ग्वालियर में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने माधव वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों के साथ होली मनाकर मानवता और सेवा का प्रेरणादायक संदेश दिया।
माधव वृद्धा आश्रम में होली: ग्वालियर में मानव सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण
माधव वृद्धा आश्रम में होली का आयोजन
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ग्वालियर के पदाधिकारियों ने माधव वृद्धा आश्रम में बुजुर्गों के साथ मनाई होली
ग्वालियर। होली के पावन पर्व के अवसर पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ग्वालियर इकाई द्वारा एक सराहनीय पहल करते हुए माधव वृद्धा आश्रम में रह रहे बुजुर्गों के साथ होली का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
संगठन का मानवीय संदेश
इस अवसर पर संगठन की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती मधु शर्मा ने कहा कि सामान्यतः लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ होली का पर्व मनाते हैं, लेकिन समाज में ऐसे भी कई बुजुर्ग हैं जिन्हें उनके परिवार वालों ने छोड़ दिया है या जिनका कोई अपना नहीं है। ऐसे बुजुर्गों के साथ त्योहार मनाना ही सच्ची मानव सेवा है।
बुजुर्गों के साथ प्रेम और सम्मान के पल
कार्यक्रम के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने आश्रम में उपस्थित बुजुर्गों को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं तथा उनके साथ प्रेमपूर्वक समय बिताया। बुजुर्गों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए खुशी व्यक्त की।
कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारी
इस कार्यक्रम में श्रीमती मधु शर्मा (प्रदेश अध्यक्ष), श्रीमती सरिता पाठक (प्रदेश उपाध्यक्ष, ग्वालियर) एवं श्री सुमीत पाठक विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संगठन का उद्देश्य और सामाजिक जिम्मेदारी
भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह यादव ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल अधिकारों की बात करना ही नहीं बल्कि समाज के कमजोर, असहाय और उपेक्षित लोगों के साथ खड़े रहना भी है। वृद्धाश्रम में जाकर बुजुर्गों के साथ होली मनाना मानवीय संवेदनाओं का श्रेष्ठ उदाहरण है।
उन्होंने ग्वालियर इकाई की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्य समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं।
अन्य पदाधिकारियों का संयुक्त संदेश
सांगठन के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, युवराज सिंह राठौर, डॉ. प्रेमकुमार वैध, रामवेश सिंह राजावत, मनीष गुप्ता, जीवनलाल जैन चायवाले एवं अन्य पदाधिकारियों ने अपने संयुक्त संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा और सम्मान का विशेष महत्व है।
भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों का महत्व
बुजुर्ग हमारे अनुभव और संस्कारों का स्रोत हैं, इसलिए उनके साथ समय बिताना और उन्हें सम्मान देना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। संगठन भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं मानवीय कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
