India-China के बीच 6 साल बाद खुलने जा रहा लिपुलेख दर्रा, व्यापार फिर शुरू होगा
पिथौरागढ़। India-China के बीच व्यापारिक संबंधों में 6 साल बाद एक नई शुरुआत होने जा रही है। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) से बंद व्यापार को फिर से शुरू करने की योजना बनाई गई है। इस दर्रे के जरिए व्यापार 2026 के जून महीने से दोबारा शुरू हो सकता है। यह दर्रा 2020 में कोरोना महामारी के कारण बंद कर दिया गया था। बाद में गलवान घाटी में हुई भारत-चीन भिड़ंत और सीमा विवादों के चलते यह रास्ता लगातार बंद रहा। अब प्रशासन और केंद्र सरकार ने इस रूट से व्यापार को पुनः शुरू करने की तैयारी कर ली है।
विदेश मंत्रालय ने पिथौरागढ़ प्रशासन को व्यापार शुरू करने के लिए अधिसूचना जारी की है। पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी ए.के. भटगई ने बताया कि प्रशासन ने तैयारी के लिए मीटिंग भी बुलाई है। लिपुलेख दर्रे के दक्षिणी हिस्से को लेकर नेपाल ने भी अपना दावा जताया है। नेपाल कालापानी और लिंपियाधुरा पर अपना हक जताता रहा है, जो भारत का हिस्सा है। इस व्यापारिक रूट को खोलना इसलिए भी जरूरी माना जा रहा है क्योंकि इससे भारत और नेपाल के बीच क्षेत्रीय विवाद का समाधान भी सहज हो सकता है।
लंबे समय से मांग कर रहे थे स्थानीय व्यापारी
हिमालयी क्षेत्रों में भारत और चीन के बीच व्यापार सदियों पुराना है। इतिहास में यह रास्ता व्यापार के लिए महत्वपूर्ण रहा है। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह दर्रा बंद हो गया था। 1992 में इसे फिर से खोला गया और 2019 तक यह व्यापारिक मार्ग सक्रिय रहा। कोरोना महामारी के कारण 2020 में इसे बंद कर दिया गया ताकि किसी भी तरह से महामारी भारत में प्रवेश न करे।
स्थानीय व्यापारी लंबे समय से इस मार्ग को खोलने की मांग कर रहे थे। पिछले साल 5 वर्षों के अंतराल के बाद लिपुलेख मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हुई थी। अब व्यापारिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने की बारी है। प्रशासन ने कहा है कि इस साल जून से सितंबर तक व्यापार सत्र चलेगा और व्यापार की मात्रा में वृद्धि होने की संभावना है।
पहले से बेहतर व्यापारिक संभावनाएं
जिलाधिकारी ए.के. भटगई ने बताया कि इस बार व्यापार की संभावनाएं पहले से अधिक हैं क्योंकि लिपुलेख तक मोटरेबल रोड बन चुकी है। इससे यात्रा का समय घटेगा और परिवहन की लागत कम होगी। पहले व्यापार खच्चरों और भेड़ों के जरिए किया जाता था, लेकिन अब बेहतर रोड कनेक्टिविटी ने व्यापार को आसान बना दिया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि व्यापार शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएंगी। इसमें ट्रेड पास जारी करना, बैंकिंग सुविधाएं, कस्टम स्टाफ की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था और आवागमन से जुड़ी व्यवस्थाएं शामिल हैं। पिछली बार इस मार्ग पर 265 व्यापारियों को ट्रेड पास जारी किए गए थे। इस बार इस संख्या में वृद्धि होने की संभावना है।
व्यापार में शामिल वस्तुएं
सीमा व्यापार के तहत आयात और निर्यात दोनों गतिविधियां होंगी। आयात में ऊन, पश्मीना, नमक, बोरेक्स, रेशम और याक से संबंधित उत्पाद शामिल होंगे। निर्यात में कपड़ा, मसाले, आटा, सूखे मेवे, सब्जियां और कृषि उपकरण मुख्य रहेंगे। पिछले व्यापार सत्र में 1.25 करोड़ रुपये का निर्यात और 1.90 करोड़ रुपये का आयात दर्ज किया गया था। इस बार व्यापार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
प्रशासन की तैयारियां
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि व्यापार शुरू होने से पहले सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से नकद और मुद्रा विनिमय की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सीमा शुल्क विभाग की तरफ से कस्टम स्टाफ की तैनाती की जाएगी। बीएसएनएल को सीमा क्षेत्र में नेटवर्क व्यवस्था सुदृढ़ करने और गुंजी क्षेत्र में शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि व्यापार के दौरान सभी सुरक्षा और आवागमन नियमों का पालन किया जाए। किसी भी तरह के अनुचित गतिविधि को रोकने के लिए सुरक्षा बल तैनात रहेंगे। इस बार व्यापारिक गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाने के लिए सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
India-China संबंधों में महत्व
लिपुलेख दर्रे के जरिए व्यापार शुरू करना भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार का प्रतीक माना जा रहा है। यह कदम न केवल व्यापार को बढ़ावा देगा बल्कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक विश्वास भी मजबूत करेगा। गलवान घाटी में हुए तनाव और कोरोना महामारी के कारण इस मार्ग को बंद कर दिया गया था। अब इसे फिर से खोलने का निर्णय भारत-चीन संबंधों में सुधार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मार्ग व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा के बाद अब व्यापारिक गतिविधियों का खुलना स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी होगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
इस मार्ग के खुलने से स्थानीय व्यापारियों और किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। ऊँचे पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादन किए जाने वाले वस्त्र, मसाले, पश्मीना और अन्य उत्पाद चीन में निर्यात किए जा सकेंगे। इसके साथ ही चीन से आने वाले उत्पाद जैसे ऊन, रेशम और अन्य कच्चे माल को स्थानीय बाजार में लाया जा सकेगा।
इससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सीमा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां सक्रिय होंगी। मोटरेबल रोड के निर्माण से परिवहन लागत कम होगी और व्यापारिक गतिविधियों की गति भी तेज होगी।
भविष्य की संभावनाएं
लिपुलेख दर्रे के खुलने से भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में स्थायी सुधार की संभावना है। प्रशासन और केंद्र सरकार दोनों ने व्यापारिक गतिविधियों को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। व्यापार की मात्रा में वृद्धि और नए उत्पादों के शामिल होने से सीमा क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में इस मार्ग से व्यापारिक गतिविधियां और अधिक बढ़ सकती हैं। स्थानीय व्यवसायियों और किसानों को इससे स्थायी आर्थिक लाभ होगा।
निष्कर्ष
6 साल बाद लिपुलेख दर्रे से व्यापार फिर शुरू होना न केवल India-China संबंधों में सुधार का संकेत है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापारियों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। प्रशासन और केंद्र सरकार की ओर से किए गए कदम व्यापार को सुरक्षित, व्यवस्थित और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से हैं। मोटरेबल रोड, बैंकिंग सुविधाएं, कस्टम तैनाती और सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ यह व्यापारिक मार्ग नए सिरे से सक्रिय होगा।
इस पहल से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को नया जीवन मिलेगा। लिपुलेख दर्रे के खुलने से यह मार्ग फिर से पुराने गौरव और महत्व को हासिल कर सकेगा।
