मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों में फिर से सिक्स डे वीक लागू हो सकता है। CM मोहन यादव ने कर्मचारियों की लेटलतीफी और ढिलाई पर सख्त चेतावनी दी।
सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक: मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा संकेत
मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक फिर से लागू करने की संभावना तेजी से चर्चा में है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की लेटलतीफी और कामकाज में ढिलाई को लेकर नाराजगी जताई है।
सरकार का कहना है कि यदि कार्यसंस्कृति और समयपालन में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में फिर से छह दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जा सकता है।
यह फैसला लागू हुआ तो यह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में लागू किए गए पांच दिन के कार्य सप्ताह को बदल सकता है।
सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक पर सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में मंत्रालय और अन्य सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान कई कार्यालयों में कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे और कामकाज में ढिलाई देखी गई।इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यालयों में अनुशासन और समयपालन सुनिश्चित किया जाए।यदि कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू करने का निर्णय लिया जा सकता है।
इस कदम का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और तेज बनाना है।
कोरोना काल में बदला गया था कार्य सप्ताह
दरअसल, कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्य व्यवस्था में बदलाव किया था।
उस समय:
- कार्यालयों में सीमित कर्मचारियों को बुलाया जाता था
- कार्य समय में बदलाव किया गया था
- सप्ताह में छह दिन के स्थान पर पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया था
यह व्यवस्था संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए की गई थी।लेकिन अब कोरोना संकट समाप्त हो चुका है और जनजीवन सामान्य हो गया है, इसलिए सरकार पुरानी व्यवस्था पर लौटने पर विचार कर रही है।
कर्मचारियों की लेटलतीफी बनी चिंता का कारण
सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों के समय पर नहीं पहुंचने की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही हैं।
कई विभागों में यह देखा गया है कि:
- कर्मचारी देर से कार्यालय पहुंचते हैं
- कामकाज में सुस्ती रहती है
- फाइलों के निपटारे में देरी होती है
इससे सरकारी सेवाओं की गति प्रभावित होती है।सरकार का मानना है कि सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू होने से कामकाज में तेजी आएगी और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
आम नागरिकों को होती है बड़ी परेशानी
भोपाल स्थित मंत्रालय और बड़े सरकारी कार्यालयों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लोग अपने काम कराने आते हैं।लेकिन कई बार उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उदाहरण के लिए:
- अधिकारियों से मिलने का समय नहीं मिल पाता
- शुक्रवार को दोपहर बाद कामकाज लगभग बंद हो जाता है
- सोमवार को भी कई कर्मचारी देर से पहुंचते हैं
ऐसे में दूर-दराज से आए लोगों को दो-दो दिन राजधानी में रुकना पड़ता है।इससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है।
लंच ब्रेक और अनुपस्थिति से प्रभावित होता है काम
सरकारी कार्यालयों में लंबे लंच ब्रेक भी कामकाज को प्रभावित करते हैं।
कई बार यह देखा गया है कि:
- लंच ब्रेक लंबा हो जाता है
- चाय-नाश्ते के बहाने कर्मचारी अनुपस्थित रहते हैं
- दोपहर बाद कर्मचारियों की उपस्थिति कम हो जाती है
इससे नागरिकों को अपने काम के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है।इसी कारण सरकार सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू करने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है।
समयपालन सुनिश्चित करने के लिए बढ़ेगी निगरानी
सरकार ने यह भी संकेत दिए हैं कि सरकारी कार्यालयों में समयपालन सुनिश्चित करने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।
इसके लिए:
- आकस्मिक निरीक्षण किए जाएंगे
- अधिकारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी
- कर्मचारियों की उपस्थिति पर नियमित रिपोर्ट तैयार होगी
इस व्यवस्था से प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत बनाने की कोशिश की जाएगी।
सिक्स डे वीक लागू होने से क्या होगा फायदा
यदि सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू होता है तो इसके कई संभावित फायदे हो सकते हैं।
1. नागरिकों को अधिक समय मिलेगा
छह दिन कार्यालय खुलने से लोगों को अपने काम कराने के लिए अधिक अवसर मिलेगा।
2. प्रशासनिक कामकाज तेज होगा
फाइलों के निपटारे में तेजी आएगी।
3. कर्मचारियों में अनुशासन बढ़ेगा
नियमित निरीक्षण से कार्य संस्कृति बेहतर हो सकती है।
4. लंबित मामलों में कमी
लंबे समय से लंबित फाइलों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।
सरकार का उद्देश्य – बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था
मध्यप्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
सरकार चाहती है कि:
- नागरिकों को सरकारी सेवाएं आसानी से मिलें
- कार्यालयों में समयपालन सुनिश्चित हो
- कामकाज में पारदर्शिता और गति बढ़े
यदि कर्मचारियों की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू करने का निर्णय लिया जा सकता है।
निष्कर्ष
मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों की कार्यसंस्कृति को सुधारने के लिए सरकार सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि कर्मचारियों ने समयपालन और जिम्मेदारी में सुधार नहीं किया तो प्रदेश में फिर से सरकारी दफ्तरों में सिक्स डे वीक लागू किया जा सकता है।यह निर्णय लागू हुआ तो सरकारी कामकाज में तेजी आ सकती है और आम नागरिकों को भी काफी राहत मिल सकती है।
