LPG सिलेंडर संकट: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच भारत में आपात स्थिति
मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग के असर से भारत में कुकिंग गैस (LPG) की आपूर्ति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है, क्योंकि तेल कंपनियों के पास केवल दो दिन का गैस स्टॉक बचा है।
हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई और बेंगलुरु में होटल और रेस्टोरेंट ने 10 प्रतिशत तक अपने संचालन को कम करने का ऐलान किया है। स्थिति ऐसी है कि अगर सप्लाई नहीं बढ़ाई गई, तो आम लोगों के घरों में खाना पकाने और कामकाजी लोगों, छात्रों के लिए दैनिक जीवन में कठिनाइयां बढ़ सकती हैं।
कामकाजी लोग और स्टूडेंट्स चिंतित
पुणे में नगर निगम की तरफ से 18 शवदाह गृह को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसका असर उन कामकाजी लोगों और छात्रों पर पड़ेगा जो घरों से बाहर रहते हैं और खाने के लिए होटल या रेस्टोरेंट पर निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर घरेलू LPG सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई, तो घरों में खाना बनाना भी मुश्किल हो जाएगा, जिससे सामान्य जीवन पर सीधा असर पड़ेगा।
होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन की चेतावनी
इंडिया होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने चेतावनी दी है कि अगर गैस संकट बढ़ता रहा, तो अगले दो दिन में पूरे भारत में होटल और रेस्टोरेंट बंद करने पड़ सकते हैं।
अभी तक 10 से 20 प्रतिशत होटल और रेस्टोरेंट पर इसका असर पड़ा है। शेट्टी ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी को लेटर लिखकर समस्या की जानकारी दी और महाराष्ट्र के सिविल सप्लाई मंत्री छगन भुजबल से भी इस बारे में बातचीत की।
NRAI ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की अपील
नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने भी केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि सरकार बार-बार कह रही है कि कुकिंग गैस की सप्लाई में कोई संकट नहीं है।
तेल कंपनियों ने कहा था कि कमर्शियल और घरेलू LPG की सप्लाई में 70 दिन तक कोई बाधा नहीं आएगी, लेकिन हालिया सप्लाई रोकने की कार्रवाई ने होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को गंभीर झटका दिया है।
केंद्र सरकार ने लिया बड़ा कदम
गहराए LPG संकट के बीच पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि वे गैस उत्पादन बढ़ाएं।
- अतिरिक्त गैस उत्पादन केवल घरेलू LPG की जरूरतों के लिए किया जाएगा।
- बाहर से मंगाई गई LPG की सप्लाई केवल अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को दी जाएगी।
- होटल, रेस्टोरेंट और अन्य उद्योगों के लिए रिव्यू कमेटी बनाई गई है, जो सप्लाई की स्थिति की निगरानी करेगी।
गोरखपुर और वाराणसी में सप्लाई प्रभावित
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और वाराणसी में पेट्रोलियम कंपनियों ने 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई रोक दी है। घरेलू सिलेंडर की सप्लाई में 20-25 प्रतिशत तक कटौती की गई है।
इससे इन क्षेत्रों में होटल, रेस्टोरेंट और आम जनता को तुरंत प्रभाव पड़ा है। स्थानीय दुकानदारों ने भी सप्लाई बाधित होने पर चिंता व्यक्त की है।
पुणे में शवदाह गृहों पर असर
महाराष्ट्र के पुणे में नगर निगम द्वारा संचालित 18 LPG आधारित शवदाह गृह को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
नगर आयुक्त नवल किशोर राम ने बताया कि गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण यह निर्णय लिया गया। हालांकि, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह पूरी तरह चालू हैं और उनका संचालन जारी रहेगा।
होटल-रेस्टोरेंट और कामकाजी वर्ग पर असर
हालत यह है कि कामकाजी लोग, स्टूडेंट्स और होटलों पर काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
- होटलों और रेस्टोरेंट में खाना पकाना मुश्किल होगा।
- छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए बाहर का खाना महंगा और मुश्किल हो सकता है।
- अंतिम संस्कार और अन्य सामाजिक अनुष्ठानों पर भी असर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो LPG संकट जल्द घरेलू स्तर पर गंभीर चुनौती बन सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कारण
इस संकट के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति जिम्मेदार मानी जा रही है। तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से भारत में कमर्शियल और घरेलू उपयोग दोनों पर असर पड़ा है।
समाधान और आगे की रणनीति
- केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि वे घरेलू LPG की प्राथमिकता सुनिश्चित करें।
- होटल और रेस्टोरेंट के लिए समीक्षा कमेटी सप्लाई और मांग का आंकलन करेगी।
- आम जनता को निर्देश दिया गया है कि वे अनावश्यक रूप से सिलेंडर की मांग बढ़ाकर संकट को और गंभीर न करें।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में युद्ध और तेल-गैस सप्लाई में व्यवधान के कारण भारत में LPG संकट गहराया है।
हालांकि सरकार ने उत्पादन बढ़ाने और सप्लाई को प्राथमिकता देने के आदेश जारी किए हैं, होटल, रेस्टोरेंट और कामकाजी लोगों के लिए स्थिति अभी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
आने वाले कुछ दिनों में तेल कंपनियों की उत्पादन क्षमता और केंद्र सरकार की निगरानी ही तय करेगी कि यह संकट कब तक सामान्य होगा और आम जनता पर कितना असर पड़ेगा।
