मिडिल ईस्ट संघर्ष: PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन से की फोन पर बात, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति को लेकर चर्चा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने दुनिया के कई हिस्सों में चिंता की लहर पैदा कर दी है। अमेरिका और ईरान-इजरायल के बीच संघर्ष, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ, अब 20 दिन से अधिक समय से जारी है। इस संघर्ष के चलते न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर संकट आया है, बल्कि ऊर्जा और मालवाहक आपूर्ति पर भी गंभीर असर पड़ा है। इस गंभीर स्थिति के बीच, भारत के PM नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत में PM मोदी ने ईद-उल-फितर की शुभकामनाएं दी और वर्तमान तनावपूर्ण हालात पर विचार साझा किए।
PM मोदी की बातचीत का मुख्य उद्देश्य
PM मोदी ने अपने आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना था। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान-इजरायल संघर्ष केवल क्षेत्रीय स्तर पर तनाव पैदा नहीं करता, बल्कि इसका वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और आर्थिक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है।
PM मोदी ने विशेष रूप से उन हमलों की निंदा की, जो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हुए। इन हमलों ने न केवल स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया, बल्कि समुद्री और हवाई मार्गों पर परिवहन को भी बाधित किया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे संघर्ष केवल तत्कालीय सुरक्षा खतरा ही नहीं पैदा करते, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी खतरा हैं।
समुद्री मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति पर चिंता
मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से होने वाली ईंधन की आपूर्ति में बाधा आई है। यह मार्ग विश्व की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और इसके बंद होने या असुरक्षित होने से कई देशों में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। इस संदर्भ में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने यह दोहराया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुचारू रूप से चलना चाहिए और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
PM मोदी ने इस बातचीत में ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए ईरानी सरकार के सहयोग की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करना दोनों देशों की जिम्मेदारी है और इसके लिए लगातार सहयोग जरूरी है।
ईद के अवसर पर शांति का संदेश
बातचीत के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन ने यह आशा व्यक्त की कि ईद का पर्व पूरे पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समृद्धि लेकर आए। उन्होंने एक-दूसरे को ईद की शुभकामनाएं दी और इस पर्व के माध्यम से क्षेत्रीय सहमति और सौहार्द बढ़ाने का संदेश दिया।
PM मोदी ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक त्योहार ऐसे समय में लोगों को एकजुट करने और हिंसा एवं असुरक्षा की भावना को कम करने का अवसर देते हैं। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि किसी भी संघर्ष या हिंसक घटना का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति के जरिए ही संभव है।
पूर्व कूटनीतिक प्रयास: बहरीन और कुवैत से फोन पर चर्चा
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच, पीएम मोदी ने पहले भी अन्य पश्चिम एशियाई नेताओं से फोन पर बातचीत की थी। शुक्रवार को उन्होंने बहरीन के किंग महामहिम हमद बिन ईसा अल खलीफा से बात की और ईद की शुभकामनाएं दी। इसके अलावा, उन्होंने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख अल-खालिद से भी बातचीत की और कुवैत में होने वाले हमलों और पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति पर विचार विमर्श किया।
इन बातचीतों में पीएम मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा, मालवाहक जहाजों की स्वतंत्रता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में किसी भी संघर्ष का प्रभाव न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि वैश्विक खाद्य, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा पर भी पड़ता है।
वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक दृष्टिकोण
ईरान-इजरायल संघर्ष ने मिडिल ईस्ट की रणनीतिक और आर्थिक महत्ता को फिर से उजागर किया है। यह क्षेत्र तेल और गैस के उत्पादन और आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है। संघर्ष के चलते तेल की कीमतों में अस्थिरता आई है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान पैदा हुआ है। पीएम मोदी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे समय में सभी देशों को मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
भारत की भूमिका और कूटनीतिक संदेश
भारत इस समय मध्य पूर्व में शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि भारत किसी भी संघर्ष में पक्षपाती नहीं होगा, लेकिन वह शांति, सुरक्षा और भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक और मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाएगा।
मोदी सरकार की यह रणनीति न केवल भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित करती है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग को भी मजबूत बनाती है। ईरान, बहरीन और कुवैत के नेताओं के साथ लगातार बातचीत से यह संदेश गया कि भारत अंतरराष्ट्रीय मामलों में जिम्मेदार और संतुलित भूमिका निभा रहा है।
निष्कर्ष
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच PM मोदी की यह पहल महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने शांति, स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के महत्व पर जोर देते हुए पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखा है। इस प्रयास से यह संकेत मिलता है कि भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में जिम्मेदार और संतुलित भूमिका निभाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
