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108 एम्बुलेंस बनी जीवन रक्षक, समय पर पहुंचकर हजारों मरीजों की बचाई जान

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Published On: 12 March 2026
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— 108 एम्बुलेंस सेवा बनी जीवन रक्षक: दो महीनों में 13,977 दुर्घटना पीड़ितों को समय पर पहुंचाकर बचाई जान

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108 एम्बुलेंस बनी जीवन रक्षक, समय पर पहुंचकर हजारों मरीजों की बचाई जान

भोपाल: मध्यप्रदेश में 108 एम्बुलेंस सेवा ने दो महीनों में अपने आपातकालीन सेवाओं के माध्यम से हजारों जीवन बचाकर साबित कर दिया है कि यह वास्तव में सड़क दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य आपात स्थितियों में एक जीवन रक्षक सेवा है। जनवरी और फरवरी 2026 में प्रदेशभर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, 108 एम्बुलेंस ने कुल 13,977 सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जिससे उनकी जान और भविष्य सुरक्षित किया गया।

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इस सेवा का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि 108 टीम दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर न केवल मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाती है, बल्कि मौके पर प्राथमिक उपचार प्रदान करके गंभीर घायलों के जीवन को स्थिर करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान मरीज को उचित चिकित्सा सहायता मिले, तो गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

108 एम्बुलेंस: गोल्डन आवर में जीवन रक्षक

108 एम्बुलेंस सेवा का प्राथमिक उद्देश्य समय पर घटनास्थल पर पहुंचना और मरीजों को गोल्डन आवर में प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करना है। इस सेवा में प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) और चालक की टीम दुर्घटना स्थल पर पहुंचते ही मरीज की स्थिति का आकलन करती है। कई गंभीर मामलों में मौके पर ही ऑक्सीजन सपोर्ट, ब्लीडिंग कंट्रोल और बेसिक लाइफ सपोर्ट उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों को सौंपा जाता है।

जनवरी 2026 में 108 एम्बुलेंस ने 7,335 और फरवरी 2026 में 6,642 दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया। औसतन प्रतिदिन 230 से अधिक घायलों को इस सेवा के माध्यम से समय पर चिकित्सा सहायता मिल रही है।

किस जिले में कितनी सेवा:

मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में सड़क दुर्घटनाओं के मामले अधिक पाए गए। इनमें प्रमुख हैं:

  • सागर: 844
  • इंदौर: 591
  • भोपाल: 576
  • जबलपुर: 510
  • रीवा: 499
  • सतना: 451

इसके अलावा धार, छिंदवाड़ा, खरगोन, सीधी, उज्जैन और विदिशा जैसे जिलों में भी 108 एम्बुलेंस ने बड़ी संख्या में दुर्घटना पीड़ितों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया।

समय पर प्रतिक्रिया और तेज़ सेवा

108 एम्बुलेंस की सबसे बड़ी विशेषता इसकी तेज़ प्रतिक्रिया है। आपातकालीन कॉल मिलने के बाद एम्बुलेंस औसतन 15 से 20 मिनट में घटनास्थल पर पहुंचती है। इस समयावधि में मरीज को प्राथमिक उपचार और अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाना ही दुर्घटना पीड़ितों की जान बचाने की कुंजी है।

108 एम्बुलेंस सेवा केवल दुर्घटनाओं तक सीमित नहीं है। यह गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थितियों जैसे हृदयाघात, डायबिटिक इमरजेंसी, अस्थमा अटैक, गर्भावस्था संबंधी आपात स्थिति आदि में भी तत्काल सहायता प्रदान करती है।

उपकरण और संसाधन: जीवन रक्षक तकनीक

प्रदेश में संचालित सभी 108 एम्बुलेंस अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस हैं। मध्यप्रदेश 108 सेवा के सीनियर मैनेजर, तरुण सिंह परिहार के अनुसार, प्रत्येक एम्बुलेंस में निम्न उपकरण उपलब्ध हैं:

  • ऑक्सीजन सपोर्ट
  • ब्लड प्रेशर मॉनिटर
  • पल्स ऑक्सीमीटर
  • ग्लूकोमीटर (शुगर जांच उपकरण)
  • थर्मोमीटर
  • बेसिक दवाइयां आपात स्थिति में प्रयोग के लिए

इन उपकरणों का उपयोग प्रशिक्षित EMT और विशेषज्ञ चिकित्सकों की मार्गदर्शन में किया जाता है।

108 एम्बुलेंस के माध्यम से जन-जागरूकता

एमपी 108 सेवा की टीम केवल मरीजों को अस्पताल पहुंचाने तक ही सीमित नहीं है। यह टीम दुर्घटना की रोकथाम और सड़क सुरक्षा के प्रति नागरिकों में जागरूकता फैलाने का कार्य भी करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, तेज गति से वाहन न चलाना, मोबाइल का उपयोग न करना और यातायात नियमों का पालन करना आवश्यक है।

108 सेवा का संदेश: जीवन प्राथमिकता है

तरुण सिंह परिहार ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में निजी वाहन के बजाय 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग करें। उन्होंने कहा, “एम्बुलेंस में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ और जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध हैं, जो रास्ते में ही मरीज को प्राथमिक उपचार दे सकते हैं और गंभीर स्थिति में उनकी जान बचा सकते हैं।”

निष्कर्ष

108 एम्बुलेंस सेवा मध्यप्रदेश में आपात चिकित्सा सहायता का एक अनिवार्य स्तंभ बन चुकी है। सड़क दुर्घटनाओं और स्वास्थ्य आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और प्रशिक्षित टीम के कारण हजारों जीवन बचाए जा चुके हैं। प्रदेश के नागरिकों के लिए यह सेवा केवल एक आपातकालीन सुविधा नहीं बल्कि जीवन रेखा साबित हो रही है।

जनवरी और फरवरी 2026 के आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि अगर समय पर सही उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद हो, तो गंभीर परिस्थितियों में भी जीवन बचाया जा सकता है। मध्यप्रदेश की 108 एम्बुलेंस सेवा ने यह साबित कर दिया है कि तकनीक, प्रशिक्षण और तत्परता से जीवन रक्षक सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

 

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