मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी 2026-27 के तीसरे राउंड में ठेकेदारों की कम दिलचस्पी दिखी। 11,498 करोड़ के टेंडर पर सिर्फ 458 करोड़ की बोली लगी।
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी में ठंडा रिस्पॉन्स
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी के तीसरे चरण में भी उम्मीद के मुताबिक उत्साह देखने को नहीं मिला। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य में शराब दुकानों के ठेकों की नीलामी प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक ठेकेदारों की भागीदारी काफी कम रही है। आबकारी विभाग द्वारा जारी किए गए टेंडरों की संख्या और उनकी कुल कीमत के मुकाबले बोली बेहद कम प्राप्त हुई है।
इस स्थिति ने राज्य सरकार और आबकारी विभाग दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि शराब ठेके राज्य सरकार के लिए राजस्व का बड़ा स्रोत होते हैं और हर साल इनसे हजारों करोड़ रुपये की आय होती है।
तीसरे राउंड में उम्मीद से बेहद कम बोली
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी के तीसरे राउंड में प्रदेश के 50 जिलों के 407 समूहों के लिए टेंडर जारी किए गए थे। इन समूहों की कुल रिजर्व प्राइस करीब 11,498.68 करोड़ रुपये तय की गई थी।लेकिन नीलामी प्रक्रिया के दौरान ठेकेदारों की भागीदारी बेहद कम देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार शनिवार को पूरे प्रदेश में सिर्फ 15 जिलों के 36 समूहों के लिए ही 60 टेंडर प्राप्त हुए। इन टेंडरों में कुल मिलाकर 458.38 करोड़ रुपये की बोली लगी।अगर आंकड़ों को देखें तो यह कुल रिजर्व प्राइस का लगभग 4 प्रतिशत ही है, जो कि बेहद कम माना जा रहा है।
35 जिलों में एक भी टेंडर नहीं
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी के तीसरे चरण की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि प्रदेश के 35 जिलों में एक भी टेंडर दाखिल नहीं हुआ।यह स्थिति सरकार के लिए चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर ठेकेदारों की अनुपस्थिति पहले कम ही देखने को मिली है।इससे यह संकेत मिल रहा है कि ठेकेदार फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए नीलामी प्रक्रिया में भाग लेने से बच रहे हैं।
बड़े शहरों में भी ठेकेदारों की दूरी
चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ छोटे जिलों में ही नहीं बल्कि बड़े शहरों में भी मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी को लेकर ठेकेदारों की दिलचस्पी कम दिखाई दी।जिन प्रमुख जिलों में एक भी बोली नहीं आई उनमें शामिल हैं—
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भोपाल
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इंदौर
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उज्जैन
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ग्वालियर
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जबलपुर
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छिंदवाड़ा
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सागर
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देवास
इन जिलों को राज्य के प्रमुख शराब बाजारों में माना जाता है, लेकिन यहां भी बोली नहीं आने से आबकारी विभाग हैरान है।
रिजर्व प्राइस बढ़ने से ठेकेदार पीछे
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार नीलामी में ठेकेदारों की कम भागीदारी का एक बड़ा कारण रिजर्व प्राइस का ज्यादा होना है।
आबकारी विभाग ने कई समूहों की आधार कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ा दी है। इसके चलते कई ठेकेदारों को जोखिम ज्यादा लग रहा है।ठेकेदारों का मानना है कि इतनी ऊंची कीमत पर ठेका लेने के बाद लाभ कमाना मुश्किल हो सकता है।
आबकारी विभाग की नई रणनीति
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी में कमजोर रिस्पॉन्स को देखते हुए अब आबकारी विभाग नई रणनीति तैयार कर रहा है।सूत्रों के अनुसार अगले चरण में नीलामी प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए जाएंगे।नई रणनीति के तहत —
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एक समूह में कम से कम 2 और अधिकतम 3 दुकानें शामिल की जाएंगी
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किसी एकल दुकान को अलग समूह बनाकर नीलामी में नहीं रखा जाएगा
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बड़े समूह केवल उन्हीं जिलों में बनाए जाएंगे जहां पर्याप्त बोलीदाता मौजूद हों
सरकार को उम्मीद है कि इन बदलावों के बाद ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ सकती है।
ठेकेदारों की ‘वेट एंड वॉच’ नीति
मध्यप्रदेश शराब ठेका नीलामी में ठेकेदार फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपना रहे हैं।सूत्रों के मुताबिक कई बड़े ठेकेदार अभी बोली लगाने से बच रहे हैं। उनका मानना है कि शुरुआती चरण में सरकार ऊंची कीमतों पर ठेके देना चाहती है, लेकिन कमजोर प्रतिक्रिया मिलने के बाद सरकार को शर्तों में ढील देनी पड़ सकती है।ऐसी स्थिति में आगे के राउंड में ठेके कम कीमत पर मिल सकते हैं।
प्रतिस्पर्धा सीमित रखने की चर्चा
कुछ जिलों में यह भी चर्चा है कि स्थानीय स्तर पर कुछ ठेकेदार सीमित प्रतिस्पर्धा बनाए रखने की रणनीति अपना रहे हैं।इस रणनीति का उद्देश्य यह माना जा रहा है कि अगर शुरुआती दौर में कम बोलीदाता सामने आएंगे तो आगे चलकर कम प्रतिस्पर्धा में ठेके हासिल करना आसान हो जाएगा।हालांकि आबकारी विभाग इन चर्चाओं से साफ इनकार करता है।
रिजर्व प्राइस में कटौती की संभावना
आबकारी विभाग के सूत्रों का कहना है कि पिछले वर्षों में भी कई बार ऐसा देखा गया है कि शुरुआती राउंड में कमजोर प्रतिक्रिया मिलने के बाद सरकार रिजर्व प्राइस में कटौती कर देती है।संभावना है कि इस साल भी 1 अप्रैल से पहले सरकार नीलामी की शर्तों और कीमतों में बदलाव कर सकती है।यदि ऐसा होता है तो आने वाले चरणों में ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ सकती है।
