बैतूल में दूषित पानी:बैतूल के दनवाखेड़ा गांव में दूषित पानी पीने से 20 से अधिक बच्चे खुजली, सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित हैं। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने प्रशासन से साफ पेयजल और त्वरित कार्रवाई की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर।
बैतूल में दूषित पानी: 20 बच्चे बीमार, दिग्विजय सिंह ने सरकार से की ये 3 बड़ी मांगें
बैतूल में दूषित पानी ने एक बार फिर ग्रामीणों की सेहत पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक स्थित दनवाखेड़ा गांव में दूषित जल के कारण 20 से अधिक बच्चे खुजली (स्केबीज), सर्दी-खांसी और बुखार जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है, और अब इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में भी जोर पकड़ लिया है। राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए प्रशासन और राज्य सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दनवाखेड़ा गांव में स्वास्थ्य संकट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैतूल जिले के दूरदराज के क्षेत्र दनवाखेड़ा गांव में पिछले कुछ दिनों से बच्चों के बीमार होने के मामले तेजी से बढ़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में आपूर्ति किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता काफी खराब है। पानी के रंग और स्वाद में बदलाव के बाद बच्चों में पहले खुजली शुरू हुई, जो धीरे-धीरे सर्दी-खांसी और तेज बुखार में बदल गई।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, गांव में करीब 20 बच्चे इस समय त्वचा रोग और अन्य जलजनित बीमारियों से पीड़ित हैं। बच्चों की हालत देखते हुए आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव में तत्काल एक मेडिकल कैंप लगाकर प्रभावित बच्चों का इलाज शुरू कराया है।
बैतूल में दूषित पानी: दिग्विजय सिंह ने उठाए सवाल
जैसे ही इस घटना की जानकारी सामने आई, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सक्रिय हो गए। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के माध्यम से बैतूल में दूषित पानी के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि 21वीं सदी में मध्य प्रदेश के बच्चों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है।
“करीब छह महीने पहले भी इसी तरह की बीमारी से बच्चों की मौत हो चुकी थी, लेकिन प्रशासन ने इससे कोई सबक नहीं लिया। ग्रामीण लगातार विरोध और शिकायत कर रहे हैं, फिर भी उन्हें साफ पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। यह प्रशासनिक लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
पूर्व सीएम ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से तीन बड़ी मांगें की हैं:
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तत्काल साफ पानी की व्यवस्था: गांव में टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
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दूषित स्रोतों की जांच: पानी के जिन स्रोतों (हैंडपंप, नल) से दूषित पानी आ रहा है, उनकी जांच कर तुरंत सुधार किए जाएं।
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प्रभावितों का मुफ्त इलाज: बीमार बच्चों और ग्रामीणों का पूरी तरह से मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए।
जलजनित बीमारियों का बढ़ता खतरा
बैतूल में दूषित पानी से सिर्फ दनवाखेड़ा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गांवों में जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दूषित पानी पीने से स्केबीज (खुजली), टाइफाइड, हैजा, डायरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं, खासकर बच्चों में।
बीमारियों के लक्षण और बचाव
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खुजली (स्केबीज): यह त्वचा पर होने वाली एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जो दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलती है। इसमें त्वचा पर लाल चकत्ते और गंभीर खुजली होती है।
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सर्दी-खांसी और बुखार: ये वायरल इंफेक्शन के सामान्य लक्षण हैं, लेकिन अगर ये दूषित पानी के कारण हो रहे हैं, तो यह गंभीर रूप ले सकते हैं।
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बचाव: विशेषज्ञ उबालकर ठंडा किया हुआ पानी पीने, हाथों को बार-बार साबुन से धोने और त्वचा पर किसी भी तरह के संक्रमण को नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं।
प्रशासन की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को मौके पर रवाना किया है। दनवाखेड़ा गांव में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों और अन्य ग्रामीणों की जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग की टीम ने पानी के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी बीमार बच्चे खतरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि गांव में दवाइयों का वितरण और पेयजल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ दमनकारी है जबकि समस्या की जड़ यानी पानी के स्रोत को अब तक ठीक नहीं किया गया है।
राजनीति गरमाई
बैतूल में दूषित पानी का यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। दिग्विजय सिंह के हमले के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की है।
वहीं, भाजपा के स्थानीय नेताओं ने कहा कि प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है और दिग्विजय सिंह बिना तथ्यों के राजनीति कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि राजनीति से ऊपर उठकर उनकी समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
साफ पानी का अधिकार: क्या हो रही है लापरवाही?
यह पहला मौका नहीं है जब मध्य प्रदेश के किसी गांव में दूषित पानी से लोग बीमार हुए हैं। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जलजनित बीमारियों के कई मामले सामने आ चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पेयजल योजनाओं के रखरखाव में लापरवाही, पुरानी पाइपलाइनों का क्षरण और जल स्रोतों के आसपास गंदगी इसका मुख्य कारण है।
बैतूल में दूषित पानी का मामला एक बार फिर साफ पानी के अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। जब तक पानी के स्रोतों को स्थायी रूप से साफ नहीं किया जाता और नियमित जांच नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेंगी।
क्या कहते हैं आंकड़े?
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केवल इस वर्ष बैतूल जिले में अब तक 200 से अधिक लोग जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है जहां साफ पानी के लिए टैंकरों और हैंडपंपों पर निर्भरता अधिक है। दनवाखेड़ा की घटना ने इस बात को उजागर किया है कि छोटे बच्चे इस समस्या के सबसे ज्यादा शिकार होते हैं क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
निष्कर्ष
बैतूल में दूषित पानी की इस घटना ने प्रशासन और राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के हस्तक्षेप के बाद मामला और गरमा गया है। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह न केवल दनवाखेड़ा गांव में साफ पानी की व्यवस्था करे, बल्कि पूरे जिले में पानी की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक स्थायी तंत्र विकसित करे।
ग्रामीणों की मांग है कि जिन बच्चों की तबीयत खराब हुई है, उनका पूरा इलाज सरकारी खर्चे पर कराया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं। फिलहाल, मेडिकल कैंप में इलाज जारी है और प्रशासन ने राहत कार्यों में तेजी लाने का दावा किया है। लेकिन जब तक हर घर तक साफ पानी की सप्लाई सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ग्रामीणों की चिंता बनी रहेगी।
