अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं और बालिकाओं को आत्म-रक्षा और सम्मान का संदेश
Indore , मार्च 2026: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष में क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं को आत्म-रक्षा, सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और समाज में सशक्त बनाना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और बालिकाओं ने भाग लिया और प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में आत्म-रक्षा के विभिन्न कौशल सीखे। यह आयोजन महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में उनके अधिकारों की रक्षा को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
आत्म-रक्षा प्रशिक्षण और जागरूकता
कार्यक्रम के प्रशिक्षकों ने महिलाओं और बालिकाओं को आत्म-रक्षा के विभिन्न तरीके सिखाए। उन्हें कठिन परिस्थितियों में साहस, समझदारी और तुरंत प्रतिक्रिया देने की सलाह दी गई। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि आत्म-रक्षा केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आत्मविश्वास, मानसिक मजबूती और निर्णय लेने की क्षमता भी देती है।
मुख्य प्रशिक्षक मोहन कनोजिया ने कहा कि:
“समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। महिलाओं के सशक्तिकरण के बिना समाज का विकास संभव नहीं है। महिलाओं को शिक्षा, आत्म-निर्भरता और आत्म-सम्मान के साथ आगे बढ़ना चाहिए।”
कार्यक्रम में शामिल मुख्य अतिथियों का योगदान
कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि और समाजसेवी महिलाओं ने उपस्थित महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश दिया।
मुख्य अतिथियों में शामिल थीं:
- नेहा कुरील, समाजसेवी
- अंशिका कुसुमाकर
- सोना जैन, दैनिक स्वराज वाणी की एडिटर
- वैशाली यादव
- स्वाति गुप्ता, समाजसेवी
- लक्ष्मी बाई कनोजिया
मुख्य अतिथियों ने महिलाओं को अपने जीवन में आत्म-निर्भरता और सम्मान के महत्व को समझाया और किसी भी चुनौती का सामना साहसपूर्वक करने के लिए प्रेरित किया।

आयोजकों और सहयोगियों का योगदान
कार्यक्रम का संचालन और स्वागत क्लब परिवार की ओर से किया गया। इसमें प्रमुख योगदान देने वाले सदस्यों में शामिल थे:
- कंचन पटेल, मेघा अग्रवाल, कल्पना मेड़तिया, रीना कंडारे, रूचि गुप्ता, रेखा चंदौरे, नम्रता विश्वकर्मा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में युवाओं और स्वयंसेवकों की मेहनत भी उल्लेखनीय रही। जिनमें शामिल थे:
हिमांशु कल्याणी, सार्थक राणे, विभोर पटेल, नवनीत सिंह, पारुल कंडारे, रूपाली चांदोरे, श्रियांशी विश्वकर्मा, दीप्ति चांदोरे, नयन जैन, दिव्यांश चांदोरे, हर्ष अग्रवाल।
मुख्य प्रशिक्षक मोहन कनोजिया ने सभी आयोजकों, प्रशिक्षकों और सहभागियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह कार्यक्रम संभव नहीं हो पाता।
महिलाओं को सशक्त बनाने का संदेश
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाना था। इसमें तीन प्रमुख संदेश दिए गए:
- आत्म-रक्षा का महत्व: कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित रहने और अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए आवश्यक कौशल।
- सामाजिक जागरूकता: समाज में महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रति सजग रहना।
- आत्मविश्वास और साहस: मानसिक और शारीरिक दृढ़ता के साथ चुनौतियों का सामना करना।
प्रशिक्षण सत्र का विवरण
प्रशिक्षण सत्र में महिलाओं को कई व्यावहारिक तकनीकें और मानसिक रणनीतियाँ सिखाई गईं। इसमें शामिल थे:
- जबरन छेड़छाड़ या उत्पीड़न से बचाव के तरीके
- आवश्यक परिस्थिति में आत्मरक्षा की चालें और पोज़िशन
- संकट की घड़ी में शांत रहने और तेजी से निर्णय लेने की कला
- आत्म-रक्षा के लिए साधारण घरेलू वस्तुओं का सुरक्षित उपयोग
प्रशिक्षकों ने बताया कि आत्म-रक्षा प्रशिक्षण केवल शारीरिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को मानसिक मजबूती और आत्मविश्वास देता है, जिससे वे अपने जीवन में हर प्रकार के संकट का सामना कर सकें।

महिला दिवस के अवसर पर समाजिक संदेश
इस कार्यक्रम ने महिलाओं को सशक्त और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। मुख्य अतिथियों ने महिलाओं को समझाया कि अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना और किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सभी की जिम्मेदारी है।
मुख्य प्रशिक्षक मोहन कनोजिया ने कहा:
“महिलाओं का सशक्तिकरण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए आवश्यक है। यदि महिलाएँ सुरक्षित और आत्मनिर्भर होंगी, तो समाज में संतुलन और विकास संभव होगा।”
कार्यक्रम का समापन और आभार
कार्यक्रम का समापन मुख्य अतिथियों के सम्मान और सभी सहयोगियों की सराहना के साथ हुआ। उपस्थित सभी ने महिलाओं और बालिकाओं को स्वयं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति जागरूक होने का संकल्प दिलाया।
मुख्य प्रशिक्षक मोहन कनोजिया ने सभी प्रतिभागियों, आयोजकों और प्रशिक्षकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण से यह कार्यक्रम सफल हुआ।
निष्कर्ष
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल आत्म-रक्षा प्रशिक्षण तक सीमित नहीं था। इसने महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर और समाज में सम्मानित नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही यह आयोजन भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के लिए एक प्रेरणा बन गया है, जो महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा दें।
