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हिंदू या मुस्लिम? Dhar भोजशाला के धार्मिक अधिकार तय करने के लिए होगी अहम सुनवाई

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Published On: 16 March 2026
Dhar Bhojshala Dispute: High Court Hearing from March 16 on ASI Survey Report
— Dhar Bhojshala Dispute: High Court Hearing from March 16 on ASI Survey Report

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Dhar भोजशाला विवाद: हाईकोर्ट में एएसआई सर्वे रिपोर्ट पर सुनवाई 16 मार्च से

Dhar । मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला का विवाद लंबे समय से चर्चित है और अब इसका निर्णय उच्च न्यायालय के समक्ष आने वाला है। 16 मार्च, 2026 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में इस मामले की सुनवाई होने जा रही है। इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच वर्षों से विवाद चला आ रहा है। हिंदू समुदाय इसे मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। विवाद को सुलझाने के लिए अदालत ने पहले एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) को पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया था।

एएसआई का 98 दिनों का सर्वेक्षण

एएसआई द्वारा किया गया सर्वेक्षण लगभग 98 दिनों तक चला। इसमें आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग करके पूरे परिसर के ऐतिहासिक और ढांचागत पहलुओं का अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट अदालत में एक सीलबंद लिफाफे में जमा की गई, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सभी पक्षों को उपलब्ध करवा दिया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर ही अदालत को यह निर्णय लेना है कि भोजशाला किस समुदाय का है और दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों को कैसे संतुलित किया जाए।

सुनवाई में आपत्तियों का महत्व

16 मार्च की सुनवाई में केवल सर्वेक्षण रिपोर्ट के निष्कर्षों पर ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की आपत्तियों और सुझावों पर भी विचार किया जाएगा। मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण रिपोर्ट में दर्ज किए गए कई अहम बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। ये आपत्तियां दूसरे पक्षों के साथ भी साझा की गई हैं। अदालत सुनवाई के दौरान इन बिंदुओं की विस्तार से जांच करेगी। इसके अलावा, भोजशाला से जुड़े अन्य लंबित याचिकाओं पर भी इस सुनवाई में विचार होने की संभावना है।

मुस्लिम संगठनों की याचिकाएं

इस मामले में तीन अलग-अलग मुस्लिम संगठनों ने याचिकाएं दायर की हैं, जिसमें उन्होंने खुद को पक्षकार बनाने की मांग की है। इनमें ‘कमाल मौलाना वेलफेयर सोसाइटी’ की याचिका शामिल है। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ ने मुख्य याचिका दायर की है, जिसमें स्थान के धार्मिक स्वरूप की घोषणा किए जाने की मांग की गई है। उच्च न्यायालय इन याचिकाओं को भी सुनवाई में विचाराधीन रखेगा।

दोनों समुदायों के दावे

धार भोजशाला विवाद का मूल इस स्थल के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा है। हिंदू समुदाय इसे मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जो स्थानीय लोगों के अनुसार कई शताब्दियों से पूजा-अर्चना का स्थल रहा है। मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। वर्तमान में अदालत के एक आदेश के अनुसार, हिंदू समुदाय को मंगलवार को पूजा-अर्चना करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिम समुदाय शुक्रवार को नमाज अदा करता है।

एएसआई सर्वेक्षण का उद्देश्य

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सर्वेक्षण का कार्य इसलिए किया, ताकि इस ऐतिहासिक स्मारक से जुड़े ढांचागत और ऐतिहासिक तथ्यों का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अध्ययन हो सके। सर्वेक्षण में संरचना, स्थापत्य शैली, निर्माण सामग्री और स्थल के आसपास के अवशेषों का विस्तृत अध्ययन शामिल था। यह सर्वेक्षण अदालत को यह निर्णय लेने में मदद करेगा कि इस स्थल के धार्मिक अधिकार और संरक्षण किस प्रकार से संतुलित तरीके से सुनिश्चित किए जाएं।

लंबित विवाद और संवेदनशील स्थिति

धार प्रशासन ने अदालत की सुनवाई के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। स्थानीय प्रशासन ने स्थल और आसपास के इलाकों में पुलिस फोर्स तैनात किया है। दोनों समुदाय इस मामले पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रण बढ़ा दिया है।

ऐतिहासिक महत्व और भविष्य

धार भोजशाला का इतिहास सदियों पुराना है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह स्थल न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। विवाद का निष्पक्ष समाधान भविष्य में धार्मिक सद्भाव और स्थानीय समाज में शांति बनाए रखने के लिए अहम होगा। उच्च न्यायालय की सुनवाई और एएसआई की रिपोर्ट इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

कोर्ट की प्रक्रिया और संभावित परिणाम

अदालत सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनेगी और एएसआई की रिपोर्ट में वर्णित तथ्यों के आधार पर निर्णय करेगी। रिपोर्ट और आपत्तियों के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि भोजशाला के धार्मिक अधिकार किस पक्ष को दिए जाएं। सुनवाई के दौरान अदालत यह भी सुनिश्चित करेगी कि विवाद के समाधान में सभी कानूनी और ऐतिहासिक पहलुओं का न्यायसंगत और निष्पक्ष ध्यान रखा जाए।

निष्कर्ष

धार भोजशाला मामला एक संवेदनशील और लंबित विवाद है, जिसका समाधान सभी पक्षों के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत की सुनवाई, एएसआई के सर्वेक्षण और विभिन्न याचिकाओं की समीक्षा के बाद ही इस विवाद का निर्णय संभव होगा। दोनों समुदाय इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और स्थानीय प्रशासन भी शांति बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मामले का परिणाम न केवल धार जिले, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक परिदृश्य पर असर डाल सकता है।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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