल वाहनों को राहत जारी रहेगी
हालांकि निजी वाहनों पर छूट समाप्त हो रही है, लेकिन कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे कि ई-बस, ई-ट्रक, ई-ट्रैक्टर और एंबुलेंस को अभी भी दो वर्ष की राहत दी गई है। इस राहत के अंतर्गत वाहन कर और पंजीयन शुल्क में छूट 27 मार्च, 2027 तक लागू रहेगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से व्यवसायिक संस्थाओं और सार्वजनिक परिवहन के लिए है, ताकि कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन जारी रहे और प्रदूषण कम करने के प्रयास प्रभावित न हों।
खरीद पर बढ़ेगा भार, सोच-समझकर करें निवेश
विशेषज्ञों के अनुसार, निजी खरीदारों को अब अपनी योजना में बदलाव करना होगा। ई-बाइक और ई-कारों की कुल लागत में वृद्धि होगी क्योंकि:
- वाहन कर और पंजीयन शुल्क का भुगतान अब खरीदारों को करना होगा।
- रेट्रोफिटिंग पर मिलने वाला प्रोत्साहन समाप्त हो गया है।
- अतिरिक्त लागत के कारण इलेक्ट्रिक वाहन की कुल कीमत पेट्रोल-डीजल वाहनों के करीब आ सकती है।
इससे उपभोक्ताओं को वाहन खरीदने से पहले सभी खर्चों का ध्यान रखना होगा। वहीं, कुछ लोग अभी भी पर्यावरणीय फायदे और ईंधन लागत में बचत को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं।
सरकारी उद्देश्य और भविष्य की रणनीति
MP सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लागू करने का उद्देश्य सिर्फ़ निजी वाहनों की खरीद को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि:
- प्रदूषण को कम करना।
- पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाना।
- कमर्शियल वाहनों और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ाना।
सरकार ने पहले ही यह संकेत दिया है कि वह भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए नई योजनाओं और प्रोत्साहन पैकेज पर काम कर रही है। इससे उम्मीद की जा रही है कि 2027 के बाद भी कमर्शियल और निजी दोनों प्रकार के वाहनों के लिए नीतियां और रियायतें जारी रहेंगी।
निष्कर्ष
MP में 27 मार्च 2026 से निजी ई-बाइक, ई-कार और तीन पहिया वाहनों पर टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में मिलने वाली छूट समाप्त हो रही है। इससे वाहन की कुल कीमत बढ़ जाएगी और कुछ खरीदार पेट्रोल-डीजल वाहनों की ओर लौट सकते हैं।
हालांकि कमर्शियल वाहनों के लिए राहत और प्रोत्साहन 2027 तक लागू रहेंगे। रेट्रोफिटिंग योजना पर भी छूट समाप्त हो रही है, जिससे पुराने वाहन मालिकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलाव महंगा हो जाएगा।
इस बदलाव को देखते हुए उपभोक्ताओं को अब अपनी खरीद योजना सोच-समझकर बनानी होगी और वाहन की कुल लागत का पूरा आकलन करना होगा। वहीं, सरकार की कोशिश रहेगी कि कमर्शियल और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहन जारी रहे और प्रदेश में ईवी अपनाने की प्रक्रिया सुचारू बनी रहे।
