व्यापारियों का आरोप है कि विभाग अधिकारी अपने राजस्व के टारगेट पूरा करने के लिए सीधे तौर पर बड़े व्यापारियों को धमका रहे हैं। नोटिस में कहा जा रहा है कि व्यापार में हर साल न्यूनतम 20 प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए, और उसी के अनुसार जीएसटी जमा किया जाना चाहिए।
क्या कहता है नोटिस
Indore से सतना और अन्य जिलों तक बड़े व्यापारियों के पास नोटिस भेजे जा रहे हैं। नोटिस में लिखा गया है कि व्यापारी का नाम शीर्ष करदाताओं की सूची में आता है और पिछले वर्ष के मुकाबले जीएसटी भुगतान अस्थिर या कम रहा है। इसके बाद नोटिस में लिखा गया है कि नियमों के अनुसार हर साल व्यापार में न्यूनतम 20 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है और इस वृद्धि का प्रभाव जीएसटी भुगतान में भी दिखना चाहिए।
नोटिस में आगे कहा गया है कि व्यापारी सात दिनों के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करे। जवाब में यह बताना होगा कि व्यापार क्यों नहीं बढ़ा और उसके प्रमाण के रूप में दस्तावेज भी जमा करना होंगे।
व्यापारी और कर पेशेवर परेशान
Indore व्यापारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट इस प्रकार के नोटिस से न केवल हैरान बल्कि नाराज भी हैं। इंदौर के पूर्व सीए ब्रांच अध्यक्ष कीर्ति जोशी का कहना है कि GST एक्ट में कोई ऐसा नियम नहीं है कि व्यापार हर साल न्यूनतम 20 प्रतिशत बढ़े। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, बाजार की मंदी और मौसमी उतार-चढ़ाव को नजरअंदाज कर ऐसे नोटिस देना पूरी तरह नियमविरुद्ध और मनमाना है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट स्वप्निल जैन ने भी बताया कि जीएसटी रिटर्न ऑनलाइन भरे जाते हैं और विभाग के पास व्यापारी की खरीद और बिक्री के सारे डेटा मौजूद हैं। यदि कोई व्यापारिक गतिविधि टैक्स क्रेडिट या भुगतान में गड़बड़ी करती है, तो विभाग के पास कार्रवाई का अधिकार है। लेकिन यहां स्थिति उलट है: जिन व्यापारियों ने सबसे अधिक कर भरा है, उन्हें ही नोटिस भेजा जा रहा है। इसका मतलब यह है कि विभाग अधिकारी अपने राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
मनमानी का तरीका: क्रेडिट का इस्तेमाल रोकना
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जीएसटी ने मार्च महीने में बड़े व्यापारियों पर दबाव बनाने के लिए नए उपाय भी शुरू किए हैं। अधिकारियों ने व्यापारियों को उनके टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
व्यापारी आम तौर पर क्रेडिट का उपयोग कर बकाया टैक्स चुकाते हैं, जिससे उनकी पूंजी पर दबाव नहीं पड़ता। लेकिन नोटिस में यह दबाव बनाया जा रहा है कि व्यापारी नकद टैक्स भरे, जिससे उनकी पूंजी प्रभावित हो और अधिकारी अपने राजस्व का लक्ष्य आसानी से पूरा कर सकें। इस प्रकार के उपाय व्यापारियों के लिए वित्तीय तनाव और व्यवसाय की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
कर पेशेवर और सीए विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई व्यापारिक संवेदनशीलता को समझे बिना की जा रही है। व्यापार मंदा होना किसी भी व्यापार के लिए सामान्य है। वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे माल की कीमतों में बदलाव, मांग और आपूर्ति में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियां व्यापार को प्रभावित करती हैं।
ऐसे में किसी अधिकारी का यह पूछना कि व्यापार क्यों मंदा है और उसके प्रमाण पेश करें, न केवल अनावश्यक है बल्कि व्यवसायिक स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विभाग को अपने टारगेट पूरे करने के लिए बड़े व्यापारियों को सीधे तौर पर धमकाना बंद करना चाहिए और नियमों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए।
व्यापारियों की चिंता
Indore व्यापारी अब अपने व्यवसाय के प्रति असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नोटिस में तय समय में जवाब देने की बात कही गई है, लेकिन इस प्रक्रिया से व्यापारी मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से दबाव में हैं। उनके अनुसार, इस प्रकार की कार्रवाई से व्यापार में निवेश और विस्तार की योजना प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, व्यापारिक वातावरण में ऐसे नोटिसों से विश्वास की कमी भी पैदा हो रही है। व्यापारी कहते हैं कि नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन बिना ठोस कारण और नियमों के खिलाफ नोटिस भेजना मनमाना है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में GST विभाग द्वारा व्यापार मंदा होने पर नोटिस भेजने की कार्रवाई व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। विशेषज्ञों और व्यापारियों का कहना है कि यह कदम नियमों के खिलाफ है और केवल विभाग के राजस्व लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश प्रतीत होता है।
बाजार की वास्तविक परिस्थितियों, वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात और व्यवसाय की मौसमी परिस्थितियों को नजरअंदाज कर व्यापारियों को जवाब देने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है।
व्यापारी और कर पेशेवर इस कदम को तुरंत पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं, ताकि व्यापारिक वातावरण सुरक्षित और सकारात्मक बना रहे।
