मध्य प्रदेश में LPG संकट
मध्य प्रदेश में LPG की किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। इसका सबसे ज्यादा असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर देखा जा रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति लगातार आठवें दिन भी नहीं हो पाई है। तेल कंपनियों ने नई गाइडलाइन में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों के लिए 10 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन अभी तक स्थानीय प्रशासन के पास कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। यदि आदेश बुधवार तक मिल जाते हैं, तो प्रदेश के करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट को राहत मिल सकती है।
घरेलू सिलेंडर LPG की मांग में उछाल
कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण घरेलू सिलेंडरों की मांग में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए 3 से 4 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार, शहर में लगभग 5.5 लाख गैस कनेक्शन हैं, जिनमें 80 हजार कमर्शियल और 4.7 लाख घरेलू कनेक्शन शामिल हैं। पहले रोजाना लगभग 8,500 सिलेंडर बुक होते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 14,000 हो गई है। इस बढ़ी हुई मांग और सीमित आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
सप्लाई बढ़ाने के प्रयास
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने सिलेंडर की सप्लाई बढ़ाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। बीते कुछ दिनों से भोपाल में रोजाना 12 से 13 हजार सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि अगले 3–4 दिनों में लंबित मांग को पूरा कर दिया जाएगा। फिलहाल भारत गैस और एचपी गैस के सिलेंडर ऑनलाइन बुक किए जा रहे हैं, जबकि इंडेन के सिलेंडर ऑफलाइन माध्यम से बुक हो रहे हैं। शहर में लगभग 65 प्रतिशत कनेक्शन इंडेन के हैं, जिससे सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
गाइडलाइन जारी, आदेश का इंतजार
तेल कंपनियों ने 12 श्रेणियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों को उनकी खपत के अनुसार 10 प्रतिशत कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन का कहना है कि विस्तृत आदेश जारी होने के बाद ही वास्तविक सप्लाई शुरू की जाएगी।
होटल और रेस्टोरेंट पर बढ़ता दबाव
होटल उद्योग से जुड़े लोग बता रहे हैं कि महाराष्ट्र में पहले ही 70 प्रतिशत तक गैस सप्लाई बहाल कर दी गई है। मध्य प्रदेश में भी इसी तरह का फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है। गैस की कमी के कारण प्रदेश के हजारों होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हैं। कई स्थानों पर गैस खत्म होने के चलते व्यवसायियों को महंगे विकल्प जैसे इंडक्शन या डीजल भट्ठी अपनाने पड़ रहे हैं। कई होटलों ने अपने मेन्यू में भी बदलाव किया है, हालांकि कर्मचारियों की छंटनी अभी तक नहीं हुई है।
जनता में असंतोष और विरोध प्रदर्शन
एलपीजी संकट के कारण राज्य में राजनीतिक और सामाजिक माहौल भी गरमाया है। कई हिस्सों में गैस संकट के विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं। भोपाल में कांग्रेस नेताओं ने विरोध जताने के लिए नाले की गैस से चाय बनाने का अनोखा तरीका अपनाया। वहीं कुछ स्थानों पर रेहड़ीवालों को कोयला बांटकर भी विरोध दर्ज कराया गया। इन प्रदर्शनियों से साफ है कि एलपीजी की किल्लत न केवल व्यापार पर असर डाल रही है बल्कि आम जनता में भी असंतोष बढ़ा रही है।
आग और सुरक्षा चिंताएं
एलपीजी संकट के बीच आग और सुरक्षा की घटनाएं भी सामने आई हैं। एक घटना में वाहन में लगी आग तेजी से पूरे घर में फैल गई। पुलिस और दमकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारी भी स्थिति को संभालने के लिए मौके पर मौजूद थे। फायर ब्रिगेड की पांच से अधिक गाड़ियां आग बुझाने में लगीं। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें छह शव बाहर निकाल लिए गए हैं, जबकि एस.डी.ई.आर.एफ की टीम बचाव कार्य जारी रखी हुई है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आदेश जारी होने के बाद कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई धीरे-धीरे बहाल कर दी जाएगी। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे धैर्य रखें और जरूरी होने पर ही वैकल्पिक उपाय अपनाएं।
आगे की रणनीति
एलपीजी संकट ने शहर और राज्य की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। प्रशासन, तेल कंपनियां और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को अल्पकालिक वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी होगी, जबकि घरेलू उपभोक्ता अपनी दैनिक जरूरतों के लिए धैर्य बनाए रखें।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में एलपीजी संकट ने व्यवसाय और आम जनता दोनों को प्रभावित किया है। तेल कंपनियों के आदेश और स्थानीय प्रशासन की तत्परता से जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह संकट यह स्पष्ट करता है कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और आपातकालीन प्रबंधन के लिए लंबे समय की योजना बनाना अत्यंत आवश्यक है।
