US-Israel-Iran जंग: मिडिल ईस्ट में बिगड़े हालात, एयरपोर्ट और शहरों में धमाके, संयुक्त राष्ट्र ने तत्काल शांति प्रयास की मांग की
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा युद्ध आज आठवें दिन में प्रवेश कर गया है। पिछले एक सप्ताह से जारी सैन्य संघर्ष में किसी भी पक्ष ने पीछे हटने का संकेत नहीं दिया है, जिससे क्षेत्र में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। तेल अवीव से तेहरान तक मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और ईरान का जवाब
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया। इस अभियान के तहत ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबरें सामने आईं। इस हमले ने क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुंचा दिया।
Iran ने इसके तुरंत बाद इजरायल और कई खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इस जवाबी कार्रवाई ने मिडिल ईस्ट में सुरक्षा और स्थिरता की स्थिति को और नाजुक बना दिया। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी कि मौजूदा संघर्ष किसी भी समय नियंत्रण से बाहर जा सकता है और सभी पक्षों को तत्काल बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।
मानवीय और सैन्य नुकसान
तेहरान और अन्य प्रभावित इलाकों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से अब तक ईरान में 1,230 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस अवधि में कई नागरिक और सैन्य हताहत हुए हैं। शनिवार सुबह लगभग 50 इजरायली फाइटर जेट्स ने तेहरान के एक अंडरग्राउंड बंकर को निशाना बनाया, जिसे अली खामेनेई के लिए बनाया गया था।
Iran के संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई की भूमिका को लेकर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता व्यक्त की जा रही है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ईरान के साथ कोई समझौता तभी संभव है जब वे बिना शर्त आत्मसमर्पण करें। उनके प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि युद्ध चार से छह सप्ताह तक चल सकता है।
Iran का रुख
Iran के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि कुछ देशों ने मध्यस्थता की कोशिशें शुरू कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान हमेशा शांति का पक्षधर है, लेकिन देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा के लिए हर कदम उठाया जाएगा।
शनिवार तड़के तेहरान के मेहराबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास जोरदार धमाकों से अफरातफरी मच गई। स्थानीय मीडिया के अनुसार विस्फोट इतने शक्तिशाली थे कि आसपास की इमारतों की खिड़कियां हिल गईं। सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत अलर्ट जारी किया और एयरपोर्ट के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी।
खाड़ी देशों में ईरानी हमले
Iran ने खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया। प्रमुख हमलों की जानकारी इस प्रकार है:
- बहरीन: सरकारी तेल रिफाइनरी पर मिसाइल हमला हुआ, जिससे आग लगी। बाद में आग पर काबू पाया गया।
- दुबई: एयरपोर्ट के पास मिसाइल का मलबा गिरा, जिससे सुरक्षा व्यवस्था में भारी तनाव पैदा हुआ।
- कुवैत: कुवैत की एयर डिफेंस प्रणाली ने कई मिसाइल और ड्रोन रोक लिए। इसके बाद अमेरिका ने कुवैत सिटी में अपने दूतावास का परिचालन अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया।
यूएई ने भी दावा किया कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ने 120 से अधिक ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक रोक दिया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से तुरंत वार्ता शुरू करने और तनाव को कम करने की अपील की है। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने भी संघर्ष को रोकने और कूटनीतिक समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह युद्ध बड़े पैमाने पर मानव, आर्थिक और भौगोलिक क्षति पैदा कर सकता है।
प्रभाव और निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण नागरिकों की सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। एयरपोर्ट और शहरों में धमाकों से नागरिक जीवन असुरक्षित हो गया है। बढ़ते संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा कर दी है।
हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने पीछे हटने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही स्थिति को स्थिर किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियों की भूमिका इस समय बेहद महत्वपूर्ण है।
इस संघर्ष के चलते मिडिल ईस्ट में राजनीतिक स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर वार्ता और कूटनीति के प्रयास विफल रहे, तो यह संघर्ष और व्यापक और घातक हो सकता है।
