Indore: बिना नोटिस बेसमेंट सील, रिश्वत के आरोप पार्षद तक पहुँचे
Indore में हाल ही में एक विवादास्पद मामला सामने आया है, जिसमें हवा बंगला जोन के एक भवन में बिना नोटिस के बेसमेंट सील किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ एजेंट और नेताओं ने इस प्रक्रिया में रिश्वत का खेल चलाया, और मामला क्षेत्रीय पार्षद तक पहुँच गया। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की पारदर्शिता और अधिकारियों के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला हवा बंगला जोन का
Indore हवा बंगला जोन से मात्र 300 मीटर दूर स्थित एक भवन के बेसमेंट में एक दुकान संचालित हो रही थी। भवन मालिक को पिछले सप्ताह भवन अधिकारी वैभव देवलासे का फोन आया, जिसमें उन्हें चेतावनी दी गई कि बेसमेंट का व्यवसायिक उपयोग मंजूर नहीं है और इसे बंद किया जाए।
इस दौरान कोई लिखित नोटिस या औपचारिक कागजी कार्रवाई नहीं की गई। अगले दिन जोन के बिल कलेक्टर सीबी सिंह राजपूत मौके पर पहुंचे और दुकान के शटर पर ताले पर अपने पदनाम वाला कागज चिपकाकर बेसमेंट को सील कर दिया। इस प्रक्रिया में दुकान में रखा सामान निकालने का भी मौका नहीं दिया गया।
भवन मालिक ने इस कार्रवाई के बाद जनप्रतिनिधियों और पार्षदों से संपर्क किया। प्रशासनिक जवाब में कहा गया कि निगमायुक्त के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है।
रिश्वतखोरी का आरोप: पवन भागवत का खेल
भवन मालिक ने निगम में पैठ रखने वाले पवन भागवत से संपर्क किया। भागवत ने भवन मालिक को बताया कि अधिकारी से मिलकर सील खुलवाने का फॉर्मूला तैयार किया जा सकता है।
कॉल रिकॉर्डिंग में पाया गया कि पवन ने भवन मालिक से कहा:
- अधिकारियों को दो लाख रुपये दे दो, मामला निपट जाएगा।
- बातचीत के दौरान भाव-ताव भी हुए और राशि कम करते हुए 35–50 हजार रुपये की मांग की गई।
पवन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई छोटा-मोटा अधिकारी नहीं, बल्कि बड़ा अधिकारी है। उन्होंने भवन मालिक से कहा कि “रसीद थोड़ी मिलेगी, लेकिन बेसमेंट की सील खुल जाएगी और आगे कोई परेशानी नहीं होगी।”
स्थानीय पार्षद ने दी शिकायत
क्षेत्रीय पार्षद शानू शर्मा ने मामले पर शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि बिना नोटिस के किसी भवन को सील करना अवैधानिक है। पार्षद ने कहा:
- मामले में दो लाख रुपये वसूली की शिकायत भी मिली है।
- बिना नोटिस कार्रवाई करना नियमों के खिलाफ है।
- जोन के अधिकारियों ने वार्ड में बेसमेंट पर चल रही मुहिम की जानकारी पार्षदों को नहीं दी।
पार्षद ने नगर निगम आयुक्त को भी इस संबंध में शिकायत की है।
Indore भवन मालिक का बयान और सवाल
भवन मालिक ने कहा कि:
- क्षेत्र में ऐसी कई दुकानें संचालित हैं, लेकिन केवल उनकी दुकान के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई?
- अधिकारियों और एजेंट के बीच सेटिंग का खेल आम लोगों के लिए भय और असुरक्षा पैदा कर रहा है।
- बिना नोटिस और कागजी प्रक्रिया के कार्रवाई करना न्याय और पारदर्शिता के खिलाफ है।
भवन मालिक ने वॉइस रिकॉर्डिंग और कॉल्स भी मीडिया को उपलब्ध करवाई हैं।
नगर निगम अधिकारियों की चुप्पी
इस मामले पर भवन अधिकारी वैभव देवलासे और जोन के बिल कलेक्टर सीबी सिंह से लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
- यह नहीं बताया गया कि बिना नोटिस किसी एक भवन को सील कैसे किया गया।
- निगम के सामने और अन्य बेसमेंटों में भी कई दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन सिर्फ इस मामले में कार्रवाई क्यों हुई, इसका जवाब नहीं मिला।
वसूली की शिकायत और कार्रवाई की हकीकत
मामले में यह भी सामने आया कि भवन मालिक ने पवन भागवत से बातचीत की, जिसमें:
- अधिकारियों से शिकायत के बाद सील खुलवाने का प्रस्ताव आया।
- राशि तय करने और भुगतान के बाद मामला निपटने का आश्वासन दिया गया।
शिकायत में कहा गया है कि यह प्रक्रिया केवल छोटे अधिकारियों द्वारा नहीं बल्कि बड़े अधिकारियों की मंजूरी के साथ की जा रही थी।
नागरिक अधिकार और पारदर्शिता की चिंता
इस पूरे मामले ने इंदौर में नागरिक अधिकार और नगर निगम के पारदर्शिता स्तर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
- किसी को सुनवाई या नोटिस दिए बिना कार्रवाई करना कानून के खिलाफ है।
- रिश्वतखोरी और सेटिंग के आरोप प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी असर डालते हैं।
- पारदर्शी और नियमबद्ध कार्रवाई के लिए नागरिक और पार्षदों की सक्रियता जरूरी है।
निष्कर्ष
Indore में हवा बंगला जोन के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि:
- नगर निगम अधिकारियों की कार्रवाई में पारदर्शिता की कमी है।
- कुछ एजेंट और नेताओं द्वारा रिश्वतखोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं।
- नागरिक और पार्षदों की सक्रियता के बावजूद न्यायसंगत समाधान मिलने में समय लग रहा है।
क्षेत्रीय पार्षद और भवन मालिक इस मामले में लगातार शिकायत और मीडिया के माध्यम से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
- अगर नगर निगम समय रहते उचित जांच और कार्रवाई नहीं करता है, तो यह मामला नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ उदाहरण बन सकता है।
इस मामले की निगरानी अब नगर निगम और आयुक्त स्तर तक पहुंच चुकी है, और उम्मीद है कि जल्द ही इस विवाद का समाधान होगा।
