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बंगाल चुनाव 2026 : ईद के मंच से ममता का एलान- ‘वोटिंग अधिकार नहीं छीनने देंगे’, भाजपा पर सियासी हमला

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Published On: 21 March 2026
बंगाल चुनाव 2026
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पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले CM ममता बनर्जी ने ईद के मंच पर भाजपा पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी का आरोप लगाया। जानिए क्या कहा अभिषेक बनर्जी ने और क्यों गरमाई बंगाल की सियासत।

ईद के मंच से सियासत: ‘मतदान का अधिकार नहीं छीनने देंगे’, बंगाल चुनाव से पहले CM ममता ने भाजपा पर लगाए कई आरोप

बंगाल चुनाव 2026 से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ईद-उल-फितर के अवसर पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित विशाल जनसभा को राजनीतिक मंच बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार चुनाव से पहले मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में बदलाव के जरिए लोगों का संवैधानिक अधिकार छीनने की साजिश रच रही है। ममता ने स्पष्ट कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेगी और किसी भी कीमत पर लोगों के मतदान के अधिकार को हथियाने नहीं देगी।

ममता बनर्जी का सियासी संदेश: ईद की नमाज के बाद रेड रोड पर हमला

कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर ईद की नमाज अदा करने के बाद हजारों की संख्या में एकत्रित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग को अपना हथियार बना लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दबाव में चुनाव आयोग मतदाता सूची की विशेष जांच कर रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों के नाम काटे जा रहे हैं।

बंगाल चुनाव 2026 के इस गरमा गए माहौल में ममता का यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा:
“हम लोगों के वोट देने के अधिकार को छीना नहीं जाने देंगे। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं है, यह लोकतंत्र और संविधान की लड़ाई है। भाजपा वोटर लिस्ट के जरिए अल्पसंख्यकों और गरीबों को निशाना बना रही है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस आखिरी दम तक इसके खिलाफ लड़ेगी।”

वोटर लिस्ट विवाद: क्या है टीएमसी और भाजपा के बीच असली मुद्दा?

तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि बंगाल चुनाव 2026 से पहले चल रही मतदाता सूची की विशेष समीक्षा में विपक्षी दलों, विशेष रूप से भाजपा, के दबाव में बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यह प्रक्रिया खासतौर पर उन इलाकों में अधिक प्रभाव डाल रही है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी अधिक है।

ममता बनर्जी ने सख्त लहजे में कहा कि वोटर लिस्ट के नाम पर किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि वह निष्पक्षता से काम करे और किसी भी राजनीतिक दबाव में न आए। इस मुद्दे ने राज्य में सियासी हलचल तेज कर दी है और टीएमसी इसे बंगाल चुनाव 2026 का प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

बंगाल की एकता vs विभाजन की राजनीति: ममता ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में बंगाल की गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्म के लोग सदियों से मिलजुल कर रहते हैं। ममता ने बिना नाम लिए भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा:
“जो लोग बंगाल को बांटने और समाज में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें यहां सफल नहीं होने दिया जाएगा। हमारी पार्टी हर हाल में जनता के अधिकार की रक्षा करेगी और भाजपा की किसी भी कोशिश का मजबूती से मुकाबला करेगी।”

उनका यह बयान बंगाल चुनाव 2026 के लिहाज से एक बड़ा सियासी संकेत माना जा रहा है, जिसमें वह ध्रुवीकरण के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस को एकता का चेहरा पेश कर रही हैं।

अभिषेक बनर्जी का बयान: ‘हिंदू-मुस्लिम नहीं, पूरा देश खतरे में’

ईद के इसी मंच से तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी जोरदार संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म के चश्मे से बाहर निकलकर देखने की जरूरत है। अभिषेक ने कहा:
“कोई कहता है हिंदू खतरे में है, कोई कहता है मुस्लिम खतरे में है, लेकिन सच यह है कि पूरा देश खतरे में है। हिंदू-मुस्लिम को लड़ाने की कोशिशें सफल नहीं होंगी। बंगाल का भाईचारा कायम रहेगा।”

अभिषेक के इस बयान ने युवाओं में खासा उत्साह भर दिया और इसे बंगाल चुनाव 2026 में टीएमसी की युवा रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने लोगों से एकता बनाए रखने और तृणमूल कांग्रेस को फिर से जिताने की अपील की।

बंगाल चुनाव 2026: भाजपा ने पलटवार किया, क्या बोले नेता?

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि ममता बनर्जी को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि टीएमसी सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर घिर गई है, इसलिए वह चुनाव से पहले बहाने बना रही है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची शुद्धिकरण एक सामान्य प्रक्रिया है और इसमें किसी भी समुदाय के लोगों के नाम नहीं काटे जा रहे हैं। पार्टी ने ममता पर पुरानी राजनीति करने और चुनावी एजेंडा से ध्यान हटाने का आरोप लगाया।

आगे की राह: क्या बदलेगा चुनावी समीकरण?

बंगाल चुनाव 2026 अब नजदीक आ चुका है और दोनों ही प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। टीएमसी ने हाल ही में अपना घोषणापत्र जारी कर कई चुनावी वादे किए हैं, जिन्हें भाजपा ने “झूठ का पुलिंदा” बताया है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बार भी विकास और सांप्रदायिक सौहार्द के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगी।

External Link: West Bengal Election 2026: TMC releases manifesto, BJP calls Mamata’s election promises a bundle of lies

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वोटर लिस्ट का मुद्दा बंगाल चुनाव 2026 में अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने का काम कर सकता है। वहीं, भाजपा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की अपनी पुरानी रणनीति पर काम कर रही है।ममता बनर्जी का ईद के मंच से यह भाषण सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह बंगाल चुनाव 2026 के लिए टीएमसी के एजेंडा और रणनीति का स्पष्ट खाका था। जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, सियासी तापमान और बढ़ना तय है।

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