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Chambal नदी पर 720 मीटर लंबा सेवरघाट पुल, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों के लिए बड़ा फायदा

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Published On: 6 March 2026
720-Meter Sewarghat Bridge Over Chambal River Benefits Pilgrims and Traders
— 720-Meter Sewarghat Bridge Over Chambal River Benefits Pilgrims and Traders

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मुरैना-करौली सेवरघाट पुल बनकर तैयार, दूरी आधी होने से आमजन और व्यापारियों को होगा फायदा

मुरैना। मध्य प्रदेश को मुरैना जिले से राजस्थान के करौली जिले से सीधे जोड़ने वाला सेवरघाट पुल अब बनकर तैयार हो चुका है। यह पुल Chambal नदी पर बनाया गया है और निर्माण कार्य लगभग पूरा हो गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस पुल के शुरू होने से मुरैना जिले के जौरा-कैलारस से करौली की दूरी 160 किलोमीटर से घटकर लगभग 80 किलोमीटर रह जाएगी।

यह पुल न केवल यात्रियों और तीर्थयात्रियों के लिए समय और दूरी की बचत करेगा, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और पत्थर कारोबारियों के लिए भी आर्थिक रूप से लाभदायक साबित होगा।

नवरात्र और तीर्थ यात्रियों के लिए बड़ा लाभ

मध्य प्रदेश और राजस्थान के लोगों के लिए यह पुल खास महत्व रखता है, क्योंकि नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर बड़ी संख्या में लोग कैला देवी के दर्शनों के लिए इस मार्ग से यात्रा करते हैं। वर्तमान में, जौरा से करौली जाने के लिए लोग मुरैना, धौलपुर, बाड़ी और सरमथुरा होते हुए लंबी दूरी तय करते हैं।

कैलारस के कई ग्रामीण अब भी चंबल नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेते हैं, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। सेवरघाट पुल शुरू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

पुल निर्माण का इतिहास और तकनीकी विवरण

राजस्थान सरकार ने इस पुल के निर्माण के लिए साल 2020 में स्वीकृति दी थी। पुल की लंबाई 720 मीटर और चौड़ाई 10 मीटर है। यह पुल 13 पिलरों पर खड़ा किया गया है।

पुल निर्माण पूरा होने के बावजूद, फिलहाल इसे वाहनों के लिए खुला नहीं किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि केवल राजस्थान क्षेत्र में एप्रोच रोड का कुछ निर्माण बाकी है, जिसके पूरा होते ही पुल को एक महीने के अंदर आवागमन के लिए खोला जाएगा।

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समय और दूरी में भारी बचत

सेवरघाट पुल के शुरू होने से मुरैना जिले के जौरा-कैलारस से करौली की यात्रा दूरी 160 किलोमीटर से घटकर 80 किलोमीटर रह जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत में भी कटौती होगी।

स्थानीय लोग और यात्री इस बदलाव को लेकर उत्साहित हैं। इससे तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा की सुविधा बढ़ेगी और सड़क मार्ग पर होने वाले जोखिम भी कम होंगे।

व्यापारियों और पत्थर कारोबारियों को आर्थिक लाभ

पुल के निर्माण से पत्थर कारोबारियों को भी बड़ा लाभ होगा। क्षेत्रीय व्यापार अब सीधे राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच आसानी से संचालित किया जा सकेगा।

स्थानीय व्यापारी संतोष वर्मा का कहना है कि पुल शुरू होने के बाद सड़क परिवहन आसान हो जाएगा, जिससे माल का परिवहन तेज और सुरक्षित होगा। यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगा।

पुल के उद्घाटन की तैयारी

सेवरघाट पुल प्रभारी संतोष वर्मा ने बताया कि पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। केवल राजस्थान में कुछ हिस्सों की एप्रोच रोड का निर्माण शेष है। उन्होंने कहा कि यह कार्य जल्दी पूरा कर लिया जाएगा और एक महीने के भीतर पुल का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

इस पुल के खुलने से लोगों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा। साथ ही, यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी मजबूत करेगा।

पूर्व की यात्रा और कठिनाइयाँ

अब तक जौरा से करौली जाने के लिए लोग लगभग 160 किलोमीटर की लंबी यात्रा करते थे। इस मार्ग में कई जगहों पर घाट, नदी पार और लंबा चक्कर शामिल था।

कैलारस के ग्रामीणों को चंबल नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जो कई बार जोखिम भरा भी साबित होता था। पुल बन जाने से अब यह कठिनाई खत्म हो जाएगी और यातायात सुरक्षित और आसान हो जाएगा।

तकनीकी और निर्माण की चुनौतियाँ

720 मीटर लंबा और 10 मीटर चौड़ा सेवरघाट पुल 13 पिलरों पर खड़ा किया गया है। पुल निर्माण में स्थानीय भौगोलिक और नदी की गहराई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

अधिकारियों ने बताया कि निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। पुल लंबे समय तक मजबूत और सुरक्षित रूप से कार्य करने के लिए बनाया गया है।

पुल का सामाजिक और आर्थिक महत्व

सेवरघाट पुल का निर्माण न केवल यात्रा की सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास में भी योगदान देगा।

  • तीर्थयात्रियों के लिए लाभ: कैला देवी मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने की यात्रा आसान होगी।
  • व्यापारियों के लिए लाभ: माल ढुलाई आसान और सुरक्षित होगी।
  • स्थानीय लोगों के लिए लाभ: रोजमर्रा की यात्रा का समय और लागत कम होगी।

स्थानीय लोग और व्यापारी दोनों पुल के शुरू होने के बाद उम्मीद कर रहे हैं कि यह क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में नई रफ्तार लाएगा।

निष्कर्ष

मुरैना-करौली सेवरघाट पुल का निर्माण पूरी तरह से तैयार है। फिलहाल केवल राजस्थान क्षेत्र में कुछ एप्रोच रोड का निर्माण शेष है, लेकिन जैसे ही यह कार्य पूरा होगा, पुल आवागमन के लिए खोला जाएगा।

इस पुल से जौरा-कैलारस से करौली की दूरी आधी हो जाएगी, यात्रियों और व्यापारियों दोनों को बड़ा फायदा होगा। साथ ही, यह पुल क्षेत्रीय विकास, तीर्थयात्रा सुविधाओं और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूत करेगा।

स्थानीय प्रशासन और राजस्थान सरकार की साझा पहल से यह पुल दोनों राज्यों के लिए सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का प्रतीक बनेगा।

 

कुमकुम सोनी स्वराज वाणी न्यूज मे कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है। इन्होंने स्नातक पत्रकारिता एवं जनसंचार से की है। यह विशेषतः राजनीति एवं भू-राजनीति से जुड़े मुद्दों का गहन विशलेषण कर सरल भाषा में आम जनता के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।… Read More

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