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Supreme Court ने श्योपुर बाढ़ राहत घोटाले में अमिता सिंह तोमर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

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Published On: 18 March 2026
Supreme Court Rejects Anticipatory Bail of Shyopur Tehsildar Amita Singh Tomar in 2021 Flood Relief Scam
— Supreme Court Rejects Anticipatory Bail of Shyopur Tehsildar Amita Singh Tomar in 2021 Flood Relief Scam

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मध्यप्रदेश समाचार: श्योपुर बाढ़ राहत घोटाले में Supreme Court ने दी बड़ा आदेश

मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में वर्ष 2021 के बाढ़ राहत घोटाले में आरोपी विजयपुर तहसीलदार अमिता सिंह तोमर के लिए Supreme Court ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जिससे उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस मामले में अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया और विशेष अनुमति याचिका को भी निरस्त कर दिया गया। बाढ़ राहत राशि वितरण में कथित गड़बड़ियों और फर्जी खातों के माध्यम से दो करोड़ रुपये के गबन के आरोपों के बीच यह फैसला आए दिन प्रशासन और मीडिया का ध्यान इस मामले पर केंद्रित कर रहा है।

सुनवाई के दौरान Supreme Court का सख्त रुख

कोर्ट नंबर 13 में हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि अग्रिम जमानत देने का कोई ठोस कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने अमिता सिंह तोमर द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका को भी निरस्त कर दिया।

न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामलों में अग्रिम जमानत केवल तब दी जा सकती है, जब आरोपी ने जांच में सहयोग देने की ठोस गारंटी दी हो और उसके खिलाफ सबूत कमजोर हों। इस मामले में जांच अभी चल रही है और जांच एजेंसी ने पर्याप्त सबूत प्रस्तुत किए हैं।

मामला: श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला

यह मामला वर्ष 2021 की भीषण बाढ़ से जुड़ा है। श्योपुर जिले में बाढ़ के बाद राहत राशि वितरण में कथित गड़बड़ियों का पता चला। बड़ौदा तहसील में कुल 794 प्रभावितों का आकलन किया गया था, लेकिन राहत वितरण के दौरान 127 फर्जी खातों में राशि ट्रांसफर की गई।

जांच में सामने आया कि रकम पात्र लाभार्थियों तक नहीं पहुंची। इसके बजाय राशि कुछ अन्य खातों में भेज दी गई, जिससे लगभग 2 करोड़ रुपये का गबन हुआ।

आरोप: 2 करोड़ रुपये का गबन

पुलिस और जांच एजेंसियों का कहना है कि लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि पात्र हितग्राहियों तक नहीं पहुंची। इन रकमों का ट्रांसफर फर्जी खातों में किया गया। इस पूरे प्रकरण में बड़ौदा थाना पुलिस ने तहसीलदार अमिता सिंह तोमर सहित 28 पटवारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।

अमिता सिंह तोमर पर आरोप है कि उन्होंने बाढ़ राहत राशि वितरण में जानबूझकर गड़बड़ियां कीं और कई फर्जी खातों के माध्यम से राशि हड़प ली।

कार्रवाई में भेदभाव के आरोप

इस पूरे मामले में कार्रवाई को लेकर भेदभाव के आरोप भी उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ पटवारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं, जबकि अन्य के खिलाफ अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय प्रशासन और नागरिकों का कहना है कि इस तरह की अधूरी कार्रवाई से लोगों में न्याय के प्रति विश्वास कमजोर हो सकता है। कई लोग मानते हैं कि सभी आरोपी और संबंधित अधिकारी बराबरी के स्तर पर जांच और कार्रवाई के दायरे में आने चाहिए।

अमिता सिंह तोमर: कौन हैं और पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं

अमिता सिंह तोमर वर्ष 2011 में लोकप्रिय टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में भाग लेकर 50 लाख रुपये जीतने के कारण पहले भी चर्चा में आ चुकी हैं। इसके बाद उनका प्रशासनिक करियर भी सुर्खियों में रहा।

इस घोटाले के बाद उनका नाम फिर से मीडिया में आया और अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी कानूनी स्थिति पर सभी की निगाहें टिक गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे संभावना बढ़ गई है कि अमिता सिंह तोमर को जल्द ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

वहीं, प्रशासन और पुलिस ने इस मामले की जांच को और तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई से जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी और अन्य आरोपियों पर भी दबाव बढ़ेगा।

आगामी कार्रवाई और निगरानी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासन और पुलिस की निगाहें अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही अमिता सिंह तोमर के खिलाफ गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

इस बीच, जांच एजेंसी ने सभी फर्जी खातों और लेन-देन की रिकॉर्डिंग पर भी विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। फॉरेंसिक ऑडिट और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की समीक्षा जारी है।

लोकप्रतिनिधियों और जनता की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों और नागरिक समाज का कहना है कि ऐसे मामलों में न्याय होना चाहिए और दोषियों को बिना छूट के दंड मिलना चाहिए। कई लोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं और इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश मान रहे हैं।

कुछ नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से आग्रह किया है कि अन्य आरोपी और पटवारियों के खिलाफ भी जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताएं न हों।

निष्कर्ष

श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला मध्यप्रदेश में बड़ी भ्रष्टाचार की घटनाओं में से एक है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच पूरी होने तक कोई भी आरोपी अनजाने में छूट नहीं सकता।

अमिता सिंह तोमर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उनकी गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। पुलिस और प्रशासन की निगरानी में जांच पूरी होने तक सभी कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे।

यह मामला न केवल श्योपुर, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों में कानून की पकड़ को मजबूत करने वाला उदाहरण बन सकता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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