—Advertisement—

होर्मुज संकट के बीच Saudi Arabia ने रेड सी के रास्ते भारत को तेल सप्लाई शुरू की

Author Picture
Published On: 18 March 2026
Saudi Arabia Begins Oil Supply to India via Red Sea Amid Hormuz Crisis
— Saudi Arabia Begins Oil Supply to India via Red Sea Amid Hormuz Crisis

—Advertisement—

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट के बीच भारत के लिए राहत: Saudi Arabia ने रेड शी के रास्ते तेल सप्लाई शुरू की

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट को और गहरा दिया है। यह जलसंधि दुनिया के तेल व्यापार में सबसे संवेदनशील मार्गों में से एक मानी जाती है। इसी बीच भारत के लिए राहत की खबर आई है। सऊदी अरब ने भारत को रेड शी के रास्ते कच्चा तेल भेजना शुरू कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब होर्मुज से गुजरना जहाजों के लिए जोखिम भरा हो गया है।

Saudi Arabia के यानबू पोर्ट से कई टैंकर तेल लेकर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। Kepler की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में चार बड़े टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें कुल मिलाकर करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल मौजूद है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि महीने के अंत तक 90 लाख से 1 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल भारत को मिल सकता है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल व्यापार का संवेदनशील मार्ग

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व वैश्विक तेल व्यापार में अत्यधिक है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इस मार्ग से होकर गुजरता है। भारत भी खाड़ी देशों से ज्यादातर तेल इसी मार्ग के जरिए आयात करता है। हालाँकि, ईरान की ओर से जहाजों पर लगातार हमलों के कारण यह मार्ग असुरक्षित बन गया है। इसी वजह से सऊदी अरब ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने का निर्णय लिया।

तेल को पहले 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से यानबू तक लाया जाता है, और वहां से टैंकर के जरिए भारत भेजा जाता है। हालांकि इस नए मार्ग की अपनी सीमाएं हैं। पाइपलाइन की क्षमता होर्मुज मार्ग जितनी अधिक नहीं है, इसलिए इसके जरिए उतना तेल नहीं भेजा जा सकता जितना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भेजा जाता था।

रेड शी मार्ग: लाभ और चुनौतियां

रेड शी के रास्ते तेल सप्लाई शुरू होने से भारत के लिए राहत मिली है। यह कदम ऊर्जा संकट को कम करने और तेल की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने में मदद करेगा। हालांकि, इस मार्ग को भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा। बाब अल-मंडेब के पास हूती विद्रोहियों के हमलों का खतरा बना हुआ है, जहां पहले भी जहाजों पर हमला किया गया था। ऐसे में इस वैकल्पिक मार्ग के उपयोग में सावधानी बरती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही रेड शी मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, फिर भी मौजूदा हालात में यह भारत के लिए सबसे सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प है। इससे तेल सप्लाई बाधित होने का जोखिम कम होगा और घरेलू ऊर्जा जरूरतें पूरी हो पाएंगी।

अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कदम

भारत के लिए राहत की खबर के बीच अमेरिका ने मंगलवार, 17 मार्च 2026 को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के एंटी शिप मिसाइल ठिकानों पर हमला किया। अमेरिका का यह कदम क्षेत्र में ईरानी नियंत्रण को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे होर्मुज मार्ग पर जहाजों की सुरक्षा बढ़ सकती है और तेल की सप्लाई को कुछ हद तक स्थिर किया जा सकता है।

हालांकि, अमेरिका-ईरान तनाव और क्षेत्रीय संघर्ष जारी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि संघर्ष बढ़ता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड शी दोनों मार्गों पर आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत की रणनीति और ऊर्जा सुरक्षा

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले ही रणनीतिक भंडार का निर्माण किया है। विभिन्न विकल्पों के जरिए तेल आयात की योजना बनाई गई है। सऊदी अरब द्वारा रेड शी मार्ग का उपयोग, भारत की रणनीति को सुदृढ़ करने में मदद करेगा। इसके अलावा, भारत अन्य खाड़ी देशों से तेल आयात के लिए वैकल्पिक मार्गों और टैंकरों के नेटवर्क पर भी काम कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि तेल सप्लाई निरंतर बनी रहे और घरेलू बाजार में मूल्य स्थिर रहे। तेल की उपलब्धता में कोई बाधा आने पर पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आर्थिक और ऊर्जा संकट उत्पन्न हो सकता है।

भविष्य की चुनौतियां

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंडेब दोनों ही क्षेत्र अस्थिर हैं। ईरान और हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण तेल टैंकरों के लिए खतरा बना हुआ है। भारत के लिए यह चुनौती है कि वह सुरक्षित और स्थिर मार्गों से तेल प्राप्त करे।

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि भारत को लंबे समय के लिए वैकल्पिक मार्गों की खोज और सुरक्षा उपायों को मजबूत करना होगा। तेल टैंकरों की सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सहयोग और सैन्य निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जारी संकट के बीच सऊदी अरब द्वारा रेड शी के मार्ग से तेल सप्लाई भारत के लिए राहत भरी खबर है। चार बड़े टैंकर पहले ही रवाना हो चुके हैं और महीने के अंत तक अतिरिक्त तेल आने की संभावना है। हालांकि यह मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, फिर भी मौजूदा हालात में यह सबसे व्यावहारिक और सुरक्षित विकल्प है।

अमेरिका का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सैन्य कदम और भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति भी इस संकट को संतुलित करने में मदद कर रही हैं। भविष्य में मार्गों की सुरक्षा, वैकल्पिक विकल्प और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ही भारत की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर रखने की कुंजी होंगे।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

Related News
Breaking News हमेशा आपके पास

SwarajVani App Install करें

Latest India News & Breaking Updates — सीधे Home Screen पर

Offline पढ़ें Breaking Alerts बिल्कुल Free
SwarajVani को iPhone पर install करें:
📤 Share बटन दबाएं → "Add to Home Screen" select करें
Home
Web Stories
Instagram
WhatsApp