आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का भावुक दृश्य भांडगांव में देखने को मिला। हार्दिक हुंडिया ने कहा – माँ से बड़ा कोई शब्द नहीं।
आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा : माँ से बढ़कर कोई शब्द नहीं – हार्दिक हुंडिया
आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का भावुक और अलौकिक दृश्य देखकर हजारों भक्त भावविभोर हो उठे। भांडगांव स्थित भक्तामर कलश तीर्थ में आयोजित पंचमेरु मानस्तंभ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और मातृ संयम महोत्सव के दौरान यह ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण देखने को मिला।
इस अवसर पर ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक हुंडिया ने कहा कि विश्व में “माँ” से बढ़कर कोई शब्द नहीं है। माँ शब्द में पूरी सृष्टि समाहित है। उन्होंने कहा कि माँ के बारे में क्या कहा जाए, माँ ही वह शक्ति है जिसने हमें बोलना सिखाया, जीवन जीना सिखाया और धर्म की राह पर चलना सिखाया।
आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का भावुक क्षण
भांडगांव में आयोजित इस धार्मिक आयोजन के दौरान जब आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का पावन दृश्य सामने आया तो वहां उपस्थित भक्तगण भावुक हो उठे।
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जीवन में ऐसे भावुक और प्रेरणादायक प्रसंग बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने बताया कि एक माँ ने अपने बेटे को जैन शासन की सेवा के लिए समर्पित किया था और आज वही बेटा जैनाचार्य बनकर समाज में धर्म की ज्योति जला रहा है।
आज वही बेटा अपनी माँ को भी संयम और मोक्ष की राह पर अग्रसर कर रहा है। यह दृश्य केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि मानवीय भावनाओं से भी ओतप्रोत था।
जैन शासन में माँ-बेटे का अद्भुत उदाहरण
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जैन समाज में आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का यह प्रसंग माँ-बेटे के अनमोल प्रेम और त्याग का अद्भुत उदाहरण है।उन्होंने बताया कि जब एक माँ अपने बेटे को धर्म की सेवा के लिए समर्पित करती है, तब वह केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि पूरे समाज को दिशा देती है।
डॉ. आचार्य प्रणाम सागर जी, जिन्हें भक्तामर वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता है, आज जैन समाज में भक्तामर स्तोत्र की महिमा को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
भक्तामर स्तोत्र की शक्ति और उसके आध्यात्मिक महत्व को समझाकर वे समाज में आध्यात्मिक जागृति का संदेश दे रहे हैं।
भक्तामर कलश तीर्थ भांडगांव का ऐतिहासिक आयोजन
भांडगांव स्थित भक्तामर कलश तीर्थ में आयोजित पंचमेरु मानस्तंभ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव और मातृ संयम महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।इस अवसर पर पूज्य गुरुदेव गणाचार्य पुष्पदंत सागर जी, जगद्गुरु कुंथू सागर जी सहित 57 पींचीधारी महात्माओं और विशाल संघ की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
धर्म, भक्ति और संयम की इस अद्भुत परंपरा ने उपस्थित सभी भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
भक्तों की आंखों में छलक पड़े भावुक आँसू
जब आचार्य प्रणाम सागर जी की माताजी की दीक्षा का पावन दृश्य सामने आया, तो कई श्रद्धालुओं की आंखों में भावुकता के आँसू छलक पड़े।भक्तों ने इसे केवल एक धार्मिक घटना नहीं बल्कि आत्मा के कल्याण की दिशा में उठाया गया दिव्य कदम बताया।इस ऐतिहासिक अवसर पर मुंबई से पधारे हार्दिक हुंडिया, भरत शाह, डॉ. चटर्जी और निशांत जैन का विशेष सम्मान भी किया गया।
हार्दिक हुंडिया ने कहा कि जैन शासन में ऐसे माँ-बेटे की जोड़ी को लाख-लाख वंदन है, जो अपनी आत्मा के कल्याण के साथ-साथ पूरे समाज को भी धर्म और संयम का मार्ग दिखा रही है।

