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MP में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव 12 मई को, महिलाओं के लिए 7 आरक्षित पद, मतगणना 16 जून से

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Published On: 9 March 2026
MP में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव 12 मई को, महिलाओं के लिए 7 आरक्षित पद, मतगणना 16 जून से

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MP में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव 2026: महिलाओं की बढ़ी हिस्सेदारी, 12 मई को मतदान, 16 जून से मतगणना

MP में राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच वर्षों में एक बार होने वाले चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस बार चुनाव 12 मई 2026 को पूरे प्रदेश में आयोजित होंगे और मतगणना 16 जून से शुरू होगी। कार्यकारिणी में कुल 25 सदस्य होंगे, जिनमें से 7 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। हालांकि इनमें से केवल 5 पदों पर प्रत्यक्ष चुनाव होगा, जबकि शेष दो पदों पर नामांकन या मनोनयन द्वारा सदस्य चुने जाएंगे।

राज्य अधिवक्ता परिषद का यह चुनाव प्रदेश की कानूनी व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले कार्यकाल में कार्यकारिणी में केवल एक महिला सदस्य थीं, लेकिन इस बार महिलाओं के लिए आरक्षित पदों की संख्या बढ़ाकर सात कर दी गई है, जिससे महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व में वृद्धि होगी।

प्रारंभिक मतदाता सूची और नामांकन प्रक्रिया

चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च को जारी की जाएगी। वकीलों को 24 मार्च तक इस सूची को लेकर दावे और आपत्तियां प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। अंतिम मतदाता सूची 1 अप्रैल को जारी की जाएगी। केवल वही वकील मतदान में शामिल हो सकेंगे जिन्होंने अपने सत्यापन का काम पूर्ण कर लिया होगा।

नामांकन प्रक्रिया 8, 9 और 10 अप्रैल को होगी। नामांकन की जांच 15 और 16 अप्रैल को की जाएगी। प्रत्याशी 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस ले सकते हैं। अंतिम सूची 22 अप्रैल को शाम पांच बजे घोषित कर दी जाएगी। मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद करके जबलपुर भेजा जाएगा, जहां 16 जून से मतगणना शुरू होगी। सामान्यत: राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है।

महिलाओं की बढ़ी हिस्सेदारी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार इस बार कार्यकारिणी में महिलाओं के लिए 7 पद आरक्षित किए गए हैं। यह निर्णय वकीलों के बीच लैंगिक संतुलन और समान भागीदारी को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। इससे न केवल महिलाओं को परिषद में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा, बल्कि उनकी नेतृत्व क्षमता और निर्णय प्रक्रिया में योगदान भी बढ़ेगा।

चुनाव में चुनौती

इस बार पुरुष प्रत्याशियों के लिए केवल 18 पद उपलब्ध होंगे, जबकि पिछले चुनाव में 25 पद थे। इस वजह से पुरुष प्रत्याशियों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो गई है। अनुमान है कि प्रथम वरीयता में 2,500 वोट पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित मान सकते हैं। इस बार चुनाव अधिक प्रतिस्पर्धात्मक होने के कारण प्रत्याशियों को अधिक मेहनत और रणनीतिक प्रचार करना होगा।

प्रत्याशियों की सक्रियता

हालांकि नामांकन प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है, लेकिन संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार पहले ही शुरू कर दिया है। प्रचार सोशल मीडिया के माध्यम से और प्रत्यक्ष रूप से वकीलों के कार्यालय तथा घर तक पहुंचकर किया जा रहा है। प्रत्याशी प्रथम वरीयता का वोट पाने के लिए लोगों से संपर्क कर रहे हैं।

इंदौर से अकेले 30 से अधिक प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें वर्तमान कार्यकारिणी के 5 सदस्य भी शामिल हैं। इसके अलावा अन्य जिलों से भी कई प्रत्याशी मैदान में उतरने वाले हैं। इस प्रकार इस चुनाव में मुकाबला कठिन और चुनौतीपूर्ण रहेगा।

मतदाता और मतदान

प्रदेशभर में लगभग 87,000 वकील इस चुनाव में मतदान करेंगे। केवल वे वकील मतदान में भाग ले सकेंगे जिन्होंने अपने सत्यापन का कार्य पूर्ण किया हो। मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए कड़ी व्यवस्था की जाएगी।

मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद करके जबलपुर भेजा जाएगा। वहां से मतगणना 16 जून से शुरू होगी। मतगणना की प्रक्रिया लगभग दो महीने तक चलेगी, जिसमें चुनाव परिणाम का अंतिम रूप सामने आएगा।

चुनाव की महत्वता

राज्य अधिवक्ता परिषद का यह चुनाव केवल कार्यकारिणी के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के वकीलों में लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देने का एक अहम अवसर है। कार्यकारिणी के निर्णय प्रदेश में कानूनी नीतियों और वकीलों के हितों पर प्रभाव डालते हैं। इसलिए प्रत्येक मतदाता का मतदान महत्वपूर्ण माना जाता है।

महिलाओं के लिए आरक्षित पदों के कारण यह चुनाव लैंगिक संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, चुनाव में अधिक प्रतिस्पर्धा होने के कारण प्रत्याशियों को अपनी कार्यशैली, रणनीति और प्रचार में पूरी मेहनत लगानी होगी।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में राज्य अधिवक्ता परिषद चुनाव 2026 में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित रखी गई है। प्रत्याशी चुनाव में कठिन मुकाबले का सामना करेंगे, जबकि मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर कानूनी व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।

इस चुनाव के परिणाम से न केवल कार्यकारिणी का गठन होगा, बल्कि प्रदेश के वकीलों के बीच लोकतांत्रिक भागीदारी और जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। यह चुनाव महिलाओं के नेतृत्व को सशक्त करने और कानूनी परिषद की कार्यक्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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