इंदौर में आदिनाथ जन्म कल्याणक शोभायात्रा पूज्यसागर मुनिश्री के सानिध्य में निकली। समाजबंधुओं ने पाद प्रक्षालन, पालकी यात्रा, अभिषेक और शांतिधारा के साथ भव्य आयोजन किया।
आदिनाथ जन्म कल्याणक शोभायात्रा इंदौर
संवाददाता – राजेश जैन दद्दू
इंदौर। भगवान आदिनाथ जन्म कल्याणक से महावीर जयंती तक निरंतर चल रही आदिनाथ जन्म कल्याणक शोभायात्रा इंदौर में शुक्रवार को भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने विहार करते हुए तुलसीनगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवेश किया।
फेडरेशन के मीडिया प्रभारी राजेश जैन दद्दू ने बताया कि परम पूज्य मुनिश्री का समाजबंधुओं ने पाद प्रक्षालन कर भव्य अगवानी की। जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया।
मुनिश्री पूज्यसागर जी का मंगल प्रवेश
भगवान आदिनाथ के दर्शन करने के बाद अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज के साथ समाजबंधुओं ने बैंडबाजों के साथ महालक्ष्मीनगर की ओर प्रस्थान किया।
पूरे यात्रा मार्ग में मुनिश्री का जगह-जगह पाद प्रक्षालन किया गया और श्रद्धालु गुरुवर के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे।
पालकी यात्रा में उमड़ा समाज का उत्साह
महालक्ष्मीनगर पहुंचकर मुनिश्री के सानिध्य में भगवान आदिनाथ जी को पालकी में विराजित कर क्षेत्र में पालकी यात्रा निकाली गई।
क्षेत्र में भ्रमण करते हुए भगवान की पालकी और मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज की आरती और पाद प्रक्षालन के लिए समाज बंधुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।
पालकी यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए वापस महालक्ष्मीनगर दिगंबर जैन मंदिर पहुंची।
ध्वजारोहण और अभिषेक का आयोजन
मंदिर पहुंचने के बाद मुनिश्री के सानिध्य में जितेंद्रकुमार जैन द्वारा ध्वजारोहण किया गया।
ध्वजारोहण के पुण्यार्जक जितेंद्रकुमार जैन और दिलीप पाटनी रहे।
इस अवसर पर दिलीप पाटनी, अनिल मोदी, राकेश विनायगा, आरके जैन, राजेश जैन और अनिल जैन सहित बड़ी संख्या में समाजश्रेष्ठी उपस्थित रहे।
शांतिधारा में श्रद्धालुओं की सहभागिता
ध्वजारोहण के बाद मंदिर में भगवान श्रीजी का अभिषेक किया गया।
अभिषेक के उपरांत आशीष जैन ने शांतिधारा का सौभाग्य अर्जित किया।
मुनिश्री के मुखारविंद से शांतिधारा के मंत्रों का उच्चारण हुआ और मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहीं।
अगर जीवन में त्याग है तो राग-द्वेष नहीं होगा
शांतिधारा के बाद अंतर्मुखी मुनिश्री पूज्यसागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन दिए।
मुनिश्री ने अपने प्रवचन में कहा कि अगर मनुष्य में राग-द्वेष है तो सूतक है और राग-द्वेष में की गई पूजा पाप का कारण बनती है।
उन्होंने कहा कि यदि जीवन में त्याग है तो राग-द्वेष स्वतः समाप्त हो जाता है।
मुनिश्री ने यह भी कहा कि भगवान आदिनाथ और भगवान महावीर के सिद्धांतों में कोई विशेष अंतर नहीं है।
आदिनाथ भगवान के समय कठिनाइयाँ कम थीं जबकि भगवान महावीर के समय कष्ट अधिक थे — यही मुख्य अंतर है।
समाजबंधुओं को मिला आशीर्वाद
मुनिश्री पूज्यसागर जी ने दिगंबर जैन सोशल ग्रुप और सामाजिक संसद कीर्ति स्तंभ के पदाधिकारियों सहित उपस्थित समाजजनों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम में सामाजिक संसद कीर्ति स्तंभ के चुनाव में प्रत्याशी दिलीप पाटनी का बहुमान भी किया गया।
दिलीप पाटनी ने समाजबंधुओं से कहा कि वे समाज के लिए सेवा और कार्य करने का संकल्प लेते हैं तथा सदैव समाजहित में कार्य करते रहेंगे।
यात्रा में समाजजनों का सहयोग
कार्यक्रम में महालक्ष्मीनगर और तुलसीनगर दिगंबर जैन मंदिर के पदाधिकारियों के अलावा धर्मेंद्र जैन सिनकेम, एमके जैन, सरला सामरिया, अरविंद जैन, कुमुद जैन, अंकुर जैन, आरके जैन एक्साइज, राजेंद्र जैन निराला, कीर्ति पांड्या, नमिश जैन, वितुल अजमेरा, विपुल बांझल, आशीष जैन, भूपेंद्र जैन, राजेंद्र सोनी, प्रिंसपाल टोंग्या और राजू अलबेला का विशेष सहयोग रहा।
यात्रा के विशेष सहयोगियों में संजय पापड़ीवाल, रितेश पाटनी, ऋषभ जैन, मनीष जैन, संजय जैन अहिंसा और पिंकेश बिलाला शामिल रहे।


