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Ujjain: भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, चंद्रमा और कमल से सजा बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार

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Published On: 11 March 2026
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— Ujjain में चैत्र कृष्ण अष्टमी पर भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का चंद्रमा और कमल से दिव्य श्रृंगार किया गया, हजारों श्रद्धालुओं ने अलौकिक स्वरूप

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Ujjain: भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, चंद्रमा और कमल से सजा बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार

धार्मिक नगरी Ujjain स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Temple में बुधवार सुबह आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चैत्र कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के अवसर पर हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। देर रात से ही भक्त मंदिर के बाहर लंबी कतारों में खड़े होकर अपने आराध्य देव के दर्शन का इंतजार करते नजर आए। जैसे ही सुबह 4 बजे मंदिर के पट खुले, पूरा परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा और भक्तों ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई भस्म आरती

मंदिर में सुबह 4 बजे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा के अनुसार, आरती शुरू होने से पहले वीरभद्र जी से आज्ञा ली गई, जो इस प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बाद मंदिर के पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया।

पूजन की प्रक्रिया के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इस अभिषेक में जल के साथ दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस का उपयोग किया गया। मंत्रोच्चार और घंटानाद के बीच ‘हरि ओम’ का उच्चारण करते हुए प्रथम घंटाल बजाया गया और भगवान को पवित्र जल अर्पित किया गया।

भव्य श्रृंगार के बाद चढ़ाई गई भस्म

अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। पुजारियों और पुरोहितों ने भगवान को दिव्य रूप में सजाया और कपूर आरती के बाद उन्हें नया मुकुट धारण कराया गया। इसके पश्चात महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई, जो भस्म आरती का सबसे महत्वपूर्ण और विशेष हिस्सा माना जाता है।

माना जाता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु रोजाना इस आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

झांझ-मंजीरों और शंखनाद से गूंजा मंदिर परिसर

Ujjain भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद की गूंज सुनाई दी। इन वाद्य यंत्रों की ध्वनि और मंत्रोच्चार के बीच आरती संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया और “जय श्री महाकाल” के जयघोष से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य और अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं।

चंद्रमा और कमल से हुआ विशेष श्रृंगार

इस दिन बाबा महाकाल के श्रृंगार की विशेषता भी देखने लायक रही। भगवान को चंद्रमा और कमल से अलंकृत किया गया था, जिससे उनका स्वरूप बेहद आकर्षक और दिव्य दिखाई दे रहा था। भगवान के इस अनूठे श्रृंगार को देखकर भक्त भाव-विभोर हो गए।

भक्तों ने बाबा महाकाल के सामने नतमस्तक होकर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने किए दर्शन

इस अवसर पर कई संत-महात्मा और गणमान्य लोग भी मंदिर पहुंचे। Mahant Ravindra Puri, जो Akhil Bharatiya Akhada Parishad के अध्यक्ष हैं, उन्होंने भी ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिर प्रबंधन की ओर से उनका स्वागत और सम्मान किया गया। मंदिर प्रबंध समिति के सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिया ने उनका विधिवत स्वागत किया।

यह है महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों का समय

महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन विभिन्न समय पर कई आरतियां की जाती हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व है।

  • भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे
  • दद्योदक आरती: प्रातः 7:00 से 7:45 बजे
  • भोग आरती: प्रातः 10:00 से 10:45 बजे
  • संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे
  • संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे
  • शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे

मंदिर प्रशासन के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों के समय में जो बदलाव किया गया है, वह आश्विन मास की पूर्णिमा यानी शरद पूर्णिमा तक लागू रहेगा। इसके बाद आरतियों का समय फिर से पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कर दिया जाएगा।

धार्मिक नगरी Ujjain में स्थित महाकालेश्वर मंदिर देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां होने वाली भस्म आरती का विशेष महत्व है, जिसके दर्शन के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन Ujjain पहुंचते हैं और बाबा महाकाल की भक्ति में लीन होकर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

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