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Iran-Israel तनाव पर सरकार सतर्क: 67 हजार भारतीयों की वतन वापसी, राज्यसभा में जयशंकर का बयान

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Published On: 9 March 2026
"India Alerts on Iran-Israel Tensions; 67,000 Indians Repatriated"
— "India Alerts on Iran-Israel Tensions; 67,000 Indians Repatriated"

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एस. जयशंकर का राज्यसभा में बयान: भारत की नजर Iran-Israel युद्ध पर, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि

बजट सत्र के दूसरे चरण की कार्यवाही सोमवार को राज्यसभा में फिर से शुरू हो गई। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने Iran-Israel युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर महत्वपूर्ण बयान दिया। विदेश मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत लगातार पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि तनाव को कम करने और शांति स्थापित करने के लिए संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी साधन हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी घटनाक्रम पर नियमित रूप से नजर बनाए हुए हैं और सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

फंसे हुए भारतीयों की मदद के लिए उठाए गए कदम

विदेश मंत्री ने राज्यसभा में बताया कि संकट के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।

  • सरकार ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी को सुगम बनाने के लिए विशेष उड़ानों को मंजूरी दी और उन्हें संचालित किया।
  • इन प्रयासों के तहत अब तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।
  • विदेश मंत्रालय ने वहां फंसे छात्रों और व्यापारिक नागरिकों को मदद पहुंचाने के लिए सक्रिय कदम उठाए हैं।
  • ईरान में भारतीय दूतावास पूरी तरह से काम कर रहा है और हाई अलर्ट पर है।

जयशंकर ने बताया कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने कई बंधक भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालकर अन्य देशों के माध्यम से भारत भेजने में सहायता की है। इसके साथ ही व्यापारिक उद्देश्यों से वहां मौजूद नागरिकों को आर्मेनिया के रास्ते देश वापस लाने की सुविधा भी प्रदान की गई।

पश्चिम एशिया में स्थिति पर भारत की चिंता

विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष से भारत विशेष रूप से प्रभावित है। उनका कहना था कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं।
  • वहां की अस्थिर परिस्थितियों का असर न केवल वहां रहने वाले भारतीयों पर पड़ सकता है, बल्कि भारत की ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।
  • सरकार समय-समय पर नागरिकों को एडवाइजरी जारी करती रही है ताकि वे सुरक्षित रहें और अनावश्यक जोखिम न उठाएं।

जयशंकर ने सदन को बताया कि जनवरी में ही नागरिकों को आगाह किया गया था कि जितनी जल्दी हो, स्वदेश लौट आएं।

दो भारतीय नाविकों की मौत और एक लापता

विदेश मंत्री ने बताया कि हाल ही में हुए संघर्षों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक नाविक अभी भी लापता है।

  • यह घटनाएं भारतीय समुदाय के लिए चिंता का विषय हैं।
  • भारत सरकार इन मामलों में भी पूरी तरह सतर्क है और हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।
  • देश की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी संबंधित विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

भारत का कूटनीतिक रुख और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण

एस. जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि भारत की प्राथमिकता संवाद और कूटनीति के जरिए तनाव को कम करना है। उन्होंने बताया कि भारत किसी भी प्रकार की हिंसा या बड़े युद्ध की स्थिति को बढ़ावा नहीं देता।

  • भारत के लिए पश्चिम एशिया की स्थिरता और शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
  • भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वहां के आर्थिक और ऊर्जा हितों की रक्षा भारत के विदेश नीति का अहम हिस्सा है।
  • सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों और द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से लगातार स्थिति पर नजर बनाए रखी है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि पीएम मोदी लगातार परिस्थितियों पर नजर रख रहे हैं और सरकार के सभी विभाग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

सरकार की प्राथमिकता: नागरिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला

विदेश मंत्री ने राज्यसभा में स्पष्ट किया कि सरकार का प्राथमिक ध्यान भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर है। इसके साथ ही भारत की ऊर्जा जरूरतों और सप्लाई चेन को प्रभावित होने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

  • युद्ध और तनाव की स्थिति में भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।
  • सरकार सुनिश्चित कर रही है कि भारतीयों की वापसी सुगम हो और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित न हों।
  • दूतावास और मंत्रालय लगातार हाई अलर्ट पर हैं।

राज्यसभा में व और मानवता की अपील

जयशंकर ने युद्ध में मारे गए लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है।

  • उन्होंने सदन को बताया कि सरकार ने समय रहते एडवाइजरी जारी की और नागरिकों को स्वदेश लौटने की सलाह दी।
  • विदेश मंत्रालय ने नागरिकों के सुरक्षित आवागमन के लिए सभी आवश्यक संसाधनों को सक्रिय किया।
  • यह कदम भारत की जिम्मेदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है।

निष्कर्ष

राज्यसभा में एस. जयशंकर के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि भारत पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • लगभग 67,000 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से देश लौट चुके हैं।
  • भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की नीति अपनाई है।
  • सरकार हाई अलर्ट पर है और ईरान-इजरायल संघर्ष में फंसे नागरिकों की हर संभव मदद कर रही है।

विदेश मंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति में मानव सुरक्षा, संवाद और कूटनीतिक समाधान हमेशा प्राथमिकता रहेगी।

यह कदम भारत की जिम्मेदारी और वैश्विक स्तर पर अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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