Jhakanawada में भव्य श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं दीक्षा महोत्सव
Jhakanawada नगर में जैन समाज द्वारा आयोजित श्री आदिनाथ जैन देरासर में भगवान श्री आदिनाथ का जन्म कल्याणक एवं दीक्षा महोत्सव हर्षोल्लास और भक्तिमय उत्साह के साथ मनाया गया। विशेष दिन पर सुबह से ही जिनालय में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत हुई और पूरे दिन भक्तिमय कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा। नगर भर में “जय-जय श्री आदिनाथ” और “पुण्य सम्राट की जय” के जयकारों से वातावरण अत्यंत भक्तिमय बना रहा।
दो साध्वियों का भावपूर्ण मिलन
कार्यक्रम के दौरान साध्वी श्री चैत्यप्रिया श्रीजी म.सा. और साध्वी श्री वीरप्रिया श्रीजी म.सा. का कई वर्षों बाद आत्मीय मिलन हुआ। इस अवसर पर उपस्थित समाजजन इस भावुक क्षण के साक्षी बने। बाद में रायपुरिया से पारस कुमार-बसंतीलाल राठौड़ परिवार ने साध्वी श्री चैत्यप्रिया श्रीजी का पावन स्वागत किया। पैदल श्रीसंघ की ढोल-नगाड़ों के साथ नाचते-गाते आगवानी ने पूरे नगर में उत्साह का वातावरण बना दिया।
नगर में भव्य वरघोड़ा निकला
पिछले 27 वर्षों से लगातार राजगढ़ से जैन मित्र मंडल के तत्वावधान में छोटा केसरियाजी झकनावदा पैदल संघ का पदार्पण होता रहा है। इस वर्ष 28वां पैदल संघ झकनावदा पहुंचा, जहां कोठारी परिवार के निवास पर ठंडाई के साथ यात्रियों का स्वागत किया गया।
इसके पश्चात लाभार्थी परिवार द्वारा भगवान के चित्र को बग्गी में विराजमान कर बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से भव्य वरघोड़ा निकाला गया। मार्ग में जगह-जगह समाजजनों ने भगवान की गहुली की और पूरे नगर में “जय-जय श्री आदिनाथ”, “पुण्य सम्राट की जय” और “बोलो महावीर भगवान की जय” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

धर्मसभा में प्रभु भक्ति का महत्व
धर्मसभा में मंगलपाठ के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ। साध्वी श्री चैत्यप्रिया श्रीजी म.सा. ने उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए भगवान आदिनाथ के जन्म कल्याणक और दीक्षा महोत्सव का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति से ही भवसागर से पार पाया जा सकता है। साध्वी ने जैन धर्म के सिद्धांतों, तीर्थों और साधना के महत्व पर प्रकाश डाला और श्रद्धालुओं को धर्म से जुड़ने का संदेश दिया।
जिनालय में शक्रस्तव अभिषेक
दोपहर में जिनालय में भगवान आदिनाथ का शक्रस्तव अभिषेक विधिपूर्वक संपन्न हुआ। सावर के सुप्रसिद्ध विधिकारक वैभव जैन और गायक गोवर्धन चौहान ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कराई, जिसमें समाजजनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अभिषेक में उपस्थित भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति से भगवान आदिनाथ की आराधना की।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु, गुलाल उड़ाकर मनाई होली
रात्रि में आरती के पश्चात नीम चौक में दीप प्रज्वलित कर भगवान के चित्र के समक्ष भक्ति का आयोजन हुआ। इस भक्ति कार्यक्रम में वैभव जैन और गोवर्धन चौहान ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी।
“काला बाबा रो पर्चो भारी” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। भक्ति के उत्साह में युवाओं और समाजजनों ने भगवान के जन्मोत्सव पर गुलाल उड़ाकर होली भी खेली। पूरे पांडाल में गुलाल के रंगों से उत्सव का माहौल और भी रंगीन बन गया।
अंत में विधिकारक, गायक और वाद्ययंत्र बजाने वाले कलाकारों का श्रीसंघ की ओर से दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया गया। आयोजन में सकल जैन समाज का सहयोग सराहनीय रहा, जिसने इस महोत्सव को भव्य और सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।

Jhakanawada और मेघनगर में सामूहिक वर्षितप एवं श्रद्धा
मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई स्थानों से आराधक जुड़कर इस आयोजन को और भव्य बनाने में सहयोग किया। झकनावदा और मेघनगर में वर्षितप की तरह, श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं दीक्षा महोत्सव में भी हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
स्थानीय परिवारों ने भव्य स्वागत और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन कर भक्तिमय वातावरण बनाए रखा। आराधक और श्रद्धालु मिलकर भगवान आदिनाथ के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक पालन कर रहे थे। इस आयोजन ने नगर में सामूहिक भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
पंडित रत्न पंकजमुनिजी के सानिध्य में अणु स्मृति दिवस
थांदला संघ के कषाध्यक्ष रजनीकांत शाहजी, युवाध्यक्ष प्रांजल लोढ़ा, महिला मंडल अध्यक्षा किरण श्रीश्रीमाल, अखिल भारतीय चंदना श्राविका मंडल प्रभारी इंदु कुवाड़ और प्रवक्ता पवन नाहर ने जानकारी दी कि दो दशक से अधिक समय के बाद थांदला नगर में अणु स्मृति दिवस का आयोजन किया जाएगा।
इस दौरान पूज्य गुरुदेव की गुणानुवाद सभा, एक शाम अणु के नाम, धार्मिक प्रतियोगिता, जाप और चारित्र आराधना के विविध आयोजन होंगे। संघ ने सभी सदस्यों और समाजजनों से धर्मलाभ लेने की अपील की है।

निष्कर्ष
झकनावदा नगर में श्री आदिनाथ जन्म कल्याणक एवं दीक्षा महोत्सव ने सम्पूर्ण समाज को जोड़ने का काम किया। भव्य वरघोड़ा, शक्रस्तव अभिषेक, धर्मसभा और भजन-संगीत के माध्यम से भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। इस महोत्सव ने जैन धर्म के सिद्धांतों, प्रभु भक्ति और समाज में सामूहिक सहभागिता का संदेश पूरे नगर में फैलाया।
आयोजन में शामिल प्रत्येक परिवार, साधक और युवा समूह ने मिलकर इसे सफल बनाया। झकनावदा का यह महोत्सव न केवल धार्मिक महत्ता रखता है, बल्कि समाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।
