ई-कॉमर्स कंपनी Meesho को टैक्स नोटिस: 1500 करोड़ रुपये का विवाद
नई दिल्ली। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो (Meesho) को आयकर विभाग से एक बड़ा झटका लगा है। विभाग ने असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए कंपनी को लगभग 1500 करोड़ रुपये का टैक्स डिमांड नोटिस भेजा है। इस नोटिस के तहत कुल डिमांड 1,499 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, जिसमें ब्याज भी शामिल है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे कानूनी तौर पर चुनौती देगी।
नोटिस का विवरण
आयकर विभाग ने धारा 143(3) के तहत असेसमेंट ऑर्डर जारी किया और धारा 156 के तहत डिमांड नोटिस भेजा। मीशो के मुताबिक इस नोटिस में जो टिप्पणियां और समायोजन किए गए हैं, वे सही नहीं हैं। कंपनी का दावा है कि उसके पास कानूनी और तथ्यात्मक आधार मौजूद हैं, जिनके दम पर वह अदालत में इस मांग को चुनौती दे सकती है।
मीशो ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इस नोटिस का उसके कारोबार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह विवाद नई चीज नहीं है और इससे पहले भी असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए इसी तरह का नोटिस जारी किया गया था। उस मामले में मीशो ने अदालत का रुख किया था और अंतरिम रोक भी प्राप्त की थी।
कंपनी का कानूनी रुख
मीशो ने बयान में कहा कि वे इस नोटिस के खिलाफ कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं। कंपनी ने कहा कि अदालत में वह अपने पक्ष को तथ्य और कानूनी आधार के साथ रखेगी। इससे पहले कर्नाटक हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2025 को इसी तरह के नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
कंपनी ने यह भी बताया कि यह विवाद उनके प्रॉस्पेक्टस में पहले से उल्लेखित था। कंपनी का मानना है कि छोटे लेकिन महत्वपूर्ण गलतफहमियों और समायोजन के कारण यह डिमांड नोटिस जारी किया गया है।
आयकर विभाग का नजरिया
आयकर विभाग का कहना है कि कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग और खातों की जांच के बाद यह नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने इस मामले को असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए तैयार किया है और इसे कानूनी रूप से वैध माना गया है।
इस नोटिस के तहत कंपनी को अपने खातों, लेन-देन और वित्तीय विवरणों के अनुसार समायोजन करना होगा। विभाग का उद्देश्य सुनिश्चित करना है कि सभी नियम और कर कानून सही तरीके से पालन किए जाएं।
Meesho पर पहले भी नोटिस जारी
मीशो के अनुसार, पहले भी असेसमेंट ईयर 2022-23 के लिए इसी तरह का नोटिस जारी किया गया था। उस समय कंपनी ने अदालत का रुख किया और विवाद लंबित है। इसके चलते अब आने वाले दिनों में मीशो का ध्यान कानूनी प्रक्रिया और अदालत में अपनी स्थिति मजबूत करने पर रहेगा।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि इस नोटिस का उसके कारोबार पर फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, कंपनी इस मामले को गंभीरता से ले रही है और पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत इसका समाधान करेगी।
ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ते कर विवाद
मीशो को नोटिस मिलने के बाद ई-कॉमर्स सेक्टर में कर विवादों पर ध्यान बढ़ गया है। भारत में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती आमदनी और व्यापारिक लेन-देन के कारण आयकर विभाग ने ऐसे मामलों पर निगरानी तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए कर नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। अगर कंपनियां नियमों का पालन नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ बड़े नोटिस और दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है।
भविष्य की रणनीति
मीशो ने कहा कि वह अपने कानूनी और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर इस मामले का जवाब देगा। कंपनी का उद्देश्य है कि नोटिस के चलते उनके कारोबार पर कोई बड़ा असर न पड़े।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत में वह अपने वित्तीय रिकॉर्ड, लेन-देन और रिपोर्टिंग का पूरा विवरण पेश करेगी और इस डिमांड नोटिस को चुनौती देगी।
निष्कर्ष
ई-कॉमर्स कंपनी मीशो को आयकर विभाग का 1500 करोड़ रुपये का नोटिस एक बड़ा झटका है। कंपनी ने इस नोटिस को चुनौती देने का फैसला किया है और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष पेश करेगी। इसके साथ ही, कंपनी ने यह भी कहा कि नोटिस का उसके व्यवसाय पर फिलहाल कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ेगा।
यह मामला न केवल मीशो के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए भी संकेत है कि भारत में कर नियमों और वित्तीय रिपोर्टिंग पर कड़ी निगरानी है।
