नागदा में सावित्रीबाई फुले 129वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। समाज के लोगों ने राष्ट्र की प्रथम शिक्षिका को पुष्पांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया।
सावित्रीबाई फुले 129वीं पुण्यतिथि नागदा में कार्यक्रम
सावित्रीबाई फुले 129वीं पुण्यतिथि नागदा में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। राष्ट्र की प्रथम शिक्षिका और महिला शिक्षा की अग्रदूत सावित्रीबाई फुले को याद करते हुए श्री राम कॉलोनी स्थित भवन में पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में समाज के लोगों ने एकत्रित होकर महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने उनके जीवन और कार्यों को याद करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाने का जो कार्य किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
राष्ट्र की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का योगदान
भारत में महिलाओं की शिक्षा की बात जब भी होती है, तो सबसे पहले नाम सावित्रीबाई फुले का आता है। उन्होंने उस समय लड़कियों के लिए स्कूल खोला, जब समाज में महिलाओं को शिक्षा देने का विरोध किया जाता था।
सावित्रीबाई फुले का जन्म महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ था। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर समाज सुधार और महिला शिक्षा के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।
उन्होंने न केवल लड़कियों को शिक्षा दी बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ भी आवाज उठाई। यही कारण है कि आज उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका और महिला अधिकारों की अग्रदूत माना जाता है।
नागदा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम
सावित्रीबाई फुले 129वीं पुण्यतिथि नागदा में श्री राम कॉलोनी स्थित भवन पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त माली समाज के अध्यक्ष सी.एल. वर्मा ने की। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए अनेक संघर्ष किए। उनके प्रयासों की वजह से आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
समाज के लोगों ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और समाजजन उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर सावित्रीबाई फुले को श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।इस अवसर पर बाबूलाल सैनी, राजेश सैनी, कैलाश परमार, राजेश सेन, प्रकाश बेरवाल और दिलीप देव सहित कई लोग मौजूद रहे।सभी ने कहा कि समाज में शिक्षा का प्रसार ही सच्ची श्रद्धांजलि है और हमें सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को अपनाना चाहिए।
महिलाओं की शिक्षा में सावित्रीबाई फुले की भूमिका
सावित्रीबाई फुले 129वीं पुण्यतिथि नागदा केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर ही नहीं बल्कि उनके विचारों को याद करने का भी समय है।उन्होंने महिलाओं को शिक्षा देकर समाज में समानता की नींव रखी। आज देश में महिलाओं की जो प्रगति दिखाई देती है, उसमें उनका योगदान अमूल्य है।
सावित्रीबाई फुले ने यह साबित किया कि शिक्षा ही समाज को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए आज भी उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा बना हुआ है।
संवाददाता: जीवनलाल जैन
स्थान: नागदा

