Singhstha 2028: महाकाल से ओंकारेश्वर का सफर होगा सुपरफास्ट, सुरंग और वायडक्ट से घटेगी दूरी
इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग की अहमियत
Singhstha 2028 के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को महाकालेश्वर से ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होगा। इसके लिए इंदौर-खंडवा-इच्छापुर राजमार्ग को विशेष रूप से तैयार किया जा रहा है। यह राजमार्ग न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगा बल्कि यात्रा की दूरी और समय दोनों को घटाने में भी मदद करेगा।
हालांकि अभी तक इस राजमार्ग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा निर्माणाधीन है। प्रोजेक्ट में देरी के बावजूद, वर्तमान में सुरंग और वायडक्ट का निर्माण जोरों पर है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने निर्माण एजेंसी को काम तेज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि सिंहस्थ 2028 से पहले मार्ग पूरी तरह तैयार हो सके।
सफर की दूरी और समय में कटौती
सुरंग और वायडक्ट बनने के बाद महाकाल से ओंकारेश्वर की यात्रा 10-12 किलोमीटर कम हो जाएगी। इसके अलावा, सिमरोल से चोरल के बीच आने वाले दो घाट सेक्शन भी समाप्त हो जाएंगे। इससे यात्रा अधिक आसान और तेज होगी।
प्रोजेक्ट के अनुसार, इंदौर से ओंकारेश्वर का सफर अब केवल लगभग एक घंटा चालीस मिनट में पूरा हो सकेगा। वर्तमान में यह दूरी तय करने में पौने तीन घंटे लगते हैं। इसी तरह, खंडवा तक की दूरी ढाई घंटे में पूरी की जा सकेगी।
सुरंगों और वायडक्ट का विवरण
216 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर तीन प्रमुख सुरंगों का निर्माण चल रहा है। इनमें दो 500 मीटर लंबी और एक 300 मीटर लंबी सुरंग शामिल हैं। तलाई में बनी पहली सुरंग के बाद वाहन सीधे वायडक्ट से गुजरेंगे।
वायडक्ट की लंबाई और स्थिति इस प्रकार है:
- पहला वायडक्ट: 500 मीटर
- दूसरा वायडक्ट: 450 मीटर
दोनों वायडक्ट का निर्माण लगभग 60 प्रतिशत पूरा हो चुका है। मेघा इंजीनियरिंग के अनुसार, यह कार्य नवंबर-दिसंबर के बीच पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, चोरल की नदी पर तीन माइनर ब्रिज और कुछ छोटे वायडक्ट बनाए जा रहे हैं। इन कार्यों के पूरा होने के बाद घाट सेक्शन समाप्त हो जाएगा और यात्रा अधिक सहज और सुरक्षित होगी।
रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) और अंडरपास का निर्माण
सुरंग और वायडक्ट के अलावा, राजमार्ग पर यातायात की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़वाह में रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) का काम चल रहा है। अलाइनमेंट में बदलाव के बाद आरओबी के लिए अतिरिक्त जमीन भी मिल चुकी है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के अनुसार, राजमार्ग पर कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जा रहे हैं:
- एक मेजर ब्रिज व्हीकल ओवरपास (VOP)
- चार व्हीकल अंडरपास (VUP)
- एक लाइट व्हीकल अंडरपास (LVUP)
- छह स्माल व्हीकल अंडरपास (SVUP)
- 14 माइनर ब्रिज
- 22 बॉक्स कल्वर्ट
- 11 पाइप कल्वर्ट
इन सभी निर्माण कार्यों के पूरा होने के बाद राजमार्ग की क्षमता और सुरक्षा बढ़ जाएगी, जिससे यात्रा और भी सुविधाजनक होगी।
स्थानीय कनेक्टिविटी और आर्थिक लाभ
इंदौर-खंडवा-ओंकारेश्वर राजमार्ग केवल तीर्थयात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह मार्ग खंडवा, बुरहानपुर, जलगांव और अन्य आसपास के शहरों को जोड़ता है।
इससे स्थानीय व्यापार, कृषि परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास भी गति पकड़ेगा।
एनएचएआई के अनुसार, वायडक्ट और तीन ब्रिज के निर्माण के बाद मार्ग पूरी तरह खुल जाएगा। घाट सेक्शन समाप्त होने से न केवल दूरी कम होगी, बल्कि सफर में लगने वाला समय भी घटेगा।
Singhstha 2028 के लिए तैयारी
Singhstha के दौरान लाखों श्रद्धालु महाकाल से ओंकारेश्वर तक की यात्रा करेंगे। राजमार्ग में बन रहे सुरंग और वायडक्ट यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएंगे। एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी को निर्देश दिया है कि सभी कार्य समय पर पूरे हों, ताकि श्रद्धालु आरामदायक और सुरक्षित यात्रा कर सकें।
मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव के अनुसार, सुरंग और वायडक्ट पूरी तरह तैयार होने के बाद यात्री महाकाल से ओंकारेश्वर सवा घंटे में और खंडवा ढ़ाई घंटे में पहुंच सकेंगे। इससे यात्रा में सुविधा के साथ-साथ समय की भी बड़ी बचत होगी।
भविष्य की योजनाएँ और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर
इस राजमार्ग पर कई तकनीकी और आधुनिक निर्माण कार्य चल रहे हैं, जो आने वाले वर्षों में इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात को सहज बनाएंगे। सुरंग, वायडक्ट, ब्रिज और अंडरपास का समग्र निर्माण इसे उत्तर-मध्य भारत का एक महत्वपूर्ण मार्ग बनाएगा।
सुरंग और वायडक्ट के जरिए न केवल दूरी घटेगी, बल्कि मार्ग पर यातायात की क्षमता, सुरक्षा और गति भी बढ़ेगी। इसके अलावा, यह मार्ग सिंहस्थ 2028 जैसे बड़े आयोजन के दौरान यातायात के बोझ को कम करने में सहायक साबित होगा।
